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अखिलेश के फैसले पर भड़कीं मायावती,कहा-गैरकानूनी है यह फैसला

 Girish Tiwari |  2016-12-22 15:20:49.0

mayawati

तहलका न्यूज़ ब्यूरो

लखनऊ. बीएसपी की राष्ट्रीय मायावती ने प्रदेश की सपा सरकार पर इनके पूरे शासनकाल के दौरान् अन्य पिछड़ा वर्ग (ओ.बी.सी.) की एक विशेष जाति यादव समाज को छोड़कर समस्त अन्य पिछड़ी जातियों की घोर उपेक्षा व अनदेखी करते रहने का आरोप लगाते हुये कहा कि अब प्रदेश में विधानसभा आमचुनाव से ठीक पहले उन्हें उसी प्रकार से गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है जिस प्रकार सन् 2005 में उन्हें गुमराह करने का असफल प्रयास पिछली सपा सरकार द्वारा किया गया था।


मायावती ने आज यहाँ जारी एक बयान में कहा कि सपा मंत्रिमण्डल की चुनाव से पहले सम्भवतः आखिरी बैठक में अन्य पिछड़ा वर्ग की 17 जातियों को ओ.बी.सी. वर्ग से निकालकर अनुसूचित जाति (एस.सी.) वर्ग की सूची में शामिल करने का निर्णय लिया गया है वह केवल और केवल इन वर्गों के लोगों की आँखों में धूल झोंकने का प्रयास है। साथ ही यह केवल इनका खोखला व हवाई चुनावी हथकण्डा है और इसके सिवाय कुछ भी नहीं है। इनके इस प्रकार के छलावे से ओ.बी.सी. लोग वैसे ही गुमराह होने वाले नहीं हैं जैसाकि वे सन 2007 में विधानसभा के आमचुनाव में नहीं होकर बी.एस.पी. के साथ ही रहे थे।


मायावती ने कहा कि सपा सरकार के इस फैसले से इन वर्गों का फायदा नहीं बल्कि नुकसान ही होने वाला है क्योंकि तब वे अपने ओ.बी.सी. वर्ग के तहत् मिलने वाली आरक्षण की सुविधा से भी वांचित हो जायेंगे, जैसा कि सन् 2005 के अन्त में तब मुलायम सिंह यादव की सरकार के फलस्वरूप हुआ था।


कानूनी तौर से यह फैसला एकतरफा है व ग़लत है क्योंकि अनुसूचित जाति की सूची में किसी भी जाति को शामिल करने या हटाने का अधिकार किसी राज्य की विधानसभा या राज्य सरकार के पास नहीं। इसी कारण मुलायम सिंह यादव ने अक्टूबर 2005 में जब ओ.बी.सी. की 17 जातियों को एस.सी. की सूची में शामिल करने का फैसला लिया था तो तब वे जातियाँ फिर न एस.सी. में शामिल हो पायीं थी और न ही उनका नाम ओ.बी.सी. सूची में रह पाया था, जिस कारण वे आरक्षण की सुविधा से वांचित हो गयी थी और फिर बाद में बीएसपी की सरकार बनने पर इन 17 जातियों के साथ न्याय करते हुये इनकी आरक्षण की सुविधा को बहाल करने के साथ-साथ इन जातियों को एस.सी. का कोटा बढाने की शर्त के साथ एस.सी. की सूची में शामिल करने का प्रस्ताव केन्द्र सरकार के पास भेजा गया था, जो कि अभी भी लम्बित पड़ा हुआ है। इस मामले में प्रदेश की सपा सरकार ने अपने शासनकाल के दौरान् एक बार भी केन्द्र सरकार पर दबाव नहीं बनाया और इसे नजरअन्दाज किये रही, परन्तु अब चुनाव के समय समाज को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है, यह दुःखद व निन्दनीय भी है।

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