Breaking News
  • Breaking News Will Appear Here

मिशन2017: बसपा कई सीटों पर बदल सकती है विधान सभा प्रभारी

 Tahlka News |  2016-04-13 16:33:23.0

BSP-1454226201



विश्व प्रकाश श्रीवास्तव

जौनपुर, 13 अप्रैल.  2017 में होने वाले विधान-सभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दलों में उठा-पटक बनी हुई है| इसी बीच मिली खबरों के अनुसार बसपा हाई कमान जिले में कई सीटों पर अपना विधान सभा प्रभारी बदल सकता है क्योंकि पार्टी को जिताऊ उम्मीदवार की जरूरत है। पार्टी इस बार भी सोशल इंजीनियरिंग के तहत आगामी विधान सभा चुनाव में प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारने की रणनीति बना रही है ताकि अधिक से अधिक सीटों पर कब्जा किया जा सकें।  गौरतलब है कि पार्टी ने आगामी विधान सभा चुनाव से दो साल पहले ऐसे प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारी है कि वह अपने-अपने इलाकों में पार्टी का प्रचार प्रसार करें। समीक्षा के दौरान ऐसे प्रत्याशियों का टिकट फंस सकता है जिनकी पकड़ समाज में अच्छी नहीं है। उनके स्थान पर दूसरे प्रत्याशी की घोषणा तय मानी जा रही है। राजनीतिक सूत्रों की मानें तो जफराबाद विधान सभा सीट पर एक बार फिर बसपा सुप्रीमों पूर्व मंत्री जगदीश नारायण राय पर दाव लगा सकती है क्योंकि वह पार्टी के झंझावत के समय बसपा सुप्रीमों के साथ काफी निष्ठा के साथ लगे रहे। ऐसे में उनके नाम पर एक बार फिर मोहर लग सकती है क्योंकि समाज में उनकी अच्छी खासी पकड़ है और तीन बार विधायक व कैबिनेट मंत्री रह चुके है और पूर्वांचल में पूर्व विधान सभा अध्यक्ष सुखदेव राजभार के साथ पार्टी मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते चले आ रहे है। ऐसे में किसी नये चेहरे पर भरोसा होना कम ही दिखाई दे रहा है। सूत्रों की मानें तो इसी तरह केराकत सुरक्षित विधान सभा सीट से डा.लाल बहादुर सिद्धार्थ भी चुनाव मैदान में उतर सकते है क्योंकि वह भी बसपा सुप्रीमों के संपर्क में है और लगातार पार्टी की मजबूती के लिए कार्य कर रहे है। ऐसे में उनके नाम पर भी मोहर लगने की संभावना जताई जा रही है। इसी प्रकार चर्चा यह भी है कि मड़ियाहूं विधान सभा सीट से माफिया डान मुन्ना बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह भी हाथी पर सवार होकर बसपा के टिकट पर चुनाव मैदान में उतर सकती है। इसके अलावा कुछ और सीटों पर भी फेरबदल होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। सदर विधान सभा सीट की बात की जाय तो यहां भी प्रभारी बदले जा सकते है क्योंकि समीक्षा के दौरान ऐसा आया है कि उनकी समाज में पकड़ ढिली होने के साथ-साथ निष्क्रिय दिखाई दे रहे है। ऐसे में किसी दूसरे प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतारा जा सकता है। वैसे भी बसपा से कब किसका टिकट तय हो जाय और किसका कट जाय कोई नहीं बता सकता। हालांकि जो लोग विधान सभा प्रभारी बनाए जा चुके हैं वह इस प्रयास में है कि उनका किसी तरह से नाम कटने न पाए और हाथी पर सवार होकर विधान सभा की सफर तय कर लें।

Tags:    

  Similar Posts

Share it
Top