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मायावती ने दलितों के लिए गुजरात सरकार से की ये मांग

 Vikas Tiwari |  2016-09-26 10:06:16.0

मायावती

तहलका न्यूज़ ब्यूरो 

लखनऊ. बसपा सुप्रीमो मायावती जी ने गुजरात के बांसकाँठा जि़ले के अमीरगढ़ गाँव में मरे हुये गाय को हटाने का काम करने से इन्कार करने पर दलित परिवार के लोगों पर जानलेवा हमला करने व परिवार की गर्भवती महिला को भी उत्पीड़न का शिकार बनाने की घटना की तीव्र निन्दा करते हुये कहा कि ख़ासकर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह व स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गृह राज्य के भाजपा-शासित प्रदेश गुजरात में गोहत्या व गोरक्षा के नाम पर एवं इससे जुड़ी जातिवादी घटनाओं का सिलसिला आखिर कभी थमेगा भी कि नहीं?  मायावती ने गुजरात सरकार से माँग की है कि वह दलितों द्वारा वहाँ जारी उनके आत्म-सम्मान व स्वाभिमान के संघर्ष का सम्मान करें और उनको सुरक्षा प्रदान करने की संवैधानिक जि़म्मेदारी को निभाने के साथ-साथ दलित परिवार पर हुये जुल्म-ज्यादतियों व उत्पीड़न के मुख्य दोषियों के खि़लाफ सख़्त क़ानूनी कार्रवाई करें ताकि ऐसी घटनाओं को आगे होने से रोका जा सके।

मायावती ने आज यहाँ जारी एक बयान में कहा कि गुजरात के बांसकाँठा जि़ले के अर्न्तगत मोटा करजा गाँव में शनिवार को घटित यह घटना अत्यन्त ही दुःखद व निन्दनीय है। इस घटना में दलित परिवार के लोंगों के घर में घुसकर उनके साथ मारपीट की गयी, जातिवादी अपशब्द कहे गये एवं परिवार की गर्भवती महिला तक को भी पेट में मारा गया। पीडि़त परिवार ने उस गाँव में मृत एक गाय को हटाने का काम करने से इन्कार कर दिया था, जिस कारण उस गाँव के एक दबंग परिवार के लोंगों ने दलित समाज के उस परिवार पर जुल्म- ज्यादती व अत्याचार किया। पीडि़त परिवार के घायल लोगों को इलाज के लिये अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस सम्बन्ध में पीडि़त दलित परिवार ने गाँव के छह लोगों के खि़लाफ नामित एफ.आई.आर दर्ज करायी है।
अपने बयान में मायावती  ने कहा कि ’गोरक्षा’ के नाम पर बर्बर दलित काण्ड के परिणामस्वरूप ख़ासकर गुजरात के दलित समाज के लोग आत्म-सम्मान व स्वाभिमान के साथ जीवन व्यतीत करने के लिये जारी अपने संघर्ष के क्रम में विशेषकर मृत गायों आदि को उठाने का काम बन्द कर रखा है। उनका इस प्रकार का संघर्ष व बलिदान निश्चय ही आगे चलकर उनका व उनके परिवार के भविष्य को संवारने में सहायक होगा, ऐसी प्रबल संभावना है।
बी.एस.पी. प्रमुख मायावती ने कहा कि वैसे तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व भाजपा अध्यक्ष अमित शाह दलितों के हित व कल्याण का ढिंढोरा पीटते रहते हैं और परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर का भी अनुयायी होने का दावा करते रहते हैं, परन्तु इस हक़ीक़त को वे स्वीकारने से हिचकते हैं कि केन्द्र में उनकी भाजपा सरकार बनने के बाद ख़ासकर गुजरात, हरियाणा, मध्य प्रदेश आदि भाजपा-शासित राज्यों में दलितों पर बर्बर व्यवहार व विभिन्न प्रकार की जातिवादी जुल्म-ज्यादतियों व उत्पीड़नों की घटना काफी ज़्यादा बढ़़ी है, जिसका देश भर के लोगों ने संज्ञान लेकर इसके विरुद्ध काफी प्रतिरोध भी जताया है।
दलित उत्पीड़नों से जुड़ी घटनाओं के सम्बन्ध में समुचित व सन्तोषजनक कानूनी कार्रवाई नहीं करना भी यह दर्शाता है कि भाजपा का नया-नया उभरा ’दलित प्रेम’ वास्तव में मात्र दिखावा व छलावा है तथा इसका राजनैतिक व चुनावी उद्देश्य है। यही कारण है कि बर्बर दलित ऊना काण्ड के साथ-साथ हैदराबाद के दलित स्कालर श्री रोहित वेमुला को आत्महत्या के लिये मजबूर करने के मामले में ख़ासकर उसकी माँ को केन्द्र सरकार की तरफ से आज तक भी इन्साफ नहीं मिल पाया है।

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