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जानिए क्‍या है मार्डन निकाहनामा, पत्नी को भी होगा तलाक देने का हक

 Girish Tiwari |  2016-09-10 03:51:08.0

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तहलका न्‍यूज ब्‍यूरो
लखनऊ:
सुप्रीम कोर्ट मे ट्रिपल तलाक पर बहस और इस पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के रुख के बीच लखनऊ में आॅल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने तलाक पर रोक लगाने के लिए निकाहनामा का एक प्रगतिशील मॉडल पेश किया है। इस सनद-ए- निकाह में तलाक का अधिकार महिलाओं को दिया गया है। साथ ही पति द्वारा तीन बार तलाक कहकर रिश्‍ता तोड़ने को गैर इस्‍लामिक बताया गया है। बोर्ड ने पत्नी को तलाक का हक देने का प्रस्ताव किया है।


मौलाना यासूब अब्बास ने मॉडर्न निकाहनामा वरिष्ठ शिया धर्मगुरु मौलाना डॉ. कल्बे सादिक को सौंपा है। कल्बे सादिक ने इसे मंजूरी देते हुए बोर्ड के अन्य सदस्यों से बातचीत कर लागू कराने का भरोसा दिया है।


डॉ. कल्बे सादिक ने कहा कि तीन तलाक का मसला बहुत बड़ा है। मौलाना ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में अकसरियत सुन्नी भाइयों की है। तीन तलाक का मामला भी सुन्नी समुदाय से जुड़ा है जबकि शिया समुदाय में तीन बार क्या, अगर तीन लाख बार भी तलाक-तलाक कहा जाए तब भी तलाक नहीं होगा। लड़की की मर्जी के बिना तलाक हो ही नहीं सकता। उन्‍होंने 3 तलाक कहकर रिश्ता तोड़ने को गैर इस्लामिक बताया।


इन दो स्थितियों में पत्‍नी को तलाक का हक
पहली:
अगर पति बार-बार गायब होता है और जीने के लिए जरूरी सुविधाएं नहीं देता है। ऐसा चार साल तक चले तो पत्‍नी तलाक दे सकती है।
दूसरी: अगर पति ताकत का उपयोग कर पत्‍नी को शारीरिक नुकसान पहुंचाता है, उसे अपाहिज करने का खतरा पैदा करता है, अपने दोस्‍तों के साथ संबंध बनाने के लिए कहता है, तो दोनों स्थितियों में पत्‍नी अपने पति को तलाक दे सकती है।

साथ ही अगर निकाह खत्‍म हो है तो पत्‍नी को मेहर पर पूरा हक होगा। पति को पत्‍नी का सभी वस्‍तुएं लौटाना होगा।

क्या है मॉडर्न निकाहनामा
- पति-पत्नी को बराबरी का हक
- महिलाओं को तलाक का अधिकार
- तीन बार बोलकर तलाक की प्रथा खत्‍म हो
- पुरुष के अकेले के चाहने से तलाक नहीं दिया जा सकेगा
- भारतीय संविधान के दायरे में है
- शियों के सर्वोच्च धर्मगुरु आयतुल्ला सिस्तानी ने दी मंजूरी
- महिलाओं को भी नौकरी या रोजगार का हक
- निकाह के बाद दहेज की मांग करने पर पाबंदी
- जिंदगी की जरूरतों को दो साल तक पूरा न करने पर तलाक का अधिकार

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