एग्जिट पोल के ज़रिये इस बड़े अखबार ने यह रिस्क आखिर क्यों लिया

 2017-02-13 18:39:11.0

एग्जिट पोल के ज़रिये इस बड़े अखबार ने यह रिस्क आखिर क्यों लिया


तहलका न्यूज़ ब्यूरो 

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के पहले चरण के मतदान के बाद भारत में सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले अख़बार का दावा करने वाले दैनिक जागरण ने जिस तरह से एग्जिट पोल प्रकाशित किया उस पर पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी ने कड़ा एतराज़ जताया है. अखबार ने लिखा कि भारतीय जनता पार्टी 2014 के लोकसभा चुनाव वाली परफार्मेंस को ही रिपीट करने जा रही है. यह लिखकर अखबार ने एक बड़ा राजनीतिक तूफ़ान उठाने का जोखिम तो लिया ही साथ ही खुद के लिए क़ानून का उल्लंघन करने वाला माहौल भी तैयार कर लिया.

अखबार मालिकान अच्छी तरह से यह बात जानते हैं कि इस तरह का एग्जिट पोल प्रकाशित कर वह तमाम कानूनी पचड़ों में फंस सकते हैं लेकिन यह भी सही है कि इस तरह के बयान से मोदी के पक्ष में हवा बनने में मदद भी मिल सकती है क्योंकि इस अखबार को 45 लाख लोग पढ़ते हैं. इस तरह का एग्जिट पोल छापना कानूनी रूप से अवैध है लेकिन बाकी बचे छह चरणों के चुनाव में इस एग्जिट पोल का नरेन्द्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में असर पड़ेगा और यह असर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती के खिलाफ जाएगा.

दैनिक जागरण अखबार को यूँ भी नरेन्द्र मोदी का समर्थक अखबार माना जाता है. अखबार ने यह क़दम शेष चरणों के चुनाव को प्रभावित करने के मकसद से ही उठाया है. भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश में अपने परम्परागत वोटर जाट और बनियों के बूते ही लड़ रही है. इस अखबार ने इसी तरह का एग्जिट पोल बिहार चुनाव के दौर में भी प्रकाशित किया था. माना यह जा रहा है कि अखबार ने इस एग्जिट पोल के ज़रिये भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर अपना अहसान लाद दिया है. दरअसल पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बारे में शुरू से ही यह माना जा रहा था कि वहां का चुनाव भाजपा के खिलाफ जाएगा क्योंकि वहां के वोटर अखिलेश यादव और मायावती के साथ भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं लेकिन इस एग्जिट पोल ने बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हुए चुनाव में भाजपा 2014 के लोकसभा चुनाव जैसा रिज़ल्ट ही रिपीट करने जा रही है.

दैनिक जागरण द्वारा इस तरह का एग्जिट पोल प्रकाशित करना वास्तव में बहुत सोची समझी चाल लगती है. यह सिर्फ चंद करोड़ रुपयों के लिए प्रकाशित समाचार नहीं लगता. यह रुपयों से ज्यादा अहम सोच के साथ किया गया काम लगता है. यह अखबार पिछले तीन साल से मोदी के एजेंडे के साथ-साथ चल रहा है. यूपी की सत्ताधारी समाजवादी पार्टी भी यह बात बहुत अच्छे से जानती है. सैफई में हुए सैफई महोत्सव जैसे आयोजनों पर खर्च हुए 750 करोड़ रुपयों पर भी दैनिक जागरण ने ही सवाल उठाया था. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस खबर पर एक प्रेस कांफ्रेंस में सवाल उठाया था. उन्होंने कहा था कि समाजवादी पार्टी से राज्यसभा सांसद बने महेंद्र मोहन गुप्ता को राज्यसभा में रिपीट नहीं करने की वजह से यह अखबार उनसे दुश्मनी मानता है. अखिलेश यादव ने कहा था कि यह आरोप बेबुनियाद है कि सैफई महोत्सव पर 750 करोड़ रुपये खर्च हुए. उन्होंने कहा था कि गाँव के आयोजन पर इतनी बड़ी राशि खर्च हो ही नहीं सकती.

दैनिक जागरण द्वारा प्रकाशित इस एग्जिट पोल को पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने सिर्फ पावर गेम माना है. अखबार मालिक उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में अपने प्रभुत्व को जमाने के लिए इस तरह का काम कर रहे हैं. इसी वजह से अखबार का पूरा ध्यान इस बात पर लगा है कि नरेन्द्र मोदी 2019 तक किस तरह से सर्वाइव करें. यूपी चुनाव के ज़रिये नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के प्रभाव को बढ़ाना उसका मकसद है. इसी साल के आखीर में राष्ट्रपति चुनाव भी होना है. अखबार को यह अहसास भी कराना है कि अगला राष्ट्रपति नियुक्त कराने के लिए उसने भी उत्तर प्रदेश में उसके वोट बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई. अखबार बहुत अच्छी तरह से जानता है कि भाजपा की इस तरह से मदद करने के एवज़ में चुनाव आयोग उसके खिलाफ आपराधिक मुक़दमा भी चलवा सकता है.

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