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सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले अधिकारियों पर विभाग ने कसी नकेल

 shabahat |  2017-03-29 15:37:34.0

सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले अधिकारियों पर विभाग ने कसी नकेल

तहलका न्यूज़ ब्यूरो

लखनऊ. सोशल मीडिया पर लगातार सक्रिय रहने वाले उत्तर प्रदेश के पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों पर विभाग ने एक पालिसी बनाकर उन पर नकेल कस दी है. अब न तो वह किसी राजनीतिक दल पर टिप्पड़ी कर सकेंगे न राजनेता पर. वह अपनी पोस्ट में जाति,धर्म,वर्ग,सम्प्रदाय,व्यवसाय,लिंग,क्षेत्र और राज्य पर टिप्पड़ी नहीं कर सकेंगे. इसके साथ ही सोशल मीडिया पर किसी बलात्कार पीड़िता या किशोर की पहचान अथवा नाम सोशल मीडिया पर उजागर नहीं किया जायेगा.

उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक जावीद अहमद ने पुलिस विभाग के लिये सोशल मीडिया पालिसी तय कर दी है. सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को इस पालिसी का पालन करना होगा. इस पालिसी में स्पष्ट कहा गया है पुलिसकर्मी ड्यूटी पर हो या नहीं हो वह हमेशा पुलिसकर्मी ही होता है. वह फेसबुक, ब्लॉग, ट्विटर या व्हाट्सअप पर जो विचार व्यक्त करता है उसमें उसे सावधानी भी बरतनी होगी और हर बार यह भी लिखना होगा कि यह उसके निजी विचार हैं.

पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के लिये सोशल मीडिया को लेकर बनाई गई पालिसी में कहा गया है कि उ.प्र. पुलिस का कोई भी अधिकारी या कर्मचारी चाहे वह ड्यूटी पर है या नहीं, परन्तु वह उ.प्र. पुलिस का प्रतिनिधि होता है. व्यक्तिगत जीवन में अथवा सोशल मीडिया पर उसकी व्यक्तिगत गतिविधियॉ, विभाग की प्रतिष्ठा से सीधे तौर पर जुड़ी होती हैं. चूंकि सोशल मीडिया पर डाली गयी हर सामग्री पब्लिक प्लेटफार्म पर सबके लिये सुलभता से उपलब्ध है, इसलिये विभागीय गरिमा के दृष्टिकोण से पुलिस अधिकारियों/ कर्मचारियों के द्वारा व्यक्तिगत रूप से किये जा रहे सोशल मीडिया के प्रयोग के निर्देशनार्थ एक सोशल मीडिया पालिसी का होना नितान्त आवश्यक है.

पालिसी में कहा गया है कि उ.प्र. पुलिस का हर अधिकारी/कर्मचारी एक सामान्य नागरिक के रूप में सोशल मीडिया के प्रयोग एवं उस पर अभिव्यक्ति के लिये उस हद तक स्वतंत्र है, जहाँ तक उसके द्वारा उ.प्र. सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956 (यथा संशोधित) का किसी भी प्रकार से उल्लंघन न किया जाये.

एक सामान्य नागरिक के रूप में सोशल मीडिया पर उनके द्वारा की गयी अभिव्यक्ति में उनके द्वारा यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि उक्त विचार उनके निजी विचार हैं एवं इससे विभाग का कोई सरोकार नहीं है. सोशल मीडिया पर पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा ऐसी कोई जानकारी साझा नहीं की जायेगी, जो उन्हें अपनी विभागीय नियुक्ति के कारण प्राप्त हो, जब तक उनके पास इसके लिए सक्षम अधिकारी से अनुमति न प्राप्त हो.

सोशल मीडिया पर किसी भी राजनैतिक दल, राजनैतिक व्यक्ति या राजनैतिक विचारधारा के संबंध में कोई टिप्पणी नहीं की जायेगी. निजता एवं सुरक्षा के कारणों से पुलिस अधिकारी/कर्मचारी को यह सचेत किया जाता है कि वह सोशल मीडिया पर अपनी अथवा किसी अन्य पुलिस अधिकारी की नियुक्ति का उल्लेख न करें. अभिसूचना संकलन या किसी गुप्त आपरेशन में संलग्न पुलिस कर्मियों को इस प्रावधान का सख्ती से अनुपालन करना अपेक्षित है.

पुलिस कर्मी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर पुलिस विभाग के लोगो, वर्दी, उससे जुड़ी हुई अन्य वस्तु, हथियार या हथियार प्रदर्शित करती हुई तस्वीर पोस्ट नहीं करेंगे. यदि अपनी फोटोग्राफ यूनिफार्म में डाल रहे हैं, तो यह ध्यान रखें कि वर्दी समुचित एवं पूरी हो.

पुलिस कर्मी सोशल मीडिया पर अश्लील भाषा का प्रयोग या अश्लील तस्वीर पोस्ट नहीं करेंगे. अपराध के अन्वेषण, विवेचनाधीन या न्यायालय में लम्बित प्रकरणों से सम्बन्धित कोई गोपनीय जानकारी सोशल मीडिया पर साझा नहीं की जायेगी एवं न ही उनपर कोई टिप्पणी की जायेगी. उपरोक्त विषय वस्तु पर सक्षम अधिकारी द्वारा अधिकृत या सक्षम अधिकारी द्वारा ही आवश्यक जानकारी सार्वजनिक प्रेस नोट द्वारा साझा की जायेगी.

सोशल मीडिया पोस्ट में किसी जाति, धर्म, वर्ग, सम्प्रदाय, व्यवसाय, लिंग, क्षेत्र, राज्य के संबंध में पूर्वाग्रह या दुराग्रह से ग्रसित कोई टिप्पणी नहीं की जायेगी. किसी बलात्कार पीडि़ता या किशोर की पहचान अथवा नाम सोशल मीडिया पर उजागर नहीं किया जायेगा.

जिन आरोपियों की शिनाख्त परेड शेष हो, उनका चेहरा सोशल मीडिया पर सार्वजनिक नहीं किया जायेगा.
सोशल मीडिया पर पुलिस कर्मी, पुलिस विभाग, किसी वरिष्ठ अधिकारी या अपने सहकर्मी के विरूद्ध कोई आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं करेंगे, जिससे पुलिस विभाग को शर्मसार होना पड़े.

सोशल मीडिया पर पुलिस कर्मी सरकार या उसकी नीतियों, कार्यक्रमों या किसी राजनेता के संबंध में कोई टिप्पणी नहीं करेंगे. पुलिस के फील्डक्राफ्ट, विवेचना या अपराध के अन्वेषण में प्रयुक्त होने वाली गोपनीय तकनीक की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा नहीं की जायेगी. राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण प्रकरणों में सोशल मीडिया पर कोई टिप्पणी नहीं की जायेगी.

सोशल मीडिया पर न्यायालय के किसी दिशा निर्देश का उल्लंघन नहीं किया जायेगा और नहीं किसी प्रकार से न्यायालय की अवमानना की जायेगी.

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