Breaking News
  • Breaking News Will Appear Here

मुज़फ्फरनगर का शामली और फुगाना अभी भी झुलस रहा है

 shabahat |  2017-01-20 17:24:17.0

मुज़फ्फरनगर का शामली और फुगाना अभी भी झुलस रहा है

तहलका न्यूज़ ब्यूरो

लखनऊ. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का बिगुल बजने के साथ ही संगीत सोम के फेसबुक वाल पर जिस तरह से वीडियो वार शुरू हुआ है उससे यह बात साफ़ हो गई है कि भारतीय जनता पार्टी मुज़फ्फरनगर दंगे को इतनी आसानी से लोगों को भूलने नहीं देना चाहती. इस दंगे को भुनाने की पूरी तैयारी की जा रही है. संगीत सोम को पहला वीडियो आने के बाद चुनाव आयोग से नोटिस मिला था लेकिन बावजूद इसके उनकी फेसबुक वाल पर दूसरा वीडियो नज़र आया.

भारतीय जनता पार्टी यह अच्छी तरह से जानती है कि सवा तीन साल पहले हुए मुज़फ्फरनगर दंगे को झेलने वालों के घाव अभी हरे हैं और अगर वोटों का ध्रुवीकरण कराया गया तो हिन्दू वोट भाजपा को फायदा पहुंचा सकते हैं. मुज़फ्फरनगर का कवाल गाँव दंगे में बुरी तरह से झुलसा था. इस गाँव के लोगों का कहना है कि हमारा गाँव दंगे में बुरी तरह से जला था मगर हमारे गाँव में तनाव न तब था न अब है. यहाँ के लोग कहते हैं कि हम दंगे को भूल चुके हैं. हमारे घरों में शादियाँ होती हैं तो सभी बराबर से शरीक होते हैं क्या हिन्दू और क्या मुसलमान. इसी तरह किसी की मौत हो जाती है तो सब मिलकर दुःख साझा करते हैं.

कवाल के एक नौजवान ने कहा कि दंगे तो नेता करवाते हैं. अब चुनाव आया है तो फिर भड़का रहे हैं. वोट के लिये हमें सब्जबाग दिखा रहे हैं. हम अपनी खुशहाली में जीना चाहते हैं.
हालांकि शामली और फुगाना के लोगों में अभी तक बहुत गुस्सा है. यहाँ के लोगों ने साफ़ कहा कि चुनाव में अपने वोट से बदला लेंगे. हमारे ज़ख्म तो अभी तक हरे हैं. संगीत सोम अपनी सफाई देते घूम रहे हैं. कहते हैं कि उनके खिलाफ कोई आरोप नहीं है. आज तक उनके खिलाफ चार्जशीट तक फ़ाइल नहीं हुई है. संगीत सोम का कहना है कि दंगा हुआ था तो मुलायम ने कहा था कि दंगा जाट और मुसलमानों के बीच हुआ था. वहीं शामली से कांग्रेस विधायक पंकज मालिक दंगे का इल्जाम बीजेपी पर मढ़ते हैं. उनका कहना है कि जनता सब जानती है.

उधर दंगे के बाद मुआवज़े पाने वाले सरकार के अहसानमंद नज़र आते हैं. दंगा पीड़ित कैम्प में रहने वालों को अगर दंगों का दर्द है तो मुआवज़े की खुशी भी उनके चेहरे पर स्पष्ट है. सरकार से मिले मुफ्त मकानों पर वह फ़िदा हैं. मुआवजा पाने वालों की खुशी के बीच चुनावी माहौल में अगर कोई और रंग पहुंचा तो हालात बदलते देर भी नहीं लगेगी.

Tags:    

  Similar Posts

Share it
Top