Breaking News
  • Breaking News Will Appear Here

कश्मीर सरकार आर.एस.एस. का एजेण्डा लोगों पर थोपना चाहती है: मायावती

 Vikas Tiwari |  2016-11-02 09:13:05.0

mayawati-1
तहलका न्यूज़ ब्यूरो


लखनऊ. बसपा सुप्रीमो मायावती ने जम्मू-कश्मीर राज्य के कश्मीर घाटी क्षेत्र में लगातार 114 दिन से सामान्य जनजीवन अस्थिर होने व वहाँ लगातार कर्फ्यू जारी रहने के साथ-साथ अब ताज़ा घटनाक्रमों में पिछले कुछ समय में दो दर्जन से अधिक स्कूलों के जलायें जाने की घटना पर गहरा दुःख व आक्रोश व्यक्त करते हुये कहा कि वहाँ की पी.डी.पी.-भाजपा गठबंधन सरकार राज्य के लोगों के जनहित व जनकल्याण के मामले में पूरी तरह से फेल साबित हुई है.


रहस्मय ढंग से ख़ासकर स्कूलों के जलाये जाने की लगातार होने वाली घटनाओं पर माननीय जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लेने व राज्य सरकार को इस सम्बन्ध में तत्काल प्रभावी कार्रवाई करने के आदेश का स्वागत करते हुये मायावती ने बुधवार को जारी एक बयान में कहा कि कुल मिलाकर यही लगता है कि जम्मू-कश्मीर मेें सरकार नाम की कोई व्यवस्था नहीं रह गयी है, जिससे विशेषकर घाटी मेें रहने वाली बहुसंख्यक आबादी का जन-जीवन पहले से काफी ज्यादा मुश्किल हो गया है.


मायावती ने कहा कि कश्मीर मेें हालात के ख़राब होने के लिये सम्बद्ध लोग एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं, परन्तु वास्तविकता यही लगती है कि घाटी के लोगों का राज्य की सरकार पर से विश्वास लगभग समाप्त हो गया है. इसकी ख़ास वजह यह है कि लोगों को ऐसा प्रतीत होता है कि पी.डी.पी.-भाजपा गठबंधन सरकार के माध्यम से भाजपा अपना आर.एस.एस. का संकीर्ण व विभाजनकारी एजेण्डा लोगों पर थोपना चाहती है.


कुल मिलाकर सीमावर्ती राज्य जम्मू-कश्मीर की सीमा पर गोलीबारी व कश्मीर घाटी में लगातार जारी हड़ताल के कारण आम जनजीवन काफी ज्यादा प्रभावित है. स्कूल, कालेज व बाज़ार आदि सभी बन्द पड़े हैं तथा जिनके पास थोड़ी भी हैसियत है उनके बच्चे घाटी से बाहर काफी बड़ी संख्या मे जाने लगे हैं. बाकी ग़रीब लोगों के सामने जीवन की विकट समस्या व भूखमरी जैसी स्थिति उत्पन्न हो गयी है, किन्तु राज्य सरकार अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों से विमुक्त नज़र आती है, जो कि सरासर ग़लत है.



वास्तव में आज कश्मीर मेें जो हालात पैदा हो गये हैं उसकी कल्पना करना बहुत मुश्किल है, फिर भी ख़ासकर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी सरकार का रवैया वहाँ की आमजनता के प्रति काफी उदासीन व असंवेदनशील बना हुआ है.


इन सभी कारणों से स्पष्ट तौर पर लगता है कि भारत-पाकिस्तान के बीच आपसी सम्बन्ध में तनाव की स्थिति में बेचारी कश्मीर की आमजनता बेवजह पिस रही है. केन्द्र की सरकार को चाहिये कि वे अपने नागरिकों की भरपूर चिन्ता करे और वहाँ हालात को सामान्य बनाये.

Tags:    

  Similar Posts

Share it
Top