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मजीठिया की स्टेटस रिपोर्ट ने खोली बड़े अखबारों की असलियत

 Sabahat Vijeta |  2016-07-02 17:00:03.0

hemant-cm-3तहलका न्यूज़ ब्यूरो


लखनऊ. उत्तर प्रदेश सरकार ने दो साल से ज्यादा इंतज़ार कराने के बाद अंतत: मजीठिया वेज बोर्ड के सम्बन्ध में अपनी स्टेटस रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में में दाखिल कर दी. सरकार ने यह रिपोर्ट प्रदेश की श्रमायुक्त सुश्री शालिनी प्रसाद के ज़रिये कोर्ट में दाखिल की है. सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई इस रिपोर्ट ने बड़े अखबारों के रवैये की कलई खोल दी है. आईएफडब्ल्यूजे के महासचिव परमानन्द पाण्डेय ने इस बात को शर्मनाक बताया है कि श्रम विभाग ने ठीक से पड़ताल किये बगैर ही अखबार द्वारा दी गई जानकारी को स्टेटस रिपोर्ट का हिस्सा बना लिया. जबकि अखबार द्वारा मजीठिया के सम्बन्ध में दी गई रिपोर्ट सच से कोसों दूर है.


यूपी के श्रमजीवी पत्रकारों को मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ दिलाने के लिए आईएफडब्ल्यूजे के वरिष्ठ उपाध्यक्ष हेमंत तिवारी के नेतृत्व में पिछले दिनों पत्रकारों का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, मुख्य सचिव आलोक रंजन, श्रम मंत्री शाहिद मंज़ूर और प्रमुख सचिव श्रम अनीता भटनागर जैन से मिला था. इन सभी को अलग-अलग ज्ञापन सौंपते हुए प्रतिनिधिमंडल ने मजीठिया वेज बोर्ड के सम्बन्ध में स्टेटस रिपोर्ट जारी करने का अनुरोध किया था. इस प्रतिनिधिमंडल से मुलाक़ात के बाद मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव ने श्रम विभाग से तत्काल स्टेटस रिपोर्ट तैयार करने का आदेश दिया था.


स्टेटस रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिकारियों ने राज्य के 75 अखबारों के रिकार्ड की पड़ताल की तो पता चला कि सिर्फ 13 अखबारों ने ही मजीठिया वेज बोर्ड को अपने संस्थान में मान्यता दी है. रिपोर्ट में बताया गया है कि अमर उजाला समूह ने मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को आंशिक रूप से माना है. उसने पत्रकारों को बकाया एरियर का भुगतान नहीं किया है. जबकि एग्रीमेंट में यह स्पष्ट है कि 48 किस्तों में एरियर का भुगतान 5 फीसदी बोनस के साथ भुगतान करना होगा.


इस रिपोर्ट में बताया गया है कि दैनिक जागरण समूह ने मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को अपने संस्थान में लागू नहीं किया है. इस समूह ने अपने कर्मचारियों के सामने इस तरह के ऑप्शन रखे हैं जिससे वह अपने संस्थान में मजीठिया को लागू करने से बच सकें.


स्टेटस रिपोर्ट में इस बात पर आश्चर्य जताया गया है कि खुद को नंबर वन अखबार कहने वाले दैनिक जागरण समूह ने भी मजीठिया की सिफारिशें लागू नहीं की हैं. श्रम विभाग की जांच में पता चला है कि दैनिक जागरण समूह अपने कर्मचारियों को आयोग द्वारा बताई गई सैलरी का पचास फीसदी ही भुगतान करता है.
लखनऊ, मेरठ, मुरादाबाद, बरेली, वाराणसी, इलाहाबाद और कानपुर से प्रकाशित होने वाले हिन्दुस्तान और हिन्दुस्तान टाइम्स अखबार का दावा है कि वह अपने कर्मचारियों को मजीठिया की सिफारिशों से ज्यादा भुगतान कर रहा है.

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