Breaking News
  • Breaking News Will Appear Here

चुनाव आयोग ने सु्प्रीम कोर्ट में कहा- अपराधियों के आजीवन चुनाव लड़ने पर लगे पाबंदी

 Girish |  2017-03-21 10:30:00.0

तहलका न्‍यूज ब्‍यूरो
नई दिल्‍ली: चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि वह आपराधिक चरित्र वाले व्यक्तियों पर चुनाव लड़ने के लिए आजीवन प्रतिबंध लगाने और न्यायपालिका और कार्यपालिका में उनके प्रवेश को रोकने के पक्ष में है। साथ ही वह सरकारी कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों और न्यायपालिका से जुड़े सदस्यों के आपराधिक मामलों का फैसला करने के लिए विशेष अदालतें बनाने के भी पक्ष में है। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि आपराधिक मामलों में आरोपी नेताओं का ट्रायल एक वर्ष के भीतर पूरा हो जाना चाहिए। वर्तमान प्रावधान के मुताबिक, दोषी पर सजा काटने के छह वर्ष तक ही चुनाव लड़ने पर पाबंदी है।

बता दें कि यह जनहित याचिका दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता और वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दी थी। विधायकों के लिए न्यूनतम योग्यता और अधिकतम आयु सीमा तय करने से जुड़ी मांग पर आयोग ने कहा कि यह मुद्दा कानूनी दायरे में आता है और इसके लिए संविधान में संशोधन करना होगा।

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा है कि वह निष्पक्ष चुनाव के लिए प्रतिबद्ध है। आयोग ने कहा कि वह इसका समर्थन करती है कि आपराधिक मामलों में दो या उससे अधिक वर्ष की सजा पाने वालों पर चुनाव लड़ने की आजीवन पाबंदी होनी चाहिए। उसका कहना है कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए इस तरह की पाबंदी होनी चाहिए। भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपना यह पक्ष रखा है।

हलफनामे में आयोग ने कहा कि चुनाव सुधार को लेकर उन्होंने विस्तृत प्रस्ताव सरकार को सौंप दिया है। इनमें अपराधमुक्त राजनीति, रिश्वत को संज्ञेय अपराध बनाना, पेड न्यूज पर पाबंदी और मतदान के 48 घंटे पहले तक विज्ञापनों पर प्रतिबंध आदि हैं। आयोग ने कहा कि अधिकतर सिफारिशों को विधि आयोग ने अपनी 244 और 255वीं रिपोर्ट को अप्रूव कर दिया है। फिलहाल यह केंद्र सरकार के विचाराधीन है।

मालूम हो कि अश्विनी उपाध्याय ने अपनी याचिका में गुहार लगाई है कि आपराधिक मामलों में दो वर्ष या इससे अधिक की सजा पाने वालों पर आजीवन चुनाव लड़ने की पाबंदी लगा दी जानी चाहिए। साथ ही राजनेताओं के मामले का ट्रायल एक वर्ष के भीतर पूरा हो जाना चाहिए। साथ ही याचिका में यह भी गुहार की गई है कि चुनाव लड़ने के लिए अधिकतम उम्र निर्धारित हो और न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता तय हो।

चुनाव लड़ने के लिए अधिकतम उम्र और न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता तय करने के मसले पर आयोग ने कहा कि यह विधायिका के कार्यक्षेत्र में है और इसके लिए संविधान में संशोधन की जरूरत है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि कार्यपालिका और न्यायपालिका में ऐसी व्यवस्था है कि अगर कोई व्यक्ति आपराधिक मामले में दोषी ठहराया जाता है तो वह नौकरी से बर्खास्त हो जाता है वहीं विधायिका पर यह मापदंड लागू नहीं होता। याचिका में विधायिका में भी यही मापदंड तय करने की गुहार की गई है।
याचिका में कहा गया कि मौजूदा स्थिति है कि दोषी ठहराए जाने और सजा काटने के दौरान भी दोषी राजनीतिक दल बना सकता है और वह दल का पदाधिकारी बन सकता है। इतना ही सजा काटने के छह वर्ष बाद भी दोषी फिर से चुनाव लड़ सकता है।

Tags:    

  Similar Posts

Share it
Top