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निकला यौमे आशुरा पर ताजिया जुलुस, सीनाजनी-फने सिपहगिरी के साथ दिखा देशभक्ति का जज्बा

 Anurag Tiwari |  2016-10-12 12:08:24.0

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तहलका न्यूज ब्यूरो

वाराणसी. बुधवार को शहीदाने कर्बला इमाम हुसैन की याद में यौमे आशुरा की दसवीं मोहर्रम पर शिव की नगरी काशी आंसुओं के समंदर में डूबी रही. शाम ढलते-ढलते शहर के मुस्लिम बहुल इलाकों में ताजियों की लम्बी कतारें लगी रहीं. ख़ास बात रहे कि ताजिये के जुलूस में नौजवान राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लेकर चलते नजर आए.

शहर भर से उमड़े ताजिये के जुलूस के चलते दरगाह ए फातमान, लाट सरैया, शिवाला में जाम की स्थिति पैदा हो गई. अलम बरदारों के पीछे चल रहे ताजिए के जुलूस फन-ए-सिपहगिरी करतबों से सजे हुए थे. जुलूस में हुए शस्त्र संचालन देखने वालों के सामने कर्बला की जंग का मंजर पेश कर रहे थे. खास तौर पर तामील की गई रांगे वाली ताजिया, नगीने वाली ताजिया, शीशे वाली ताजिया, बुर्राक वाली ताजिया के जुलूस तो निकले मगर इनकी जगह पर केवल फूल मालाएं ही दफन की गईं.


इस मौके पर शहर में जगह-जगह मेले भी लगे. पीलीकोठी, फातमान, बड़ी बाजार, मदनपुरा, नई सड़क, काली महाल, रेवड़ी तालाब, बजरडीहा, जक्खा और लोहता में केवल भीड़ का लाम था और था तो ताजियों का रेला. जुलूस में निकले लोगों ने बड़ी शिद्दत से ताजियों को महकते फूलों से सजा रखा था. इन खूबसूरत ताजियों को निहारने के लिए लोगों ने रास्ते में पड़ने वाले घरों की छतों और खिडकियों पर भीड़ लगा रखी थी. इस मौके पर बच्चों ने भी मन्नती ताजिए निकाले जिनकी कोई गिनती नहीं थी. यह वे ताजिए थे जो किसी मन्नत के पूरा होने पर निकाले गए थे.

जगह-जगह चले फन ए सिपहगिरी के करतब को देखने के लिए मजमा लगा रहा, जिसमें युवा विभिन्न शस्त्रों के माध्यम से कौशल दिखा रहे थे. जगह-जगह समाज सेवियों द्वारा शरबत व तबर्रुक का वितरण किया गया. ताजियों के जुलूस दरगाह फातमान, सरैयां इमामबाड़ा व भेलूपुर स्थित भवनिया कब्रिस्तान पहुंचे.

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