बुनकरों की मेहनत का पैसा अब नहीं खा पायेंगे बिचौलिये

 2016-09-26 14:17:23.0

bunkar


हलका न्यूज़ ब्यूरो


लखनऊ. वैश्विक आईसीटी कम्पनी एरिक्सन इंडिया ने डिजि़टल इम्पावरमेंट फाउंडेशन (डीईएफ) के साथ साझेदारी में अपनी नई कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) पहल ‘‘बैंक-ए-लूम’’ शुरू करने की आज राजधानी लखनऊ में घोषणा की. इसके तहत उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के सैदनपुर गाँव को चुना गया है. सैदनपुर में काम करने वाले बुनकरों को उनके पाँव पर खड़ा करने की यह शानदार पहल है.


डीईएफ के संस्थापक एवं निदेशक ओसामा मंजर ने बताया कि बुनकरों में डिज़िटल टेक्नालाजी में दक्ष बनाया जाएगा. उन्हें स्वास्थ्य, शिक्षा, कामर्स और मार्केटिंग के क्षेत्र में उनकी समझ को विकसित किया जाएगा. उन्होंने बताया कि बाराबंकी में 1500 बुनकर काम कर रहे हैं. सभी बुनकरों को कम्प्यूटर फ्रेंडली बनाया जाएगा. इनमें से 200 बुनकरों को कम्प्यूटर पर डिजाईनिंग और 200 को बाज़ार की तकनीक में दक्ष किया जाएगा. यह बुनकर कम्प्यूटर सीखने के बाद इंटरनेट चलाना सीखेंगे और इंटरनेट के ज़रिये यह जान सकेंगे कि वह अपना तैयार किया हुआ माल किस बाज़ार में भेजें ताकि उन्हें इसका लाभ मिल सके.


उन्होंने बताया कि बाराबंकी के सभी बुनकर समुदाय के लिए बांक-ए-लूम एक माध्यम है, जो हथकरघा बुनकरों के दयनीय सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाएगा और उन्हें इंटरनेट, डिजि़टल डिज़ाइन तथा ब्रॉडबैंक के इस्तेमाल के जरिए आत्म-निर्भर बनाएगा. बांक-ए-लूम महज एक छोटा सा उपाय भर है, जो यह दर्शाता है कि डिजि़टल हस्तक्षेप किस तरह से पारंपरिक बुनाई कौशल आधारित क्लस्टर को सशक्त बना सकता है. सैदनपुर में शुरू की गई यह पहल भारत के सभी 470 हथकरघा क्लस्टरों के लिये सबक हो सकती है.


उन्होंने बताया कि इस योजना के शत प्रतिशत सफल होने की गारंटी है क्योंकि हमने 2009 में यह योजना चंदेरी में शुरू की थी. चंदेरी के बुनकरों के साथ छह साल तक काम कर लेने के बाद हमने तय किया कि देश के 10 स्थानों पर बुनकरों को लाभ पहुंचाया जाये. बाराबंकी में बुनकरों का काम नज़र आने लगे तो वाराणसी में यह प्रयोग शुरू करेंगे. इस प्रयोग को अपनाने वाले बुनकरों के जीवन स्तर में सुधार आएगा क्योंकि अपनी मेहनत का पूरा पैसा उनके हाथ में आएगा. अब तक बुनकरों की मेहनत का पैसा बिचौलिए खा जाते हैं.


चंदेरी, बाराबंकी और वाराणसी के अलावा बरपली और नुआपटनो (उड़ीसा), त्रिची (दक्षिण भारत), कांचीपुरम (तमिलनाडू),नारायण पेट (तेलंगाना) कोटा (राजस्थान) और पैठानी (महाराष्ट्र) के बुनकरों को ई-कामर्स, डिज़िटल डिजाइन, ई-लर्निंग और सोशल मीडिया में दक्ष बनाया जाएगा. इतने स्थानों पर बुनकरों को लाभ मिलने के बाद धीरे-धीरे पूरे देश में इसे लागू किया जायेगा.

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