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बुश और ओबामा के दौर में अमेरिका काफी पीछे चला गया : अयातुल्लाह अराकी

 shabahat |  2017-02-13 15:41:25.0

बुश और ओबामा के दौर में अमेरिका काफी पीछे चला गया : अयातुल्लाह अराकी


तहलका न्यूज़ ब्यूरो

लखनऊ. अनतर्राष्ट्रीय स्तर पर मुसलमानों को कमज़ोर करने के लिए अपने आपको कमज़ोर होता देख अमेरिका और इसराइल ने अरब को अपने साथ लेकर तफ़रीक़ी जमातों की बुनियाद डाल कर उन्हें हवा दे रहा है. कई दहशतगर्द अमेरिका और इसराइल के पैदा किये हुए हैं जो मुसलमानो में दूसरों को काफिर क़रार दे कर उनके जान माल पर हमला कर रहे हैं. इस बात को अमेरिका में हुए इलेक्शन में कबूल भी किया कि दहशतगर्दी की बुनियाद उन्होंने ही डाली. आज ज़रुरत है सभी मुसलमान जमाते एक साथ खड़ी हों. हिन्दुस्तान के उलेमा ने इस जानिब काफी काम किये हैं और यहाँ के बुज़ुर्ग उलेमा का इतिहास रहा है कि उन्होंने सभी को साथ लेकर चलने का काम किया है. सैय्यद जमालुद्दीन जो हिन्दुस्तान के थे और वहदत का परचम लेकर पूरी दुनिया में पैगाम को आम किया. जिसकी शुरूआत भी उन्होंने हिन्दुस्तान से की थी. इन ख्यालात का इज़हार आज इमामबाड़ा गुफरानमाब में ईरान से आये शिया सुन्नी उलेमा के प्रतिनिधि मंडल में आये आयतुल्लाह मोहसिन अराकी ने किया. ईरान के उलेमा की सुप्रीम काउन्सल के सुन्नी सदस्य मौलाना नदीर अहमद, पूर्व विदेश मंत्री मनोचहर मुत्तक़ी समेत 5 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल हिन्दुस्तान आया है.

ईरान से आये प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि ओबामा और बुश के दौर में अमेरिका काफी पीछे चला गया है. अमेरिका की इराक़, अफगानिस्तान और यमन में बहुत बुरी तरह से हार हुई है. शाम में भी वह लगातार पिछड़ता जा रहा है. यही वजह है नये राष्ट्रपति ट्रंपखुद को बदला हुआ दिखाना चाहते हैं.

उन्होंने कहा कि मुसलमान सिर्फ हिन्दुस्तान में ही नहीं सारी दुनिया में तरक्की की दौड़ में पिछड़ गया है. इसकी वजह यह है कि 200 साल पहले मुसलमानों की हुकूमत थी. वह मुसलमान तो थे लेकिन उनकी हुकूमत इस्लामी हुकूमत नहीं थी. उनकी फ़िक्र इस्लामी नहीं थी. उन्होंने ऐसे काम किये जिससे उनकी अवामी हिमायत कमज़ोर हो गई. बाहरी ताकतें हावी हो गईं और उनकी हुकूमत भी खत्म हो गई. अंग्रेज़ हुकूमत में आये तो उन्होंने फारसी ज़बान पर बंदिश लगा दी. फारसी पर बंदिश लगी तो अंग्रेज़ी को मुसलमानों के लिये हराम करार दे दिया गया. इस एक फतवे ने मुसलमानों को नब्बे साल पीछे ढकेल दिया. हमारे बुजुर्गों ने यूरोप और पश्चिमी देशों की अंधी तकलीद शुरू कर दी. इसी वजह से मुसलमान पीछे गया और काहिल हो गया.

उन्होंने कहा कि एक खानदान भी जब टुकड़ों में बंटता है तो कमज़ोर हो जाता है. जब उम्मते इस्लामिया टुकड़ों में बंटी तो उसका कमज़ोर होना भी लाजमी था. उन्होंने कहा कि जब फ़िक्र एक जैसी होती है तो तरक्की की तरफ बढ़ा जाता है.

अयातुल्लाह अराकी ने बताया कि ईरान दबे कुचले कमज़ोर लोगों के साथ हमेशा रहा है. खासकर हम फिलिस्तीन के साथ हैं उन्होंने कहा कि इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है फिलिस्तीन और लेबनान ने इसराइल से उनके क़ब्ज़े से अपने कुछ हिस्से छीन लिए हैं. उन्होंने कहा कि पश्चिमी एशिया को तफ़रीक़ी जमात अपनी ज़द में लेते हुए दहशतगर्दी की तरफ ले जा रहा है. जो खतरनाक है. यह लोग काफिर करार देकर दहशतगर्दी को बढ़ा रहे हैं. अमेरिका इसराइल ने इंक़लाब की बढ़ती ताक़त को देखकर इनका इस्तेमाल कर रही है उन्होंने कहा कि इराक और शाम से यह लोग फरार हो रहे हैं. यहाँ पर दहशतगर्द पराजित हो रहे हैं. जिसकी वजह है कि यहाँ के लोग एकजुट हो रहे हैं.

उन्होंने शिया को ही निशाना बनाये जाने की बात को खंडित करते हुए कहा कि इराक गवाह है कि वहां पर शिया से ज़्यादा सुन्नी निशाना बने, और मारे गए. उन्होंने कहा कि फिरके के इख़्तेलाफ़ को ख़त्म कर एक होना ज़रूरी है. उन्होंने कहा कि शिया सुन्नी उलेमा को एक साथ हाथ मिलाकर उम्मते इस्लामिया के नाम पर सबको एक करना होगा. हिन्दुस्तन की तारीफ करते हुए कहा की यहाँ पर सभी मज़हब के लोग हैं और मैं सभी मज़हब के उलेमा से मिला सभी में इत्तेहाद की झलक दिखी मैंने सभी से सलाह मश्विरा किया. उम्मीद की रौशनी दिखी. उन्होंने कहा कि सब को एक करने का काम बुद्धजीवी, धर्मगुरुओं को साथ लेकर होगा. ईरान जागरूक करने का काम कर रहा है.

इस मौके पर आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष डॉ. कल्बे सादिक़ ने कहा की आज जो हालात हैं उनमे सबको एक करने का दो तरीके हैं, दीन के अकीदे और क़ुरआन सभी मानते हैं. इसके खिलाफ कोई कुछ नही बोल सकता. सब लोग अपने फिरके पर अमल करे और इसको दूसरे पर न थोपें. उन्होंने कहा कि फिरके सिर्फ मुसलमानों में ही नही हिंदुओं में भी होते हैं रावण कहीं जलाया जाता है तो कहीं उसकी पूजा होती है. लेकिन इसको लेकर कहीं कोई फसाद नही होता.

डॉ कल्बे सादिक़ ने कहा कि हिन्द में कुछ गलतियां उलेमा से हुई अंग्रेजों ने जब फ़ारसी पर पाबन्दी लगायी तो अंग्रेजी पर पाबन्दी का फतवा आ गया. जिससे हम 90 साल पीछे चले गये. उन्होंने कहा कि इत्तेहाद मुमकिन है. एक दूसरे के ऊपर अपना अकीदा न थोपें.

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