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कहीं ऐसा न हो कि दिल बलूचिस्तान हो जाए

 Sabahat Vijeta |  2016-09-28 15:02:33.0

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मोतीमहल लॉन में चल रहा है चौदहवां राष्ट्रीय पुस्तक मेला


सेमिनार, लोकार्पण, प्रतियोगिताएं और पुस्तकों की खरीदारी के साथ हो डाक्टर की राय भी


लखनऊ. मोतीमहल लॉन में चल रहे चौदहवें पुस्तक मेले में जहाँ एक से बढ़कर एक साहित्यिक किताबें हाथों हाथ ली जा रही हैं वहीं बच्चों को आकर्षित करने वाली किताबों की रेंज भी बहुत बड़ी है. बच्चों के लिये इस पुस्तक मेले में ऐसे बहुत से खिलौने भी मिल रहे हैं जो आमतौर पर बाज़ार में आसानी से नज़र नहीं आते हैं.


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दि फेडरेशन ऑफ़ पब्लिशर्स एण्ड बुकसेलर्स एसोसिएशन्स इन इण्डिया, नई दिल्ली के सहयोग से हो रहे के.टी.फाउण्डेशन के इस पुस्तक मेले का आज छठा दिन था. सुबह 11 बजे से रात नौ बजे तक चलने वाले इस मेले में पुस्तक प्रेमियों को हर बार की तरह इस बार भी 10 फीसदी की छूट मिल रही है.


पुस्तक मेले में अच्छे अंग्रेज़ी नावेल बहुत कम दाम में मिल रहे हैं. फिजिक्स की शानदार किताबें भी कुछ स्टाल पर मौजूद हैं. इस पुस्तक मेले में शिक्षकों के मतलब की भी बहुत सी किताबें मौजूद हैं. बच्चों के लिये स्कालर्स हब, तिरुमाला साफ्टवेयर्स, एजूकेशन हब पब्लिकेशन, राजा पाकेट बुक्स, पुस्तक महल, सुभाष पुस्तक भण्डार, डायमण्ड पाकेट बुक्स, वाणी प्रकाशन, पद्म बुक, पुस्तक महल, खालसा, बुक्स एण्ड बुक्स, यूबीएस पब्लिशर्स सहित बहुत से स्टालों पर है. बच्चों के लिए 10 रुपये से लेकर 50 रुपये कीमत की बहुत सी उपयोगी और ज्ञानवर्धक पुस्तकें मेले में मौजूद हैं.


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पुस्तक मेले में आज मीडिया फोटोग्राफर्स क्लब ने फोटोग्राफी पर सेमीनार का आयोजन किया. प्रदेश के सूचना निदेशक सुरेश ओझा इस मौके पर मुख्य अतिथि थे. श्री ओझा ने कहा कि तस्वीर खबर की पुष्टि करती है. लखनऊ में कई प्रशासनिक पदों पर रहने के दौरान उन्होंने कई घटनाओं का ज़िक्र किया जिसमें फोटो जर्नलिस्ट की तस्वीरों का प्रशासन ने संज्ञान लिया.


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वरिष्ठ पत्रकार संजय शर्मा ने कहा कि तस्वीर अखबार की आत्मा होती है. उन्होंने कहा कि खबर के लिए 400-500 शब्द लिखने पड़ते हैं जबकि तस्वीर बगैर बोले ही सारी बात कह देती है.

व्यंग्यकार सर्वेश अस्थाना ने कहा कि तस्वीरें पाजिटिव भी होती हैं और निगेटिव भी होती हैं. छायाकारों को निगेटिव तस्वीरों से बचना चाहिये.


वरिष्ठ पत्रकार सुलतान शाकिर हाशमी ने कहा कि खबर का ग्राफ गिरता है तो तस्वीर उसे सहारा देती है. तस्वीर खबर की विश्वसनीयता का माध्यम भी होती है. उन्होंने कहा कि फोटोग्राफी पेशा नहीं जूनून का नाम है.


फोटोग्राफी में डाक्ट्रेट करने वाले डॉ. भूपेश लिटिल ने कहा कि कैमरा तस्वीर नहीं खींचता. तस्वीर तो फोटोग्राफर ही खींचता है. कैमरा तो सिर्फ उस पल को संजो लेता है. उन्होंने बताया कि लखनऊ के अलावा सिर्फ नागपुर में फोटोग्राफी में मास्टर डिग्री मिलती है.


मीडिया फोटोग्राफर्स क्लब के अध्यक्ष एस.एम.पारी के संचालन में हुए इस सेमिनार में नवल कान्त सिन्हा, आर.डी. शुक्ल, मुरलीधर आहूजा, दुर्गेश पाठक और डॉ. तूलिका साहू आदि ने भी संबोधित किया.


पुस्तक मेले में आज मंडी परिषद के निदेशक राज शेखर और डी.आई.जी. आर.के.एस.राठौर भी पहुंचे. लखनऊ के डीएम की ज़िम्मेदारी संभाल चुके राजशेखर और एसएसपी की ज़िम्मेदारी संभाल चुके आर.के.एस.राठौर लखनऊ की नब्ज़ को अच्छी तरह से पढ़ना जानते हैं. इन दोनों अधिकारियों ने आज पुस्तक मेले में पाठकों से संवाद स्थापित किया.


फोटोग्राफी पर हुए सेमीनार के बाद मुख्य सांस्कृतिक मंच पर आज डाक्टर से मिलिए कार्यक्रम में मधुमेह विशेषज्ञ प्रो.नरसिंह वर्मा ने मधुमेह के सम्बन्ध में विस्तार से जानकारी दी.


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आज यहाँ लेखिका डॉ. अमिता दुबे की पुस्तक ‘कहानीकार मुक्तिबोध एवं अनूठे सर्जक मुक्तिबोध’ का लोकार्पण भी हुआ. हिन्दी संस्थान के अध्यक्ष डॉ. उदय प्रताप सिंह, डॉ. शम्भू नाथ, सुधाकर अदीब और हिन्दी संस्थान के निदेशक ने इसका लोकार्पण किया.


अमिता दुबे की पुस्तक के बाद अलंकार रस्तोगी की पुस्तक ‘सभी विकल्प खुले हैं’ का लोकार्पण समारोह हुआ. रात 8 बजे से हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया. कवि सम्मेलन में पंकज प्रसून ने सुनाया :-


करो इतनी वफ़ा कि जिस्म हिन्दुस्तान हो जाये,


बनो तो बेवफ़ा इतना कि पकिस्तान हो जाये,


जो जलना हो जुदाई में जलो कश्मीर के माफ़िक,


कहीं ऐसा न हो कि दिल बलूचिस्तान हो जाए.


पुस्तक मेले के बाल-युवा मंच पर आज दोपहर बाल-युवा प्रतियोगिताएं- रि-मिक्स डांस, स्लोगन (विषय-दोस्ती) व हिन्दी-अंग्रेजी में रचनात्मक लेखन का आयोजन भी किया गया.

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