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कमलेश तिवारी की बेल का विरोध करेंगे, पैगंबर के खिलाफ की थी अभद्र टिप्पणी: अमित जानी

 Abhishek Tripathi |  2016-08-26 03:50:09.0

amit_janiतहलका न्यूज ब्यूरो
नई दिल्ली. पैगंबर के खिलाफ अशोभनीय टिप्पणी करने वाले हिन्दू महासभा के अध्यक्ष कमलेश तिवारी द्वारा दाखिल अर्जी का सुप्रीम कोर्ट में विरोध किया जाएगा। उत्तर प्रदेश नवनिर्माण सेना ने कमलेश तिवारी की जमानत याचिका का विरोध करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता नियुक्त कर दिया है। यह जानकारी उत्तर प्रदेश नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष अमित जानी ने दी।


उल्लेखनीय है कि पैगम्बर-ए-इस्लाम मुहम्मद साहब के खिलाफ कमलेश तिवारी द्वारा अभद्र टिप्पणी के बाद उसके विरुद्ध रासुका की कार्रवाई की गयी थी। रासुका के चलते 9 महीने से कमलेश जेल में हैं।


उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ में कमलेश तिवारी की जमानत याचिका के विरोध में भी उत्तर प्रदेश नवनिर्माण सेना ने अपना अधिवक्ता नियुक्त किया था। वहीं, 13 बार न्यायालय में जमानत पर बहस की सुनवाई की तारीख लगने के बाद भी उच्च न्यायालय ने अभी तक निर्णय नहीं किया है। हाइकोर्ट से राहत न मिलने पर कमलेश तिवारी द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गयी है।


कमलेश ने सुप्रीम कोर्ट से जमानत दिए जाने की अपील की है। ऐसे में अमित जानी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में भी जमानत अर्जी का विरोध किया जायेगा। इसके लिए उत्तर प्रदेश नवनिर्माण सेना ने अपनी लीगल टीम को जिम्मा दिया है।



कौन हैं कमलेश तिवारी
कमलेश तिवारी अखिल भारतीय हिंदू महासभा के कार्यकारी अध्‍यक्ष हैं। दो दिसंबर को उन्‍होंने पैगंबर मोहम्मद साहब के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसको लेकर पूरे देश में बवाल मचा हुआ है। यूपी से लेकर देश के दूसरे हिस्सों में प्रदर्शनों का दौर जारी है। हालांकि, टि‍प्‍पणी करने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कमलेश ति‍वारी को जेल भेज दिया, लेकि‍न प्रदर्शनकारि‍यों का गुस्‍सा थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रदर्शनकारी फांसी देने की मांग कर रहे हैं। दरअसल, यूपी सरकार के कद्दावर मंत्री आजम खान ने आरएसएस पर हमला करते हुए कहा था, ''आरएसएस में लोग इसलिए शादी नहीं करते हैं क्योंकि वो समलैंगिक होते हैं।'' आजम के इसी बयान के विरोध में कमलेश तिवारी ने मोहम्मद साहब को गे कह डाला था। सोशल मीडि‍या पर मोहम्‍मद साहब के खिलाफ की गई टि‍प्‍पणी काफी वायरल हुई थी।

कौन हैं अमित जानी
अमित जानी अचानक से जुलाई 2012 में सुर्खियों में आए थे। यूपी नव निर्माण सेना संस्था के नाम से तीन युवकों ने अंबेडकर पार्क में स्थापित सफेद रंग की मायावती की मूर्ति को हथोड़ा मारकर क्षतिग्रस्त कर दिया था। यही नहीं, मूर्ति तोड़कर भागने से पहले वहां पर यूपी नव निर्माण सेना के पर्चे भी फेंके गए थे। मामला इतना बढ़ा कि अखिलेश सरकार को रातो-रात मायावती की मूर्ति लगवानी पड़ी। बस यहीं से अमित जानी सुर्खियों में आया था। दिल्ली से यूपी एसटीएफ की गिरफ्त में आए अमित जानी ने बताया था कि सपा ने सरकार में आने से पहले जनता से वादा किया था कि मायावती की मूर्ति तोड़ी जाएगी, लेकिन वादा पूरा नहीं किया।

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