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यूपी के 22 करोड़ लोगों से उदासीन रही मोदी सरकार

 Sabahat Vijeta |  2016-05-27 15:52:21.0

mayavatiलखनऊ. बसपा सुप्रीमो और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने अपने दो वर्षों के कार्यकाल के दौरान उत्तर प्रदेश की लगभग 22 करोड़ जनता के प्रति जिस प्रकार से घोर उदासीन रवैया अपनाया है, उनकी उपेक्षा व उनके साथ वादा खि़लाफी की है, उसी का ही परिणाम है कि कल 26 मई को सहारनपुर में हुई उनकी विकास ’’पर्व रैली’’ रैली में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पड़ोसी राज्य हरियाणा व उत्तराखण्ड आदि से भी वहाँ भीड़ जुटाने का पूरा-पूरा प्रयास किया गया, फिर भी मोदी सरकार के दूसरे वर्षगांठ की रैली मथुरा में हुई पहली वर्षगाँठ की रैली की तरह ही फीकी ही रही.


सुश्री मायावती ने आज यहाँ जारी एक बयान में कहा कि सन् 2014 में लोकसभा आमचुनाव में उत्तर प्रदेश की जनता नरेन्द्र मोदी की बड़ी-बड़ी बातों व उनके लुभावने बहकावों में आ गई और उसने भाजपा को उसकी उम्मीद से कहीं ज़्यादा सीटों से जिताकर केन्द्र में उसकी पूर्ण बहुमत वाली पहली सरकार बनवा दी, परन्तु अब नरेन्द्र मोदी सरकार के दो वर्ष पूरा हो जाने के बावजूद भी उत्तर प्रदेश की जनता को उनकी ज़रूरत की कोई बुनियादी सुविधायें थोड़ी भी नहीं मिल पाई हैं.


इतना ही नहीं बल्कि उनसे किये गये कोई भी वादे भी पूरे होते हुये कहीं नज़र नहीं आ रहे हैं. आधे से ज़्यादा प्रदेश में सूखे के भीषण संकट के समय में भी उनकी सहायता तो दूर उनका हाल-चाल जानने की ज़रूरत भी नरेन्द्र मोदी सरकार के किसी भी मंत्री ने महसूस नहीं की. न्यायालय की फटकार के बावजूद भी प्रधानमंत्री व उनकी सरकार के मंत्रीगण केवल मीडिया में बयानबाज़ी ही करते रहे.


साथ ही, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कल का भाषण भी वास्तव में विरोधी पार्टियों को कोसने का वही पुराना अलाप था और विकास के मामले में भी काफी घिसा-पिटा सा था. इस सम्बन्ध में हकीकत तो यह है कि अपने सरकार के दो वर्ष की विफलता व जनता से किये गये वायदों को भी नहीं निभा पाने से लोगों में जो व्यापक आक्रोश है उस पर से ध्यान हटाने के लिये ही नरेन्द्र मोदी सरकार की दूसरी वर्षगांठ को सरकारी खर्च पर बड़े ताम-झाम से मनाया जा रहा है.


परन्तु वास्तव में देश की जनता उनसे किये गये विकास व ’अच्छे दिन’ लाने के वायदों का लाभ उसे सही तौर पर मिलता हुआ महसूस करना चाहती है, जो कि नरेन्द्र मोदी की सरकार के दावे के बावजूद उत्तर प्रदेश के साथ-साथ भाजपा शासित राज्यों में भी अमल होता हुआ देखने को नहीं मिल पा रहा है. इससे बड़ी सरकार की विफलता और क्या हो सकती है?


और जहाँ तक सरकारी डाक्टरों की रिटायरमेन्ट की उम्र 65 वर्ष करने की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की घोषणा का मामला है तो यह केवल सस्ती लोकप्रियता प्राप्त करने का प्रयास है, क्योंकि इस प्रकार की घोषणा को लागू करने हेतु केवल एक सरकारी आदेश ही जारी करना काफी होता है. वास्तव में देश की जनता की ज्वलन्त समस्याओं, जैसे महंगाई व बढ़ती बेरोजगारी पर रोक के साथ-साथ बिजली, सड़क, पानी आदि की बुनियादी सुविधाओं को उपलब्ध करना ही असली मुद्दा है, जिसके प्रति प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ज्यादातर विफल होती हुई साफ दिख रही है और आमजनता में इसी कारण ज़्यादा नाराज़गी है.

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