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वैज्ञानिकों ने जताई बड़े भूकंप की आशंका, बताया ये कारण

 Avinash |  2017-02-07 15:03:08.0

वैज्ञानिकों ने जताई बड़े भूकंप की आशंका, बताया ये कारण

तहलका न्यूज़ ब्यूरो
नई दिल्ली. उत्तराखंड की केदारनाथ घाटी में पिछले 24 घंटों से रुक-रुक कर भूकंप के झटके आ रहे हैं. इनमें सोमवार रात करीब साढ़े 10 बजे आया भूकंप का झटका काफी तबाही ला सकता था. इस भूकंप का केंद्र जमीन के काफी नीचे था. इसी एक वजह से भूकंप की वजह से होने वाली बड़ी तबाही टल सकी. गौरतलब है कि 1991 में उत्तरकाशी और 1999 में रुद्रप्रयाग में आए भूकंप ने भारी तबाही मचाई थी. इन दोनों का केंद्र सतह से बहुत नीचे नहीं था.

विशेषज्ञों के मुताबिक पूरी हिमालय बेल्ट भूकंप के लिहाज से काफी संवेदनशील मानी जाती है. उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग के भूकंप के पूर्व हिमालय क्षेत्र कईं बड़े भूकंप आए. देश में आये दिन कहीं न कहीं भूकंप के झटके लगते रहते हैं, जिसके बाद आशंका जताई जा रही है कि कोई बड़ा हादसा हो सकता है.

बता दें कि इंडियन प्लेट, यूरेशियन प्लेट के जितने नीचे धंसती जाएगी, हिमालयी क्षेत्र में भूकंप के झटके तेज होते जाएंगे. जिसके साथ ही भूगर्भ में भर रही ऊर्जा नए भूकंप जोन भी सक्रिय कर सकती है. इस स्थिति को देखते हुए वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान ने अहम कदम उठाया है. जिसके तहत हिमालयी क्षेत्रों में भूकंप की तरंगे मांपने के लिए 10 ब्रॉड बैंड सीइसमोग्राफ संयंत्र लगाये गए हैं.

गौरतलब है कि भारतीय व यूरेशियन प्लेट में चल रही टकराहट से हिमालयी पट्टी में बड़े पैमाने पर ऊर्जा भर रही है. नीचे ऊर्जा का दबाव बढ़ने पर हजारों सालों से हिमालयी क्षेत्र में सुप्तावस्था में पड़ी भूकंप पट्टियां सक्रिय हो गई हैं. जिसके बाद यह कभी भी ऊर्जा के बाहर निकलने का रास्ता बन सकती हैं.

1950 में असम के बाद रिक्टर स्केल पर 8 से अधिक तीव्रता वाला कोई बड़ा भूकंप नहीं आया है. विशेषज्ञों को आशंका है कि हिमालय में कभी भी 8 या उससे अधिक तीव्रता वाला भूकंप आ सकता है. ऐसा हुआ तो पूरे उत्तरभारत को भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है.

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