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मायावती ने प्रधानमंत्री की कुशीनगर रैली को बताया फ्लॉप

 Vikas Tiwari |  2016-11-27 13:48:31.0

Mayawati

तहलका न्यूज़ ब्यूरो

लखनऊ. बसपा सुप्रीमो मायावती ने उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र के कुशीनगर ज़िले के एक छोटे से मैदान में भाजपा के टिकटार्थियों व भाड़े की जुटायी गयी रैली को फ्लॉप बताते हुये कहा कि परिवर्तन रैली में आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्वांचल के विकास के लिये अपने भाषणों में जो कुछ कहा है उसका उन्होंने अपने ढाई वर्षों के शासकाल में एक-चौथाई हिस्सा कार्य भी पूरा नहीं किया है अर्थात वायदे तो बहुत कुछ किये परन्तु उन्हें निभाया थोड़ा भी नहीं है, जिस कारण ख़ासकर प्रदेश के लोगों में काफी ज्यादा निराशा है तथा अब उनकी बातें भरोसेमन्द कतई भी नहीं रही हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश में जल्दी ही होने वाले विधानसभा आमचुनाव में, अब बीजेपी के बहुत पीछे ही जाने की पूरी-पूरी सम्भावना है।


मायावती ने आज अपने एक बयान में कहा कि इस संदर्भ में इन्होंने ख़ासकर किसानों को खाद, फसल बीमा व गन्ना किसानों के बकाये आदि के सम्बंध में जो लम्बी-चौड़ी बातें की हैं वे अधिकांशतः खोखली व हवा-हवाई बातें हैं।
इसके अलावा, जहाँ तक पूर्वांचल क्षेत्र के विकास का मामला है तो इस बारे में केवल कोरे आश्वासनों व हवाई बातों से काम चलने वाला नहीं है, बल्कि इसके लिये ठोस जमीनी व बुनियादी काम करके दिखाने होंगे, जो उस पिछड़े हुये क्षेत्र के लिये थोड़ा भी अब तक नहीं किया गया है, हालाँकि लोगों ने वोट उन्हें पूरा दिया था।
साथ ही, पूर्वांचल को अलग से राज्य बनाने की ज़रुरत है तथा इसके सम्पूर्ण व समग्र विकास के लिये ’’विशेष आर्थिक पैकेज’’ देने की जरुरत पड़ेगी तभी यहाँ के लोग खुश व खुशहाल हो सकेंगे। पूर्वांचल के विकास की चिन्ता केवल हवा-हवाई नहीं होनी चाहिये बल्कि इस सम्बंध में बी.एस.पी. सरकार द्वारा विधानसभा से पारित प्रस्ताव पर केन्द्र की सरकार को अमल करके दिखाना चाहिये।
इसके साथ ही, जहाँ तक 500 व 1000 रुपये की नोटबन्दी का मामला है तो इस बारे में जग-जाहिर है कि केन्द्र सरकार के इस फैसले के फलस्वरुप पिछले 19 दिनों से पूरे देश में आर्थिक इमरजेन्सी व भारत बन्द जैसा माहौल होने के बावजूद प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अपनी पीठ आप थपथपाते रहना उनकी ग़रीब व जनविरोधी मानसिकता का द्योतक।
वास्तव में विरोधी पार्टियों द्वारा 28 नवम्बर का ’भारत बन्द’ का आह्वान मात्र सांकेतिक महत्त्व का व देश की लगभग 90 प्रतिशत जनता की पीड़ा को अपनी पीड़ा ही समझकर, इनके इस फैसले का विरोध करने का ही है क्योंकि भारत को तो पहले से ही पूरी तरह श्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने नोटबन्दी कराकर बन्द कर रखा है, जिसके व्यापक प्रभाव से वे अपने आपको अनभिज्ञ रखे हुये है।
मायावती ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारत की करोड़ों ग़रीब आमजनता को विकसित देश के सुविधा-सम्पन्न शिक्षित लोगों की तरह व्यवहार करने को मजबूर कर रहे हैं, जबकि सरकार की जिम्मेंदारी के तौर पर देश के सवा सौ करोड़ लोगों को बुनियादी सुविधायें देने में पूरी तरह से नाकाम रहे हैं। देश में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। लोग रोटी-रोजी व रोजगार के लिये परेशान हैं। महंगाई चरम-सीमा पर है, फिर भी ऐसी हालत में उन्हें हाई टेक्नालॉजी व नेट बैंकिंग आदि में निपुण होने को मजबूर किया जा रहा है जबकि भ्रष्टाचार व कालेधन वाली सभी बड़े मगरमच्छों के प्रति केन्द की भाजपा सरकार काफी मेहरबान नजर आती है, यह चिन्ता की बात है। कुल मिलाकर भ्रष्टाचार व कालेधन के मामले में भी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी व उनकी सरकार की सोच व मानसिकता अमीरों व धनवानों जैसी ही लगती है।
इसके साथ ही, रैली की शुरूवात में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खासकर गौतम बुद्ध व सन्त कबीर का भी नाम लिया है, जबकि अकेले इनके नाम लेने से नहीं बल्कि उनके बताये हुये रास्तों पर चलकर अमल करने से ही, जनता की भलाई हो सकती है और इतना ही नहीं बल्कि पूर्वान्चल की भाषा में एक दो शब्द बोलने से ही पूर्वान्चल के लोग, इनसे प्रभावित होने वाले नहीं हैं, बल्कि इन लोगों को केन्द्र सरकार से अपने क्षेत्र का केवल विकास ही चाहिये, तब ये लोग इनसे प्रभावित होंगे, जो असम्भव ही होता नजर आ रहा है।

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