Breaking News
  • Breaking News Will Appear Here

ग़मज़दा माहौल में शुरू हुआ मोहर्रम

 Sabahat Vijeta |  2016-10-03 15:41:00.0

kj
तहलका न्यूज़ ब्यूरो 


लखनऊ. माहौल कर्बला के शहीदों के गम में डूब चुका है. पुराना लखनऊ काले झंडों से पट गया है. सुबह से शुरू हुआ मजलिस-मातम का सिलसिला जारी है. एतिहासिक आसिफ़ी इमामबाड़े से आज शाम को शाही ज़रीह का जुलूस भी शुरू हो चुका है. यह जुलूस देर रात में छोटे इमामबाड़े पहुंचेगा.


hamidul-hasan


पहली मोहर्रम को इमामबाड़ा गुफरानमआब में मौलाना कल्बे जवाद ने कहा कि मुहर्रम में लखनऊ की शोहरत मिर्ज़ा दबीर और मीर अनीस के मरसियों की वजह से है. उन्होंने अफ़सोस ज़ाहिर किया कि धीरे-धीरे यह फन लखनऊ से दूर होता जा रहा है. उन्होंने कहा कि मिर्ज़ा दबीर और मीर अनीस ने ही लखनऊ के उर्दू अदब को भी मालामाल किया.


meesam-zaidi


मौलाना कल्बे जवाद ने अजादारों से कहा कि बड़े इमामबाड़े में होने वाली मजलिसों में ज़रूर शिरकत करना चाहिए क्योंकि हुकूमत का मंसूबा इमामबाड़े को पिकनिक सपाट बनाने का है. मजलिसें ही इस मंसूबे को नाकाम करेंगी. मौलाना ने कहा कि मजलूम का साथ देने वाले को ही कामयाबी हासिल होती है. उन्होंने कहा कि यज़ीद सिर्फ 1400 साल पहले मौजूद नहीं था. वह तो हर ज़माने में मौजूद है. उन्होंने कहा कि उस ज़ालिम को शुरू से ही मालूम था कि हजरत इमाम हुसैन उससे बैयत नहीं करेंगे. उसका मकसद शुरू से ही इमाम हुसैन को शहीद करने का था. इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने भी कहा था कि मेरे जैसे यज़ीद के जैसों से बैयत नहीं करते. अपने एक जुमले में हुसैन ने पूरी इंसानियत समेट दी थी. इमाम हुसैन ने यज़ीद से कहा कि अगर आदम ने इब्लीस से बैयत कर ली होती. अगर नूह ने काफिरों से बैयत कर ली होती. अगर इब्राहीम ने नमरूद से बैयत कर ली होती. अगर मूसा ने फिरौन से बैयत कर ली होती. अगर रसूल ने सरदाराने मक्का से बैयत कर ली होती और अगर अली ने मुनाफिकों से बैयत कर ली होती तो मैं भी तुझसे बैयत कर लेता लेकिन जब उन्होंने बैयत नहीं की तो मैं भी नहीं करूंगा. इमाम हुसैन ने यह साफ़ कर दिया कि बैयत का मामला शक्सियत का नहीं किरदार का मामला है. उन्होंने यह भी साबित किया कि यह शहजादों की लड़ाई नहीं थी बल्कि किरदार की जंग थी. एक तरफ हुसैनी किरदार था तो दूसरी तरफ यज़ीदी किरदार था.


abbas-nasir


मौलाना कल्बे जवाद ने कहा कि जो हुसैनी किरदार अपनाना चाहता है वह यजीदों से बैयत नहीं कर सकता है. अज़ादारी को आज की दुनिया का सबसे बड़ा मोजिज़ा बताते हुए मौलाना ने कहा कि हमने चाँद के दो टुकड़े होते नहीं देखे. हज़रत ईसा को मुर्दों को जिंदा करते हमने नहीं देखा. जनाबे इब्राहीम का मोजिज़ा भी हमने नहीं देखा लेकिन अज़ादारी का जिंदा मोजिज़ा हम अपनी आँखों से देख रहे हैं. उन्होंने कहा कि दुनिया के किसी भी इंसान को गम का इंतज़ार नहीं रहता है लेकिन कर्बला के गम की ऐसी खुसूसियत है कि हमें उसका इंतज़ार रहता है. बाद में मौलाना ने जनाबे मुस्लिम के मसायब पेश किये जिसे सुनकर लोग रो पड़े.


marsiya


आज सुबह से ही शुरू हुई मजलिसों में इमामबाड़ा आगा बाक़र में मौलाना मीसम ज़ैदी, शिया कालेज में मौलाना अब्बास नासिर सईद और मदरसा नाजमिया में मौलाना आयतुल्लाह हमीदुल हसन ने मजलिसों को खिताब किया. नाजिम साहब के इमामबाड़े में मर्सिये की मजलिस में भी काफी भीड़ उमड़ी. रात में बड़े इमामबाड़े से छोटे इमामबाड़े की तरफ शाही ज़रीह का जुलूस जारी है.

Tags:    

  Similar Posts

Share it
Share it
Share it
Top