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जलवायु परिवर्तन से जल अभिगम्‍यता की स्थिति बदतर होने वाली: वॉटरएड

 Girish |  2017-03-21 10:19:42.0

जलवायु परिवर्तन से जल अभिगम्‍यता की स्थिति बदतर होने वाली: वॉटरएड




तहलका न्‍यूज ब्‍यूरो
नई दिल्‍ली: साफ जल की अभिगम्‍यता के अभाव में रहने वाली सर्वाधिक ग्रामीण जनसंख्‍या के आधार पर भारत विश्‍व में पहले स्‍थान पर है। वॉटरएड की नई रिपोर्ट वाइल्‍ड वॉटर बताती है कि जलवायु परिवर्तन से जल अभिगम्‍यता की स्थिति बदतर होने वाली है।

भारत में विश्‍व की जनसंख्‍या के 17 प्रतिशत लोग रहते हैं। यह विश्‍व की सर्वाधिक तेजी से विकसित होने वाली अर्थव्‍यवस्‍थाओं में से एक हैं। लेकिन भारत में साफ जल तक पहुंच के बिना रहने वाले सर्वाधिक ग्रामीण जनसंख्‍या 63.4 मिलियन निवासी है।

यह विश्‍व में जल की स्थिति पर वॉटरएड की 2017 की रिपोर्ट वाइल्‍ड वॉटर में बताया गया है। यह रिपोर्ट 22 मार्च को विश्‍व जल दिवस के अवसर को दर्शाने के लिए और भीषण मौसमी घटनाओं और जलवायु परिवर्तन का प्रभाव विश्‍व की निर्धनतम जनता पर पड़ने की चेतावनी देने के लिए जारी की गई है।

नॉट्रेडम ग्‍लोबल अडाप्‍टेशन इंडेक्‍स के अनुसार, भारत विश्‍व के उन शीर्ष 38 फीसदी देशों में शामिल है, जो जलवायु परिवर्तन के प्रति सर्वाधिक कमजोर और अनुकूलन करने के लिए सबसे कम तैयार है। देश की जनसंख्‍या का 67 फीसदी ग्रामीण इलाकों में रहता है और ग्रामीण जनसंख्‍या का 7 फीसदी अभी भी साफ पानी की पहुंच से दूर है। इस तरह भारत के ग्रामीण निर्धन भीषण मौसमी घटनाओं के प्रभावों और जलवायु परिवर्तन के प्रति अत्‍यंत कमजोर है।

वॉटरएड का वैश्विक जल अभिगम्‍यता को लेकर द्वितीय वार्षिक विश्‍लेषण वाइल्‍ड वॉटर विश्‍व भर के ग्रामीण इलाकों में पीने के साफ जल की अभिगम्‍यता की स्थिति का आकलन करता है। चेतावनी देता है कि जलवायु परिवर्तन के परिणाम स्‍वरूप होनेवाली अधिक भीषण मौसमी घटनाएं, जिनमें साइक्‍लोन, विनाशकारी बाढ़ और सूखा शामिल है। विश्‍व के निर्धनतम लोगों के लिए जल की अभिगम्‍यता को और कठिन बना सकता है।

आज विश्‍व भर मे 663 मिलियन लोग साफ पानी के बगैर रह रहे हैं और इनमें से बड़ा हिस्‍सा 522 मिलियन ग्रामीण इलाकों में रहते हैं। ये समुदाय पानी तक पहुंच हो लेकर अलग-अलग रहने, अपर्याप्‍त इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर और लगातार बनी रहने वाली फंड की कमी के कारण खास चुनौतियों का सामना करते हैं।

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