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केरल में हादसे के बाद मंदिर के अधिकारी लापता

 Sabahat Vijeta |  2016-04-10 13:59:29.0

templeसोनू जॉर्ज  
कोल्लम(केरल), 10 अप्रैल| केरल के पुत्तिंगल देवी मंदिर में रविवार तड़के अवैध रूप से की गई आतिशबाजी के कारण लगी भीषण आग में कोई 100 लोगों की हुई मौत के बाद से मंदिर के वरिष्ठ अधिकारी कथित तौर पर लापता हैं।


पुलिस ने इस मामले में मंदिर के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है। आईएएनएस के एक संवाददाता ने उनसे मोबाइल फोन के जरिए संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उनके फोन बंद पाए गए।


आतिशबाजी कार्यक्रम का प्रबंध करने वाले बाप-बेटे सुरेंद्रन और उमेश के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। तिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में दोनों का इलाज चल रहा है। तिरुवनंतपुरम से लगभग 60 किलोमीटर दूर इस मंदिर में हर साल अप्रैल में आने वाले मलयाली महीने मीनम के दौरान आतिशबाजी आयोजित की जाती है।


मंदिर के समीप रहने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि पिछले साल तक आतिशबाजी में दो समूहों के बीच प्रतियोगिता होती थी। नाम न छापे जाने की शर्त पर इस व्यक्ति ने कहा, "इस बार अनुमति नहीं दी गई थी, लेकिन शनिवार को बांटे गए पर्चो में सर्वश्रेष्ठ आतिशबाजी प्रदर्शन के लिए इनाम का जिक्र किया गया था।"


उनके मुताबिक, मंदिर से जुड़े सभी कर्मकांड समाप्त होने के बाद रात को मंदिर बंद हो जाता है और उसके बाद सामान्य तौर पर रात लगभग 10.30 बजे आतिशबाजी शुरू होती है। हाथी भी मंदिर के उत्सव का हिस्सा होते हैं, लेकिन आतिशबाजी शुरू करने से पहले उन्हें इस जगह से हटा दिया जाता है।


एक अन्य श्रद्धालु ने बताया कि आतिशबाजी कार्यक्रम रात लगभग 11 बजे शुरू होता है और यह अगले दिन तड़के लगभग चार बजे तक जारी रहता है। रविवार का हादसा कार्यक्रम समाप्त होने से लगभग 30 मिनट पहले हुआ।


निवासी ने कहा, "इस मंदिर की आतिशबाजी बहुत लोकप्रिय है और नजदीकी इलाकों के बड़ी संख्या में लोग इसे देखने के लिए आते हैं। शनिवार को मंदिर परिसर में और उसके आसपास लगभग 15,000 लोग थे।"


कुछ निवासियों ने दावा किया कि आतिशबाजी से निकली एक चिंगारी एक इमारत में जाने के बाद इमारत में भारी मात्रा में रखी आतिशबाजी में तेज धमाके से विस्फोट हो गया, जिसके बाद कंक्रीट के टुकड़े उछलकर गिरने लगे।


कंक्रीट का एक टुकड़ा दो किलोमीटर दूर एक दोपहिया वाहन चालक को जाकर लगा। सौभाग्यवश दमकल की गाड़ियां और चिकित्सा कर्मी मंदिर में ही मौजूद थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आतिशबाजी जिस इमारत में रखी गई थी, वह ढह गई और कई लोग उसमें दब गए।

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