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निजी क्षेत्र और न्यायपालिका में आरक्षण लाएं मोदी, वरना बंद करे बयानबाजी : मायावती

 Sabahat Vijeta |  2016-03-25 14:06:06.0

तहलका न्यूज़ ब्यूरो


mayavatiलखनऊ, 25 मार्च. मायावती ने दलितों के आरक्षण के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री का यह कथन कि दलितों से आरक्षण कोई छीन नहीं सकता है बिलकुल उसी तरह की जुमलेबाजी है जैसे कि विदेशों से काला धन लाकर वह हर भारतीय के खाते में 20-20 लाख रुपये जमा करने वाले थे. वह अच्छे दिन लाने वाले थे.


बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने आर.एस.एस. और उसके राजनीतिक संगठन भाजपा को दलित और अन्य पिछड़े वर्ग-विरोधी मानसिकता वाला बताते हुए केन्द्र की सरकार की कथनी व करनी में व्यापक अन्तर बताया है. मायावती ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा बार-बार सफ़ाई देने के बावजूद उनकी इस बात पर लोगों को विश्वास करना मुश्किल ही नहीं बल्कि असम्भव लग रहा है.


मायावती ने आज यहाँ जारी एक बयान में कहा कि ‘‘आरक्षण‘‘ के सम्बन्ध में आर.एस.एस. का जब-जब विवादित व जातिवादी मानसिकता वाला बयान आता है, तब-तब प्रधानमंत्री यह सफ़ाई देते हैं कि आरक्षण दलितों का हक़ है, इसे कोई छीन नहीं सकता है. वास्तव में सदियों से गुलामी व अपमान झेलते चले आ रहे दलितों के लिये आरक्षण की व्यवस्था कोई मामूली हक़ नहीं है, बल्कि डा. भीमराव अम्बेडकर के सौजन्य से प्राप्त यह जीने का एक संवैधानिक हक़ है, परन्तु इसे भी पहले कांग्रेस पार्टी और अब भाजपा की सरकार दोनों ने ही आपसी साजि़श के तहत मिलकर इसे पूरी तरह से निष्क्रिय व निष्प्रभावी बनाकर रख दिया है. वास्तव में संविधान के इस प्रकार के विशेष मानवतावादी प्रावधानों को ‘‘काग़ज़ी व दिखावटी‘‘ बनाकर छोड़ दिया गया है.


उन्होंने कहा कि अति दुःखद के साथ-साथ अन्यायपूर्ण बात यह है कि कांग्रेस पार्टी व भाजपा दोनों की आपसी मिलीभगत व दलित-विरोधी मानसिकता के कारण आरक्षण की इस मानवीय व्यवस्था को कभी भी पिछले लगभग 68 वर्षों के दौरान ईमानदारीपूर्वक सही तरीके से लागू ही नहीं होने दिया और अब उसी संकीर्ण मानसिकता वाले लोग आरक्षण की इस व्यवस्था में कमियां निकालकर इसकी समीक्षा की अनुचित जातिवादी बात कर रहे हैं. इसमें आर.एस.एस. व भाजपा की कट्टर हिन्दुत्ववादी विचारधारा साफ झलकती है. ऐसी मानसिकता वाले लोगों को चाहिये कि वे पहले ‘‘भारत माता‘‘ की सही संतानों अर्थात दलितों व अन्य पिछडों आदि से माफी मांगे कि वे शर्मिन्दा हैं कि आरक्षण का 50 प्रतिशत भी सही लाभ इन उपेक्षित व शोषित लोगों को अब तक लगभग 68 वर्षों में नहीं पहुँचा पाये हैं.


उन्होंने कहा कि इस बारे में असली कड़वी बात यही है कि आर.एस.एस. व भाजपा में जातिवादी मानसिकता रखने वाले लोगों ने ही कभी भी दलितों व उनके मसीहा बाबा साहेब डा. अम्बेडकर का भला नहीं होने दिया, परन्तु अब अपनी सरकार की घोर विफलताओं पर से पर्दा डालने के लिये साम, दाम, दण्ड, भेद आदि अनेकों हथकण्डों को अपनाया जा रहा है. इन हथकण्डों में डा. भीमराव अम्बेडकर के नाम पर स्मारक व संग्रहालय आदि की घोषणा करके उन्हें अनेक प्रकार से वरग़लाने का काम भी शामिल है, जिस साजि़श से देश की जनता को और ख़ासकर उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड व पंजाब आदि राज्यों के लोगों को बहुत ही सावधान रहने की ज़रूरत है.


मायावती ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार अपना हृदय परिवर्तन करके अगर वास्तव में दलितों की हितैषी बनना चाहती है व उनके लिये सही ठोस काम करना चाहती है तो सबसे पहले उसे सरकारी नौकरियों में प्रमोशन में आरक्षण की रूकी व्यवस्था को बहाल करना चाहिये, जिसके सम्बन्ध में संविधान संशोधन विधेयक राज्यसभा से पारित होकर लोकसभा में लम्बित है. प्राइवेट सेक्टर व अन्य जिन भी क्षेत्रों में जहाँ आरक्षण की व्यवस्था नहीं है, जैसे न्यायपालिका आदि में, वहाँ नरेन्द्र मोदी सरकार को आरक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिये. सरकारी नौकरियों व शिक्षा के क्षेत्र में जहाँ हज़ारों की संख्या में आरक्षित पद वर्षों से खाली पड़े हुये हैं, उस बैकलाग को भराना आदि ज़रूरी है.


साथ ही, आरक्षण के मामले में बार-बार सफाई देने में समय बर्बाद करने के बजाय, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पहले अपनी पार्टी, सरकार व आर.एस.एस. के उन महानुभावों पर सख़्त अंकुश लगाना चाहिये जो आरक्षण को लेकर आये दिन ग़लत व व्यर्थ की बयानबाज़ी करते रहते हैं. इतना ही नहीं बल्कि सरकारी स्तर पर पहल करके आरक्षण को संविधान की नौवीं अनुसूची में ज़रूर शामिल कर लेना चाहिये, तभी देश को लग पायेगा कि उनकी सरकार दलितों को आत्म-सम्मान व स्वाभिमान देने के मामले में थोड़ी गम्भीर है. इस सम्बन्ध में केवल ‘‘जुमलेबाजी‘‘ से इस उपेक्षित समाज के लोगों का क्या भला हो पायेगा. बी.एस.पी. की स्थापना से पहले ऐसी जुमलेबाजी कांग्रेस पार्टी भी लगातार करती रही थी. ख़ासकर दलितों व अन्य पिछड़ों के हित में काम करते रहना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है, जैसा कि उत्तर प्रदेश में बी.एस.पी. की सरकार ने अपने चार शासनकाल के दौरान करके भी दिखाया है, जो लोगों की निगाह में आज भी मील का पत्थर है.

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