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भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ अवमानना याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई 13 फरवरी को

 shabahat |  2017-02-11 15:50:03.0

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ अवमानना याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई 13 फरवरी को


लखनऊ. भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन न कराने के जिम्मेदार अधिकारियों पर अवमानना की कार्यवाही के मामले में 13 फरवरी को हाईकोर्ट में सुनवाई होगी. लोकतंत्र मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय संयोजक प्रताप चन्द्रा ने भारतीय जनता पार्टी के घोषणापत्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तस्वीर इस्तेमाल करने पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही सुनिश्चित किये जाने की याचिका दायर की थी क्योंकि प्रधानमंत्री को राष्ट्रीय प्रतीक माना जाता है और राष्ट्रीय प्रतीक का दुरूपयोग करने का अधिकार किसी को भी नहीं है.

प्रताप चन्द्रा ने बताया कि यह याचिका इस मकसद से दायर की गई है ताकि न सिर्फ हाई कोर्ट के आदेश की गरिमा बचे बल्कि राष्ट्रीय प्रतीक अधिनियम 1950 के पैरा 9-A में शामिल प्रधानमंत्री के फोटो का इस्तेमाल कर अधिनियम की धज्जियाँ उड़ा रहे लोगों को सबक भी मिल सके.

भारत के प्रधानमंत्री राष्ट्रीय प्रतीक हैं जिनकी फोटो नहीं इस्तेमाल हो सकती है पर भाजपा अपनी पार्टी के मेनिफेस्टो सहित तमाम प्रचार माध्यमों में इस्तेमाल कर रही हैं जो राष्ट्रीय प्रतीक अधिनियम का उलंघन है.

इस अधिनियम के सन्दर्भ में उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच में जनहित याचिका प्रताप चन्द्र बनाम भारत सरकार में 30 जनवरी 2014 को सभी कंसर्न एथोरिटी को अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिये आदेश दिया था जिसके तहत चुनाव आयोग ने भी 4 मार्च 2014 को सभी राजनितिक दलों को उक्त आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराने का निर्देश जारी किया जिससे अधिनियम और उच्च न्यायलय के आदेश का उल्लंघन न हो.

विदित हो कि 24 जनवरी 2017 को चुनाव आयोग ने एक और पत्र सभी पार्टियों को भेजकर निर्देशित किया कि 'संवैधानिक पद पर आसीन लोगों की फोटो का इस्तेमाल दल चुनाव प्रचार में न करें.

जिओ कंपनी और पे टी एम को प्रधानमंत्री की फोटो लगाकर प्रचार करने के लिए इसी अधिनियम के उलंघन में सरकार द्वारा नोटिस भेजा गया है.
वैसे भी प्रधानमंत्री तो पूरे देश के होते हैं और राष्ट्रीय प्रतीक हैं न कि किसी पार्टी के लिहाजा कोई पार्टी प्रधानमंत्री की फोटो लगाकर चुनाव प्रचार करके बढ़त कैसे हासिल कर सकती है जो न सिर्फ पक्षपातपूर्ण चुनाव है बल्कि कानून का उल्लंघन भी है क्योंकि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय प्रतीक हैं. जिनके फोटो का इस्तेमाल सरकारी विज्ञापनों में हो सकता है पर किसी और को बढ़त दिलाने के लिए नहीं.

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