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सरकारी खाली पड़ी जमीन पर खेती करने का अधिकार देना चाहिए : मायावती

 Vikas Tiwari |  2016-10-20 10:06:03.0

मायावती

तहलका न्यूज़ ब्यूरो 

लखनऊ.  बसपा सुप्रीमो मायावती ने ऊना की बर्बर घटना के बाद ख़ासकर गुजरात राज्य के दलितों में आत्म-सम्मान व स्वाभिमान के साथ जीवन व्यतीत करने के लिए संघर्ष करने की जो भावना पैदा हुई है उसे गुजरात की भाजपा सरकार अनेकों प्रकार के हथकण्डे अपनाकर कुचलना चाहती है, जिसकी बी.एस.पी. कड़े शब्दों में निन्दा करती है।
मायावती ने आज यहाँ जारी एक बयान में कहा कि दलित समाज के लोग सरकारी दया व सहानुभूति के भूखे नहीं हैं। वे लोग अपने संवैधानिक व कानूनी हक को ज़मीनी सच्चाई में बदलता हुआ देखना चाहते है। और इस क्रम में खासकर गुजरात के ऊना की दर्दनाक काण्ड से वहाँ के दलित समाज के लोग अपने आत्म-सम्मान व स्वाभिमान के जीवन के लिए संघर्षरत हैं, जिसके अन्र्तगत ही उनकी पहली माँग सरकारी खाली पड़ी जमीन पर खेती करने का अधिकार देने की हैं।

अपनी इसी माँग को लेकर गुजरात के जूनागढ़ ज़िले के कलेक्ट्रेट के सामने पिछले कई दिनों से वहाँ शांतिपूर्ण धरना पर बैठे दलित समाज के लोगों में से तीन ने अपनी माँग नहीं माने जाने के विरोध में कल ज़हर पीकर अपनी जान देने की कोशिश की, जिसमें से एक प्रभात परमार की मौत हो गयी।  परमार को सन् 1991 को उसके गाँव सानधा से बेदखल कर दिया गया, क्योंकि उसने वहाँ खेती करके अपना जीवन यापन करने की कोशिश की थी।
मायावती ने कहा कि सरकार की खाली पड़ी बंजर जमीनों आदि को भूमिहीनों खासकर दलित व आदिवासी समाज के भूमिहीनों में बाँटना गुजरात सरकार की प्राथमिकताओं में होना चाहिये, क्योंकि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह व प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, दोनों ही गुजरात राज्य से आते हैं तथा दलितों के प्रति उभरे अपने नये-नये प्रेम को उजागर करने का कोई मौका नहीं चूकना चाहते हैं। वे दोनों ही लोग परमपूज्य बाबा साहब डा. भीमराव अम्बेडकर को भी याद रखने की कोशिश करते हैं।
इसलिये उन्हें दिखावटी व बनावटी दलित प्रेम त्यागकर खासकर भाजपा- शासित राज्यों गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, झारखण्ड, हरियाणा व राजस्थान आदि में एक विशेष अभियान चलाकर दलित समाज के लोगों में खाली व बंजर पड़ी सरकारी ज़मीनों को आवंटित करने का काम शुरू करना चाहिये, ऐसी बी.एस.पी. की माँग है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में अपने शासनकाल के दौरान बी.एस.पी. ने ऐसा करके भी दिखाया है।
इस प्रकार एक तरफ तो अपने लिये ’’सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति’’ के लिये जबर्दस्त तौर पर संघर्ष करता हुआ देश में काफी बड़ी आबादी रखने वाला दलित समाज है, तो दूसरी तरफ सर्वसमाज के करोड़ों लोगों की एक ऐसी फौज है जो बेरोजगारी, महँगाई की मार झेलने को मजबूर है, जिससे भाजपा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के बहु-प्रचरित ’‘विकास’‘ के दावों की भी पोल खुल रही है।
और इस बारे में जैसाकि ताज़ा अध्ययन में बताया गया कि देश में पिछले चार वर्षों से हर दिन 550 नौंकरियाँ समाप्त होती चली जा रही हैं तथा किसान, छोटे खुदरा वेण्डर, दैनिक मजदूरी करने वाले लोग व भवन निर्माण में लगे मजदूरों के सामने जीवन यापन का गम्भीर संकट खड़ा होता जा रहा हैं।
ऐसी परिस्थिति में सवाल उठना स्वाभाविक है कि देश में भाजपा, कांग्रेस व सपा के बहु-प्रचरित ’’विकास’’ का क्या लाभ मिल रहा है? और इस मामले में ख़ासकर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के बहु-प्रचरित ’‘विकास’‘ के दावों की भी पोल खुलती है।
सुश्री मायावती जी ने कहा कि उपरोक्त अध्ययनों से बी.एस.पी. का यह आरोप सही साबित होता है कि भाजपा व केन्द्र में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सरकार बड़े-बड़े पूँजीपतियों व धन्नासेठों की समर्थक सरकार है तथा ग़रीबों, किसानों, मज़दूरों, बेरोजगार युवकों आदि की विरोधी सरकार है।
इस भाजपा सरकार की गलत नीतियों व गलत कार्यशैली एवं संकीर्ण सोच के कारण ग़रीब और ग़रीब व मुट्ठी भर धन्नासेठ लोग और ज़्यादा धनवान होते चले जा रहे हैं। ऐसी नीति देशहित में कतई नहीं बल्कि देश के लिये घातक साबित हो रही है, जबकि ’’विकास’’ की हकीकत का सामना करने के बजाय इसका केवल ढिंढोरा पीटते रहने से इस समस्या का हल नहीं होगा।

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