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रोजगार की तलाश में कैराना से हो रहा पलायन

 Abhishek Tripathi |  2016-06-19 14:16:37.0

kairanaतहलका न्यूज ब्यूरो
लखनऊ. भारत की जनगणना रिपोर्ट के अनुसार कैराना से हिंदुओं का पलायन करना भाजपा नेताओं के दावों के विपरीत है। भारत सरकार द्वारा जारी भारत की जनगणना रिपोर्ट में साफ लिखा है कि आर्थिक कारणों के चलते पिछले २० सालों में सबसे ज्यादा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आधा दर्जन जिलों के लोगों ने शहर की ओर पलायन किया है।


भाजपा नेतृत्व ने दावा किया है कि हिंदुओं ने मुसलमानों द्वारा पीछा किए जाने के बाद कैराना में अपने घरों को छोड़ दिया है। इस मुद्दे को इलाहाबाद में आयोजित भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने एक गंभीर सांप्रदायिक बात बताई। साथ ही भाजपा 2017 के विधानसभा चुनाव में इस मुद्दे को उठाने की धमकी दी है।


लेकिन भारत सरकार की जनगणना रिपोर्ट के अनुसार पलायन में वृद्धि मुख्य रुप से आर्थिक पिछड़ापन, शिक्षा और अन्य हिस्सों में नौकरियों के बारे में जागरूकता की वजह से किया गया है। भारत की जनगणना कारणों के साथ-साथ प्रवास पैटर्न पर सर्वेक्षण आयोजित करता है जिसमें साफ पाया गया है कि 1991 की जनगणना में शहरी इलाकों के लिए हुआ पलायन 2001 में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ग्रामीण आबादी के पलायन की तुलना कहीं ज्यादा है।


रिपोर्ट में कहा गया है कि गौतम बुद्ध नगर, गाजियाबाद, सहारनपुर, अलीगढ़ और दिल्ली एनसीआर के कुछ हिस्सों सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में पिछले 20 वर्षों में सबसे ज्यादा आर्थिक उछाल दर्ज किया गया है। वहीं लखनऊ के जनगणना अधिकारी का कहना है कि गुड़गांव और नोएडा की जमीन उतनी ही महंगी है जितनी दिल्ली और मुंबई की। यही कारण है कि ज्यादातर लोगों ने कैराना, शामली, सहारनपुर में अपनी जमीनों को दूसरों के हाथों बेच दिया और बेहतर गंतव्यों के लिए पलायन कर लिया। यही नहीं इसी तरह लोगों ने बिहार, राजस्थान, पंजाब, केरल और आंध्र प्रदेश में भी पलायन किया है। फिर पश्चिमी उत्तर प्रेदश पर उपद्रव क्यों।


आंकड़े
पश्चिमी यूपी: 1991 (11.63), 2001 (12.20)
मध्य रिजन: 1991 (15.40), 2001 (14.35)
बुंदेलखंड रिजन: 1991 (17.63), 2001 (17.41)
ईस्टन रिजन: 1991 (13.64), 2001 (13.46)

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