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65 साल से चल रही मुद्रा जी की कलम थम गई अचानक

 Abhishek Tripathi |  2016-06-13 12:29:51.0

Mudraतहलका न्यूज़ ब्यूरो


लखनऊ. लम्बे समय से बीमार सुप्रसिद्ध साहित्यकार मुद्रा राक्षस का आज सोमवार को 83 बरस की अवस्था में निधन हो गया. मुद्रा राक्षस जितने बड़े साहित्यकार थे उतने ही सरल और साधारण नज़र आते थे. वह काफी समय से बीमार थे. उन्होंने हिन्दी साहित्य की श्रीवृद्धि के लिए इतना कुछ किया लेकिन सरकारी स्तर पर उन्हें उसकी सराहना नहीं मिल पायी. यही वजह रही कि पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव अचानक बशीरतगंज स्थित उनके घर पहुँच गए थे तो भावुक मुद्रा जी की आँखों में आंसू आ गए थे. शिवपाल सिंह ने उनके घर पर ही यह एलान किया था कि उनके अच्छे से अच्छे इलाज की व्यवस्था सरकार करेगी.


पिछले महीने मुद्रा जी को तबियत ज्यादा खराब होने पर बलरामपुर अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उनकी तबियत में सुधार होता नहीं दिखा तो उन्हें किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में रेफर कर दिया गया. वहां वह काफी दिन रहे लेकिन एक हफ्ता पहले उन्होंने अचानक घर जाने की जिद पकड़ ली. उन्हें घर ले आया गया. आज अचानक उनकी तबियत ज्यादा खराब हो गई तो उन्हें ट्रामा सेंटर ले जाने का फैसला किया गया लेकिन अस्पताल पहुँचने से पहले ही उनका निधन हो गया.


mudrarakshas65 किताबें लिखने वाले मुद्रा जी इतने साधारण तरीके से मिलते थे कि उन्हें देखकर सहसा यकीन करना मुश्किल था कि वह वास्तव में युगपुरुष हैं. 21 जून 1933 को लखनऊ के बेहटा गाँव में पैदा हुए मुद्रा राक्षस की रचनाएं तभी प्रकाशित होने लगी थीं जब वह महज़ 20 साल के थे. 22 साल की उम्र में उनकी प्रसिद्धि की महक लखनऊ से बाहर चली गई थी. लेखन का कोई भी क्षेत्र उनके कलम से अछूता नहीं था. कहानी, कविता, उपन्यास, आलोचना, संस्कृति, नाटक, इतिहास कोई भी विषय ऐसा नहीं बचा जिस पर उन्होंने लिखा न हो.


मुद्रा जी जितने शानदार लेखक थे उतने ही शानदार टिप्पणीकार भी थे. सच कहने में वह कभी झिझकते नहीं थे. उस सच की कितनी भी आलोचना हो वह कभी परवाह नहीं करते थे. उनका संगीत और दूसरी कलाओं में भी अच्छा ख़ासा दखल था. 15 साल उन्होंने आकाशवाणी में एडिटर स्क्रिप्ट के पद पर नौकरी भी की. साहित्य, समाज और सियासत सबसे उनके नाते रहे. कलाकारों के पक्ष में होने वाले आन्दोलनों में भी उनकी भागीदारी रहती थी. लेखकों और कलाकारों की समस्या होती तो मुद्रा जी तत्काल पहुँच जाते थे. उन्हें कहीं पैदल पहुँचने में भी दिक्क़त नहीं होती थी, बस कोशिश करते थे कि सबसे पहले पहुंचें.


Mudrarakshas-1संगीत नाटक अकादमी का प्रतिष्ठित पुरस्कार भी उन्हें मिला. विश्व शूद्र महासभा ने भी उनका सम्मान किया. इन सम्मानों से बढ़कर लोगों के दिलों में जो उनका सम्मान था वह विरलों को नसीब हो पाता है. उनके पुत्र रोमी शीराज़ मुद्रा राक्षस भी अच्छे लेखक हैं. साहित्य के क्षेत्र में काम तो रुकेगा नहीं. लिखने वालों का आन्दोलन भी चलता ही रहेगा. गीत-संगीत की महफ़िलें भी सजेंगी, नाटक भी मंचित होते रहेंगे. कलाकारों का अपने अधिकारों के लिए आन्दोलन भी कभी रुकेगा नहीं लेकिन बशीरतगंज की सड़क का सन्नाटा और कार्यक्रमों में अचानक उनके पहुँचने का क्रम आज अचानक टूट गया है.


उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने हिन्दी के वरिष्ठ साहित्यकार मुद्रा राक्षस के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है. राज्यपाल ने अपने शोक सन्देश में कहा है कि मुद्राराक्षस ने हिन्दी साहित्य में बहुमूल्य योगदान दिया. वे कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों से जुडे़ रहे तथा उन्हें अनेक सम्मान भी प्राप्त हुए. राज्यपाल ने कहा कि मुद्राराक्षस का निधन हिन्दी साहित्य क्षेत्र की अपूर्णनीय क्षति है. राज्यपाल ने अपने शोक सन्देश में दिवंगत आत्मा को सद्गति प्रदान करने की कामना करते हुए परिजनों के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त की है.


उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने वरिष्ठ साहित्यकार मुद्राराक्षस के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है. उन्होंने कहा कि स्वर्गीय मुद्राराक्षस बहुमुखी प्रतिभा के धनी साहित्यकार थे. उन्होंने साहित्य की अनेक विधाओं में कार्य किया. वे आजीवन सामाजिक व मानवीय मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहे. हिन्दी साहित्य में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा. श्री यादव ने दिवंगत आत्मा की शांति की कामना करते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति अपनी संवेदना भी व्यक्त की है.


वरिष्ठ साहित्यकार दयानंद पाण्डेय ने हिन्दी चम्बल के बागी मुद्रा राक्षस को अश्रुपूरित श्रधांजलि दी है. लेखक एस.एन. लाल ने मुद्रा जी के निधन को हिन्दी साहित्य के एक युग का समापन बताया है.

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