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बापू के नाम का गलत इस्तेमाल होने पर दुख होता है : तारा गांधी

 Tahlka News |  2016-04-24 09:27:53.0

taragandhi
अंकुश वत्स
नई दिल्ली, 24 अप्रैल. गांधी जी की पौत्री तारा गांधी भट्टाचार्जी कहती हैं कि जब महात्मा के नाम का गलत इस्तेमाल होता है तो उन्हें बहुत दुख होता है। तारा गांधी को पर्यावरण, संस्कृति और शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए हाल ही में फ्रांस के एक शीर्ष पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

भट्टाचार्जी ने आईएएनएस के साथ साक्षात्कार में कहा, "गांधी जी राष्ट्रपिता हैं। राजनीतिक पार्टियां और देश के नागरिक उनका इस्तेमाल करेंगे। मैं नहीं जानती हूं कि इसके लिए क्या कहा जाए। वह सत्य, करुणा और प्रेम के पर्याय हैं। अगर आप गांधी जी के बारे में बातें करते हैं तो इन चीजों के बारे में भी बातें करते हैं। लेकिन किसी को तब दुख होता है, जब उनके नाम का गलत इस्तेमाल होता है।"


दशकों तक भारतीय रानीतिक इतिहास के घटनाक्रमों की गवाह रहीं भट्टाचार्जी का मानना है कि इन वर्षो के दौरान राजनीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इस सप्ताह उन्हें फ्रांस के राजदूत ने उन्हें 'ऑर्डर ऑफ आर्ट्स एंड लेटर्स' से सम्मानित किया।

भट्टाचार्जी ने कहा, "राजनीति हमेशा एक जैसी रही है। मनुष्य हमेशा सत्ता के भूखे रहे हैं -सत्ता के लिए लड़ते रहे हैं और इसके लिए हत्या भी करते रहे हैं। लेकिन कुछ लोगों के भीतर कुछ अच्छा करने की इच्छा थी। उदाहरण के तौर पर जब गांधी और उनके समर्थक लड़ रहे थे तो वे राजनीति से नहीं आए थे, लेकिन ब्रिटिश शासन का विरोध कर रहे थे।"

भट्टाचार्जी विगत 28 वर्षो से कस्तूरबा गांधी ट्रस्ट के लिए काम कर रही हैं। गांधी जी ने अपनी धर्मपत्नी कस्तूरबा गांधी की याद में इस ट्रस्ट की स्थापना की थी। यह ट्रस्ट ग्रामीण भारत में जरूरतमंद महिलाओं और बच्चों की सेवा करता है।

पर्यावरण कार्यकर्ता के रूप में तारा गांधी भट्टाचार्जी विगत 18 वर्षो से गंगा बचाओ आन्दोलन से जुड़ी हुई हैं। उनका मानना है कि नदी को साफ रखने की जिम्मेदारी आम लोगों की है।

भट्टाचार्जी ने कहा, "अगर हमलोग जल की पूजा करते हैं तो हमें इसके साथ अच्छा बर्ताव भी करना चाहिए। नदी में मूर्तियों का विसर्जन जैसी चीजें बंद होनी चाहिए। अगर लोग निर्णय करते हैं तो भारत स्वच्छ हो जाएगा। प्रजातंत्र में लोग भी जिम्मेदार होते हैं और नदियों की रखवाली उनका कर्तव्य है।"

उन्होंने स्वच्छ भारत अभियान को सफल बनाने के लिए लोगों की भागीदारी का आह्वान किया।

उन्होंने कहा, "जब तक लोगों की सहभागिता नहीं होगी तब तक यह अभियान सफल नहीं हो सकता है। अगर मैं अपनी गलियों को गंदा करती हूं तो नेता हमारी मदद के लिए नहीं आने वाले हैं।"

भट्टाचार्जी ने संदेह जताया कि दिल्ली में सरकार के सम-विषम फार्मूले से यहां के प्रदूषण स्तर में कमी लाने में मदद मिल सकती है।(आईएएनएस)|

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