Breaking News
  • Breaking News Will Appear Here

सीएम बताएं लोकायुक्त के प्रतिवेदनों पर क्या किया ?

 Sabahat Vijeta |  2016-12-23 08:56:02.0

akhilesh


राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पुनः पत्र लिखकर लोकायुक्त एवं उप-लोकायुक्त के विशेष प्रतिवेदनों पर राज्य सरकार द्वारा कृत अथवा प्रस्तावित कार्यवाही के साथ अपना और मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन का स्पष्टीकरण-ज्ञापन शीघ्र उपलब्ध कराने को कहा है. राज्यपाल ने पत्र में कहा है कि उत्तर प्रदेश लोकायुक्त तथा उप-लोकायुक्त अधिनियम की धारा-12(7) के अंतर्गत अब तक प्रेषित 53 विशेष प्रतिवेदनों, जिसमें वर्तमान लोकायुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्रा द्वारा प्रस्तुत एक विशेष प्रतिवेदन भी सम्मिलित है, पर अभी तक केवल 2 विशेष प्रतिवेदनों पर राज्य सरकार द्वारा स्पष्टीकरण-ज्ञापन उपलब्ध कराये गये है तथा शेष 51 के संबंध में न तो स्पष्टीकरण-ज्ञापन प्राप्त हुआ है और न ही राज्य विधान मण्डल के समक्ष प्रस्तुत किये जाने की सूचना प्राप्त हुई है. राज्यपाल द्वारा प्रेषित पत्र के साथ संलग्न सूची में लोकायुक्त एवं उप-लोकायुक्त से प्राप्त विशेष प्रतिवेदनों में 9 पूर्व मंत्रियों, 1 विधायक, 3 अध्यक्ष (नगर पालिका/नगर पंचायत) तथा 40 अधिकारियों का उल्लेख है.


लोकायुक्त के विशेष प्रतिवेदन में पूववर्ती सरकार के मंत्रियों में (1) अवधपाल सिंह यादव, (2) रामवीर उपाध्याय, (3) बादशाह सिंह, (4) रामअचल राजभर, (5) राजेश त्रिपाठी, (6) अयोध्या प्रसाद पाल, (7) रतन लाल अहिरवार, (8) नसीमुद्दीन सिद्दीकी, (9) स्वामी प्रसाद मौर्या तथा विधायक में जौनपुर के मडियाहूँ विधान सभा सीट से तत्कालीन विधायक कृष्ण कुमार सचार का नाम सम्मिलित है.


राज्यपाल ने इससे पूर्व 12 अगस्त, 2016 को मुख्यमंत्री को पत्र प्रेषित कर लोकायुक्त एवं उप-लोकायुक्त के विशेष प्रतिवेदनों पर राज्य सरकार द्वारा कृत अथवा प्रस्तावित कार्यवाही के साथ अपना और मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन का स्पष्टीकरण-ज्ञापन उपलब्ध कराने की अपेक्षा की थी.


श्री नाईक ने अपने पत्र में कहा है कि राज्य विधान मण्डल द्वारा उत्तर प्रदेश लोकायुक्त तथा उप-लोकायुक्त अधिनियम 1975 के अंतर्गत लोकायुक्त तथा उप-लोकायुक्त संगठन मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों तथा लोक-सेवकों द्वारा अपने पद व शक्ति के दुरूपयोग कर भ्रष्टाचार करने, अवैध सम्पत्ति अर्जित करने, लोक सम्पत्ति को निजी हित में उपयोग लाने की शिकायतों की जांच करने तथा कुशासन समाप्त कर लोक जीवन में शुचिता व सुशासन को सबल बनाने के उद्देश्य से गठित किया गया है. उन्होंने कहा है कि मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों तथा लोक-सेवकों के विरूद्ध भ्रष्टाचार से संबंधित प्राप्त शिकायतों की जांच के उपरान्त लोकायुक्त संस्था द्वारा राज्य सरकार को प्रेषित जांच रिपोर्ट पर लम्बे समय तक कार्यवाही न किये जाने से तथा लोकायुक्त द्वारा राज्यपाल को प्रेषित विशेष प्रतिवेदन पर भी कार्यवाही न किये जाने से उत्तर प्रदेश लोकायुक्त तथा उप-लोकायुक्त अधिनियम 1975 एवं इसके अंतर्गत गठित लोकायुक्त संगठन का उद्देश्य ही विफल हो जाता है. प्रदेश के नागरिकों को सुशासन का लाभ तब मिलेगा जब भ्रष्टाचारियों के विरोध में कार्यवाही होगी.

Tags:    

  Similar Posts

Share it
Top