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सैफुल्लाह ने इंटरनेट से सिखा था बम बनाना

 Vikas tiwari |  2017-03-08 13:14:34.0

सैफुल्लाह ने इंटरनेट से सिखा था बम बनाना

तहलका न्यूज़ ब्यूरो

लखनऊ. लखनऊ में मारे गए सैफुल्लाह के बारें में खुलासा करते हुए उत्तर प्रदेश के एडीजी (कानून और व्यवस्था) दलजीत सिंह चौधरी ने बताया कि सैफुल्लाह और उसके साथियों का आईएसआईएस से कोई सीधा संपर्क नहीं था. आरोपी खुद ही सोशल मीडिया और इंटरनेट के माध्यम से आईएस से प्रभावित हुए थे. वे ISIS के खुरासान मॉड्यूल के तौर पर अपनी पहचान बनाना चाहते थे.

दलजीत सिंह चौधरी ने आगे बताया कि कानपुर के जाजमऊ निवासी सैफुल्लाह ने अपनी साजिश को अमली जामा पहनाने के लिए लखनऊ के काकोरी की हाजी कॉलोनी में किराए का मकान लिया था. यह वही जगह है

, जहां मंगलवार 11 घंटे तक एनकाउंटर चला था. इसी के साथ ही कानपुर से फैजल खान और इटावा से फख्र-ए-आलम को गिरफ्तार कर लिया गया. उनके अन्य साथियों की तलाश जारी है.

चौधरी ने बताया कि मुठभेड़ के दौरान आरोपी सैफुल्लाह मकान के अलग-अलग कमरों से फायरिंग कर रहा था. इस लिए ऐसा प्रतीत हो रहा था कि वहां कई लोग हो सकते हैं

, लेकिन बाद में वहां केवल सैफुल्लाह के होने की पुष्टि हो गई थी.

एक सवाल के जवाब में एडीजी ने कहा कि यह कहना गलत होगा कि कुछ उनका कोई टारगेट था. इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा कि ये लोग खुद से प्रेरित हैं. इन्हें बाहर से कोई समर्थन या मदद नहीं मिल रही थी. ये लोग आईएसआईएस के खुरासान मॉड्यूल के नाम से अपनी पहचान बनाना चाहते थे.

एडीजी ने जानकारी देते हुए बताया कि मुठभेड़ वाली जगह से भारी मात्रा में असलाह और मोबाइल

, सोना, विदेशी मुद्रा, पेन कार्ड, आधार, मानचित्र, एजुकेशनल डॉक्यूमेंट, लैबटॉप के साथ-साथ उर्दू और अंग्रेजी कई किताबें भी मिली हैं. मौके से मिल तीन में से एक पासपोर्ट सैफुल्लाह का है, जिस पर उसका कानपुर का पता अंकित है.

मृतक सैफुल्लाह के कमरे से मुख्य बरामदगी निम्न है...

1- पिस्टल 08 अदद, चाकू 04, कारतूस .32 बोर 630 जिन्दा राउण्ड तथा 71 खोखा राउण्ड,गोल्ड लगभग 45 ग्राम, 03 मोबाइल फोन, बैकों के चेक बुक, एटीएम कार्ड तथा पैन कार्ड आतिफ मुजफफ्र के नाम का, सिम कार्ड 4, बाइक डिस्कवर यूपी 78 सीपी/9704,

2- वाकी-टाकी सेट 02, छर्रा भरा एक बोतल, पलिता 01 पैकेट, 2 बोतल भरे गन पाउडर, काले रंग के कपड़े का बैनर ( जिस पर अरबी में लाइलाहा इलल्लाह अल रसूल मुहम्मद लिखा है), तीन अदद पासपोर्ट अतीक, दानिश तथा सैफुल्लाह के नाम का, हस्त लिखित साहित्य तथा नकदी डेढ लाख रू0 तथा रियाल विदेषी मुद्रा के कुछ नोट आदि.

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