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एक ही दिन लखनऊ क्यों आये भागवत और ओवैसी

 Sabahat Vijeta |  2016-03-29 16:09:34.0

ovaisi-bhagvatतहलका न्यूज़ ब्यूरो


लखनऊ, 29 मार्च. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में असदुद्दीन ओवैसी और मोहन भागवत का एक ही दिन आना कुछ संशयों को जन्म दे गया है. आम शहरियों की बात तो जाने दी जाए खुद सरकार चलाने वाली समाजवादी पार्टी इस उलझन को सुलझाने में लगी है कि दो विपरीत ध्रुव एक ही दिन लखनऊ क्यों आये.


समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने कहा है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में चुनावों से पूर्व साजिशें होने की आंशका जताई थी, उसके लक्षण सामने दिखाई देने लगे हैं। गुजराती, मराठी आकर अपना जाल फैलाने लगे है। एक ही दिन राजधानी लखनऊ में आर.एस.एस. प्रमुख और ए.आई.एम.आई.एम. के अध्यक्ष का आगमन दाल में कुछ काला होने का संकेत देता है। आखिर इनके इरादे क्या हैं ? दोनों ही ध्रुवीकरण की राजनीति के खिलाड़ी है और उत्तर प्रदेश में उन्हें समाजवादी सरकार के रहते अपनी दाल गलने की कोई गुंजाइश नही दिखेगी।


हैदराबादी जनाब असदुद्दीन ओवैसी ने लखनऊ में आकर भड़काने का काम किया है। उधर संघ प्रमुख जिस विचारधारा के पोषक है वह समाज को बाँटने वाली है। जनाब ओवैसी ने मुख्यमंत्री जी और समाजवादी सरकार पर भी अनर्गल टिप्पणियाँ करके अपनी अज्ञानता प्रदर्शित की है। वे जान ले कि समाजवादी पार्टी ही उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिकता की खिलाफत में चट्टान सी खड़ी रही है और धर्मनिरपेक्षता का संबल रही है। यहाँ मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में समाजवादियों ने सांप्रदायिकता को हमेशा पराजित किया है।


उत्तर प्रदेश की जनता औवैसी और भागवत दोनों को पहचानती है। इनकी कथा का उद्देश्य प्रदेश का सियासी माहौल खराब करना है। समाजवादी सरकार ने प्रदेश में विकास और प्रगति का जो वातावरण बनाया है उससे विपक्ष को बेहद परेशानी है। जनता का ध्यान विकास से बाँटने के लिए ही हैदराबादी और नागपुरी सक्रिय हुए है। नागपुरी सतंरों की आड़ में साम्प्रदायिकता नहीं फैलाई जा सकती है।


भाजपा आर.एस.एस. और आॅल इन्डिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन जैसे संगठन सामाजिक विद्वेष को बढ़ाने के काम में लगेंगे तो कानून भी अपना काम करेगा। उत्तर प्रदेश में सद्भाव और सौहार्द की फिजां को बिगाड़ने वालों को जनता करारा जवाब देगी और समाजवादी सरकार कुत्सित इरादों को कभी पूरा नही होने देगी। राज्य में गंगा-जमुनी संस्कृति में विष घोलने वालों की कोई जगह नही। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की बेदाग छवि और उनकी कर्मठता के कारण प्रदेश के हर वर्ग में उनके प्रति भरोसा है और लोग निराधार आलोचनाओं के चक्कर में आने वाले नही है।

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