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आधा कार्यकाल गुज़र गया मगर मोदी को नहीं दिखा बेघरों का दर्द

 Sabahat Vijeta |  2016-11-20 15:38:03.0

mayawati
लखनऊ. बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने 500 व 1,000 रुपये की नोट बन्दी के मामले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार की सोच, समझ व सफाई को जनविरोधी व दमनकारी बताते हुये कहा कि भाजपा के शीर्ष नेताओं व मंत्रियों आदि को उनके द्वारा विभिन्न प्रकार के जुगाड़ों के कारण अपनी रोज़मर्रा की जरूरतों को पूरा करने में भले ही कोई परेशानी नहीं आ रही हो, परन्तु देश के करोड़ों गरीबों, किसानों, महिलाओं, मजदूरों व अन्य मेहनतकश एवं मध्यम आय-वर्गीय लोगों की भारी दिक्कतों व परेशानियों की अनदेखी करने के बजाय उन्हें दूर करने के लिये केवल घोषणायें आदि नहीं बल्कि गंभीर व सार्थक प्रयास करना चाहिये ताकि जमीनी स्तर पर इन वर्गों के लोगों को थोड़ी राहत मिल सके.


उन्होंने कहा कि वैसे तो आगरा में आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की हुई ’परिवर्तन रैली’ पहले की उनकी रैलियों की तरह ही फ्लाप साबित हुई. हालाँकि इस रैली के लिये पड़ोसी राज्यों मध्य प्रदेश व राजस्थान से व टिकटार्थियों के माध्यम से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जि़लों से भी भाड़े की भीड़ जुटाने की कोशिश की गयी थी. साथ ही, जो भीड़ वहाँ रैली स्थल पर मौजूद थी उसमें काफी बड़ी संख्या में सादी वर्दी में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था.


मायावती ने आज यहाँ जारी एक बयान में कहा कि वर्तमान में खासकर 500 व 1,000 रुपयों की नोटबन्दी के मामाले में केन्द्र की भाजपा सरकार व खासकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं इनके मंत्रीगण ’’जनविरोधी व दमनकारी सरकार’’ की तरह व्यवहार कर रहे हैं. वह लोग देश की करोड़ों आमजनता, महिला और बुजुर्गों तक की दिन-प्रतिदिन की समस्याओं को समझ कर भी अन्जान बन रहे हैं व सब कुछ ठीक-ठाक होने का रोज़ दावा करके अपनी असंवेदनशीलता का परिचय दे रहे हैं.


इस प्रकार, केन्द्र सरकार के मंत्रीगण व अधिकारी लोगों की परेशानियों के बारे में बोल कुछ रहे हैं और ज़मीनी हकीकत में हो कुछ और अनर्थ हो रहा है. ऐसे में पिछले लगभग 15 दिनों से लोगों में त्राहि-त्राहि मची है. इसलिये लोगों को नोटबंदी के कारण अनेक प्रकार की ज़बर्दस्त परेशानियों को समझकर इन्हें ज़रूर दूर करने के मामले में गंभीर होना चाहिये. वास्तव में सरकारी रवैये के कारण आमजनता को अपनी मेहनत की कमाई का पैसा भी बैंको से नहीं मिल पा रहा है जो पूरी तरह से एक जनविरोधी व दमनकारी कदम है.


इसके अलावा, केन्द्र में सरकार बनने के ढाई वर्षों के आधे कार्यकाल के पूरा होने के बाद अब उत्तर प्रदेश विधानसभा आम चुनाव के मद्देनज़र प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा आवासहीनों को कुछ मकान बनाने की योजना शुरु करने की याद आयी है, जबकि सरकार बनने के तुरन्त बाद ही यह सरकार उन बड़े-बड़े पूंजीपतियों व धन्नासेठों का हित साधने में लग गयी थी, जिनके धनबल के सहारे इन्होंने चुनाव में अपने पक्ष में एक वातावरण तैयार किया था. इतना ही नहीं बल्कि बड़े-बड़े पूंजीपतियों व धन्नासेठों का हित साधने का काम अब भी लगातार जारी है. इसके साथ ही रेलवे की कुछ स्थानीय स्तर की योजनाओं यह पूरी तरह से एक चुनावी हथकण्डा है. उन्होंने आमजनता से सावधान रहने को कहा है.


इसके साथ ही कानपुर के पास आज सुबह हुयी भीषण व अति-दर्दनाक रेल दुर्घटना में 100 से अधिक लोगों के मारे जाने पर मायावती ने गहरा दुःख व्यक्त किया और मृतकजनों के परिवार वालों को उचित अनुग्रह राशि व घायलों के समुचित इलाज व सहायता करने की माँग की, किन्तु प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा आगरा में रैली करने के बाद बग़ल में ही कानपुर देहात के दुर्घटना स्थल पर नहीं जाना की आलोचना करते हुये इसे जनहित की अनदेखी व अवहेलना बताया.


इसी प्रकार उत्तर प्रदेश सपा सरकार के मुखिया द्वारा भी घटना स्थल का दौरा नहीं करने पर तीखी आलोचना की और कहा कि उनको भी वहाँ जरूर जाकर बचाव व राहत कार्यों में तेजी सुनिश्चित करना चाहिये था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया.


इसके साथ-साथ उन्होंने इस हादसे की ‘‘उच्च स्तरीय व समयबद्ध जाँच’’ भी कराये जाने और इसके जो भी मुख्य दोषी हैं उनके विरूद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई करने की माँग की ताकि ऐसी अति-दुःखद व पीड़ादायक घटना की आगे पुनरावृति ना हो सके.

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