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प्रोन्नति में आरक्षण ख़त्म करने के लिए अमित शाह को दिया ज्ञापन

 Tahlka News |  2016-11-06 13:38:31.0

तहलका न्यूज ब्यूरो

shailendra-dubey-765x510लखनऊ. प्रोन्नति में आरक्षण का विरोध कर रही सर्वजन हिताय संरक्षण समिति ,उप्र ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को ज्ञापन देकर केन्द्र सरकार द्वारा पदोन्नति में आरक्षण देने हेतु संविधान संशोधन बिल पारित कराने की चल रही कोशिश का विरोध किया है और माँग की कि केन्द्र सरकार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करे और संविधान संशोधन बिल पूरी तरह निरस्त किया जाए।
सर्वजन हिताय संरक्षण समिति ,उप्र के अध्यक्ष शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि अमित शाह को कल सहारनपुर में ज्ञापन दिया गया । ज्ञापन में कहा गया है कि हम आपके माध्यम से केन्द्र सरकार को यह सूचित करना चाहते हैं कि यदि वोट की राजनीति के चलते समाज के 78% लोगों के साथ अन्याय करने की कोशिश की गयी तो प्रदेश के 18 लाख कर्मचारी- अधिकारी और 06 लाख शिक्षक, उनके परिवारजन और मित्रगण उप्र के आगामी विधान सभा चुनाव में वोट की राजनीति का वोट से ही करारा जवाब देंगे । समिति ने कहा कि वोट की राजनीति के चलते 17 दिसंबर 2012 को राज्यसभा से 117वां संविधान संशोधन विधेयक पारित कराया गया । लोकसभा से इस विधेयक को पारित कराने की कोशिश की गयी किन्तु कुछ सांसदों के विरोध के कारण कामयाबी नहीं मिली।

ज्ञापन में कहा गया है कि उल्लेखनीय है कि मा सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को निष्प्रभावी करने हेतु ही 117वां संविधान संशोधन विधेयक लाया गया जिससे एम् नागराज मामले में सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ द्वारा तय की गयी बाध्यकारी शर्तों को समाप्त किया जा सके । सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पदोन्नति में आरक्षण देने के पहले क्वांटिफ़िएबल डाटा देकर यह प्रमाणित करना होगा कि जिसकी पदोन्नति कर रहे हैं वह अभी भी सचमुच पिछड़ा है, उसकी जाति का सेवाओं में समुचित प्रतिनिधित्व नहीं है और ऐसी पदोन्नति देने से प्रशासनिक दक्षता प्रभावित नहीं होगी । 117वें संविधान संशोधन विधेयक में लिखा है कि अनुसूचित जाति/जनजाति के कार्मिक आजीवन पिछड़े माने जायेंगे, उन पर प्रशासनिक दक्षता की संविधान की धारा लागू नहीं होगी तथा राज्य में मिलने वाले आरक्षण प्रतिशत के बराबर पदोन्नति में आरक्षण परिणामी ज्येष्ठता सहित जारी रहेगा । परिणामी ज्येष्ठता का तात्पर्य है कि पदोन्नति में आरक्षण के चलते अन्य कार्मिकों के पहले पदोन्नति पाने के परिणामस्वरूप एस सी/एस टी कार्मिकों को सीनियारिटी भी मिलेगी और सीनियारिटी के फलस्वरूप सामान्य पदों पर भी उनकी पदोन्नति पहले की जायेगी ।यह संशोधन जून 1995 से प्रभावी होगा जिसका तात्पर्य यह है कि 21 वर्ष पूर्व से कार्मिकों की ज्येष्ठता बदली जायेगी और भारी पैमाने पर सामान्य व् अन्य पिछड़ी जाति के कार्मिक रिवर्ट किये जायेंगे।
समिति ने अमित शाह को बताया कि पदोन्नति में आरक्षण देने हेतु सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को निष्प्रभावी करने हेतु इसके पहले भी चार बार संविधान संशोधन(77वां,81 वां,82 वां और 85वां संशोधन) किये जा चुके हैं । अब पुनः 117वां संविधान संशोधन किया जा रहा है जिससे सामान्य और अन्य पिछड़े वर्ग के कार्मिकों में भारी रोष है । सवाल यह भी है कि वोट की राजनीति के लिए और कितने संविधान संशोधन किये जायेंगे और ज्येष्ठता व् श्रेष्ठता को कब तक अपमानित किया जायेगा।
शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि ज्ञापन के माध्यम से हमारा आपसे अनुरोध है कि सरकारी सेवाओं में पदोन्नति में आरक्षण को असंवैधानिक ठहराए जाने के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का सम्मान करते हुए आप मा प्रधानमंत्री को तत्काल पत्र लिखकर 117वें संविधान संशोधन विधेयक को पूरी तरह निरस्त करने की अपील करें और इस मामले में वक्तव्य दे कर अपना विरोध सार्वजनिक करने की कृपा करें ।

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