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राम मंदिर विवाद: 1500 वर्ग फुट जमीन, यहां गुजरने से डरते हैं देवता

 Abhishek Tripathi |  2017-03-22 04:13:06.0

राम मंदिर विवाद: 1500 वर्ग फुट जमीन, यहां गुजरने से डरते हैं देवता

तहलका न्‍यूज ब्‍यूरो
नई दिल्‍ली. सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद को कोर्ट से बाहर सुलझाने के लिए आदेश दिया है। इसके बाद ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड सहित कुछ प्रमुख मुस्लिम संगठनों ने देश की शीर्ष कोर्ट की मध्यस्थता में बातचीत के लिए सहमति जताई, लेकिन वे कोर्ट के बाहर इस मामले के समाधान को लेकर कुछ ज्यादा आशावान नहीं हैं।

बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी ने कहा है कि अगर चीफ जस्टिस मध्यस्थता करें, तो हम बातचीत के लिये तैयार हैं। हमें उन पर भरोसा है। अगर वह कोई टीम मनोनीत करते हैं तो भी हम इसके लिये तैयार हैं। लेकिन कोर्ट के बाहर कोई समझौता मुमकिन नहीं है। ऐसे में यदि सुप्रीम कोर्ट इस बारे में कोई आदेश पारित करता है तो हम उसे देखेंगे।

जस्टिस एस यू खान ने अपने फैसले की शुरुआत में कहा 'यहां 1500 वर्ग गज जमीन का एक टुकड़ा है जहां देवता भी गुजरने से डरते हैं। यह अनगिनत बारूदी सुरंगों, लैंड माइंस से भरा हुआ है। हमें इसे साफ करने की जरूरत है। कुछ भले लोगों ने हमें सलाह दी है कि कोशिश भी मत करो। हम भी नहीं चाहते हैं कि किसी मूर्ख की तरह जल्दबाजी करें और खुद को उड़ा लें। इसके बावजूद इसके हमें जोखिम तो लेना ही है। किसी ने कहा है कि जीवन में सबसे बड़ा जोखिम होता है कि मौका आने पर जोखिम ही न लिया जाए। एक बार देवताओं को भी इंसानों के आगे झुकने के लिए मजबूर किया गया था। ये एक ऐसा ही मौका है। हम सफल हुए हैं या नाकाम रह गए हैं? अपने केस में कोई जज नहीं हो सकता है। इस तरह ये रहा वो फैसला जिसका पूरा देश सांस रोके इंतजार कर रहा है।

वहीं, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना वली रहमानी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अच्छी टिप्पणी की है। अगर मसले का हल बातचीत से निकल जाए तो यह अच्छी बात है और यह सबके लिए खुशकिस्मती होगी। हम बातचीत के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि बातचीत का कोई लम्बा दौर नहीं होगा। दो-चार बैठकों के बाद 8 से 10 दिन में मामला साफ हो जाएगा।

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