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अखिलेश हटाते हैं और मुलायम लाते हैं....ये हैं Mr. जेतली

 Tahlka News |  2016-05-11 04:50:00.0

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फिर से मेट्रो के करीब जाने में लगे हैं मधुकर जेतली!


तहलका न्यूज़ ब्यूरो
लखनऊ. बीते अक्टूबर में लखनऊ मेट्रो के एक मामले में मेट्रो मैन ई. श्रीधरन की नाराजगी के शिकार हो कर जिस मधुकर जेतली ने वाह्य सहायतित परियोजना और एनआरआई के सलाहकार की कुर्सी गवाई थी वह अब एक बार फिर मेट्रो के करीब आने की जुगत में लगते दिखाई दे रहे हैं. सोमवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जब मेट्रो की 3 डी डिजाईन को देखने गए थे तब मधुकर जेतली भी उनके साथ थे.


यूपी में अखिलेश सरकार बनने के बाद वाह्य सहायतित परियोजना व एनआरआई के सलाहकार के बतौर मधुकर जेतली को मंत्री का दर्जा मिला था. मुलायम सिंह से मधुकर जेतली की करीबी सर्वविदित है. हलाकि जेतली की जितनी करीबी मुलायम सिंह से है वैसी ही कमोबेश बसपा सुप्रीमो मायावती से भी बताई जाती है.आम तौर पर किसी राजनेता के घर न जाने वाली मायावती एक से ज्यादा बार मधुकर जेतली के घर भी जा चुकी हैं.


अक्टूबर में मधुकर जेतली द्वारा कथित रूप से एक कंपनी को लखनऊ मेट्रो में टेंडर के लिए पैरवी करना श्रीधरन को नागवार गुजरा था और उनकी शिकायत पर अखिलेश यादव ने जेतली को बर्खास्त कर दिया था.


बताया जा रहा था कि जेटली लखनऊ मेट्रो के लिए 1100 करोड़ रुपये के रोलिंग स्टॉक व सिग्नलिंग का काम अपनी चहेती कंपनी को दिलाना चाहते थे.


इसमें सफल नहीं हो पाए तो जिस कंपनी को एलएमआरसी ने इसका ठेका दिया, जेटली उसके खिलाफ दुष्प्रचार में जुट गए. ठेके को लेकर हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका भी लगाई गई थी. यही नहीं, इसकी शिकायत केंद्रीय सतर्कता आयोग से भी की गई.


तब आयोग ने इसकी जांच कराने के लिए पत्र लिखा. इस वाकये से श्रीधरन बेहद नाराज थे और उन्होंने मुख्यमंत्री से इसकी शिकायत की थी. इसके बाद जेतली कुछ दिन हाशिये पर रहे. इस बीच मनोनीत कोटे के विधायको की सूची पर राज्यपाल राम नाईक के सख्त रवैये के बाद विवादित बिल्डर संजय सेठ का नाम हटाना सरकार की मजबूरी बन गयी थी. बताया जाता है कि सपा सुप्रीमो के नजदीक होने के कारण संजय सेठ की जगह मधुकर जेतली का नाम आ गया और मधुकर विधान परिषद् के सदस्य भी बन गए.


अब मधुकर जेतली फिर से मेट्रो परियोजना से जुड़ने की जुगत में लग गए हैं. सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह तो जेतली पर मेहरबान हैं मगर अपने ड्रीम परियोजनाओं में कोई विवाद न चाहने वाले सीएम अखिलेश यादव के सामने जेतली की पैरवी कितनी कारगर होगी यह देखना बाकी है.

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