अस्थिरता के इस दौर में कोई खबर अंतिम नहीं होती – ब्रजेश मिश्र

 2017-01-21 14:18:55.0

अस्थिरता के इस दौर में कोई खबर अंतिम नहीं होती – ब्रजेश मिश्र



उत्कर्ष सिन्हा

लखनऊ. वे टीवी की दुनिया में एक अलग किस्म के सितारे की तरह उभरे हैं, उत्तर प्रदेश में खबरों की सत्यता उनके नाम से जाँची जाती है, आम तौर पर उनका मुस्कराता हुआ चेहरा अपना टाक शो करते समय उतना ही सख्त दिखाई देता है. अपने आक्रामक तेवर वाली पत्रकारिता से उन्होंने टीवी की दुनिया का व्याकरण बदल दिया है. ये शख्स है ब्रजेश मिश्रा जो फिलहाल अपने महत्वाकांक्षी परियोजना UP TV के साथ एक बार फिर खबरों के फलक पर नुमायाँ हो रहे हैं . तहलका न्यूज ने
बृजेश मिश्रा से उनकी सोच, योजना और उनकी शैली के बारे में बात की. हम अपने पाठको के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं बातचीत के कुछ खास अंश का पहला हिस्सा -
टीवी की दुनिया में आप एक ब्रांड बन चुके हैं. क्या है ब्रांड ब्रजेश ?

ब्रजेश अलग कुछ भी नहीं है. यह एक टीम है जहाँ मेरे सीनियर भी हैं और सहयोगी भी. यह टीम खबरों की एक एक्सपर्ट टीम है. हम सब लोक एक थाट प्रासेस का हिस्सा हैं, हमारी एक साझा सोच है और यही टीम एक ऐसे अम्ब्रेला का निर्माण करती है जो UP TV के रूप में सामने आ रहा है.

आपके बारे में यह भी कहा जाता है कि आप खबरों का संसेशन क्रियेट करते हैं.

हाँ, यह बात मैं मानता हूँ. हम सनसनी भी पैदा करते हैं और मनोरंजन भी. टीवी में एक बड़ा वर्ग है जो अभी भी पारंपरिक तौर तरीको से खबरे दिखा रहा है. हम इसे बदलना चाहते हैं और बदल रहे हैं. हमारी कोशिश जनता के साथ तालमेल बनाने की है इसलिए हमारे साथ हमारे दर्शक जुड़ते हैं. हम खबर की प्रस्तुति का तरीका भी बदल रहे हैं. हमारी कोशिश खबरों को ब्रेक करने की है. अभी हम सिग्नल टेस्ट की स्थिति में हैं फिर भी 95 प्रतिशत खबरे हमने ही ब्रेक की हैं.

कई बार यह भी कहा देखा गया है कि आप ने जो खबर दिखाई उसे फिर सुधारना पड़ा. क्या इससे फर्क नहीं पड़ता. आप ही के चैनल पर दिखी खबरे संशोधित भी हुई हैं.

हाँ , इसे भी मैं स्वीकार करता हूँ. कई बार ऐसा होता है कि हम काफी आगे निकल जाते हैं और फिर उसे सुधारते हैं. दरअसल ये राजनितिक अस्थिरता का दौर है जहाँ हर वक्त चीजे बदल रही हैं, इसका असर हम पर भी पड़ता है.इसलिए हर घंटे बदलने वाली परिस्थियों के अनुसार देखे तो कोई भी खबर अंतिम नहीं होती और हम भी इसे सुधारते रहते हैं.

टीवी ने हमें यह सहूलियत भी मिलती है जो प्रिंट मीडिया में नहीं है. हमारे पास अपनी खबर को सुधारने का हर वक्त मौका होता है. आप अपने फैक्ट्स को हमेशा सुधार सकते हैं. राजनितिक अस्थिरता के बीच हम हर समय की खबर दिखाते हैं. ऐसे में दर्शको को भी यह समझना होगा कि यह उस खास वक्त तक की खबर है जो अगले घंटो या दिनों में बदल भी सकती है.


लेकिन आपकी तेज छवि का दूसरा असर भी देखा गया है. कई बार आप जो दिखा देते हैं थोड़ी देर बाद दूसरे चैनलों पर भी वही टिकर चलने लगता है.

हाँ यह कई बार होता है. मैं एक मजेदार किस्सा बताता हूँ. लखनऊ एअरपोर्ट पर एक बार जेट एयरवेज की फ्लाईट की इमरजेंसी लैंडिंग हुई थी. हमारे सोर्स ने बस जहाज का रंग देखा और जल्दबाजी में उसे इंडिगो बता दिया. हमारे यहाँ भी यही चलने लगा. उसी को कापी कर दूसरे चैनल भी इंडिगो ही चलाने लगे. करीब 10 मिनट बाद ही सोर्स ने सच बता दिया और हमने भी सुधार किया. अब उन दूसरे चैनलों के सामने अजीब स्थिति आ गयी . फिर उन्होंने एक एयर लाईन्स करके उस खबर को चलाया.

तो आपकी प्रतिस्पर्धा है किससे ?

किसी से नहीं. हमने टेस्ट सिग्नल के दौरान ही 95 प्रतिशत खबरे ब्रेक की हैं. हमारी टीम भी अलग है, सोच भी अलग और शैली भी अलग. हमने अपने टारगेट सेट किये हैं और उसी को पूरा करते हुए आगे बढ़ेंगे.

( बातचीत के अगले अंक की प्रतीक्षा कीजिये, जिसमे हम जानेंगे ब्रजेश मिश्र और UPTV की टीम के बारे में उनकी योजनाओं के बारे में और जानेंगे ब्रजेश मिश्रा के मन की बात)

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