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पत्रकारिता का अपना धर्म होता है

 Sabahat Vijeta |  2016-05-23 12:26:39.0

gov-brajeshलखनऊ. ‘‘हिन्दुस्थान समाचार समिति से मेरा पुराना संबंध रहा है। अच्छी हैण्ड राईटिंग के कारण मैं 1956 से मुंबई में अवैतनिक रूप से रोज घंटा-दो घंटा काम करता था। मैं पत्रकार नहीं हूँ केवल ग्राहक के नाते समाचार पढ़ता और देखता हूँ।‘‘ फिर राज्यपाल राम नाईक ने मुस्कुराते हुए कहा कि ‘‘हाँ समाचार उपलब्ध जरूर कराता हूँ।‘‘ राज्यपाल आज लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में विश्व पत्रकारिता दिवस एवं महर्षि नारद जयन्ती के अवसर पर बहुभाषी संवाद समिति हिन्दुस्थान समाचार द्वारा आयोजित संगोष्ठी के उद्घाटन के पश्चात् अपने विचार व्यक्त कर रहे थे।


कार्यक्रम में पत्रकारों का सम्मान समारोह भी आयोजित किया गया, जिसमें स्तम्भकार हृदय नारायण दीक्षित, नन्द किशोर श्रीवास्तव, आलोक त्रिपाठी, राजीव बाजपेई, श्रीमती रंजना, प्रेम शंकर मिश्र, विनय राय, राजेन्द्र गौतम, नसीम नदवी, सुश्री स्वाति माथुर, सुश्री रितेश सिंह को स्मृति चिन्ह, पुष्पगुच्छ, श्रीफल व अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद आर.के. सिन्हा, पूर्व सांसद एवं वरिष्ठ पत्रकार राजनाथ सिंह सूर्य, के.सी. अग्निहोत्री, कुलपति केन्द्रीय विश्वविद्यालय हिमांचल प्रदेश सहित अन्य गणमान्य नागरिक भी उपस्थित थे।


राज्यपाल ने इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि कलम की ताकत का प्रयोग समाज के हित के लिये करें। लोकतंत्र में संविधान के तीन प्रमुख स्तम्भ हैं। लेकिन यह भी सच है कि पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ है। जनतंत्र को चलाने और समाज का प्रबोधन करने का कार्य पत्रकारिता करती है। उन्होंने कहा कि वे सोशल मीडिया और पत्रकारिता के उद्देश्य को अलग-अलग मानते हैं। पत्रकारिता के अपने धर्म होते हैं। उन्होंने कहा कि चौथे स्तम्भ के धर्म और चुनौतियों पर गम्भीरता से विचार किया जाना चाहिये।

श्री नाईक ने कहा कि देश में अनेक भाषायें हैं। अपने देश की खबरें अपनी भाषा में आयें तो उसका लाभ मिलता है। खबरों का अपना महत्व होता है। पत्रकारिता का काम केवल सही खबर देना है। टीका-टिप्पणी या खबरों पर अपना विश्लेषण अलग से होना चाहिये। प्रतिस्पर्धा के युग में विचार देने के साथ-साथ गुणवत्ता और प्रमाणिकता भी बनाये रखें। शब्दों के उचित चयन से पाठकों का ज्ञानवर्द्धन होता है। उन्होंने कहा कि पाठकों को उनकी अपनी भाषा में प्रमाणित खबरें दें।


बिहार से आये राज्यसभा सदस्य आर.के. सिन्हा ने कहा कि पत्रकारिता और समाचार लेखन के आयाम बदल रहे हैं। लम्बे लेख और सम्पादकीय लोग नहीं पढ़ते बल्कि छोटी खबरे पढ़ना चाहते हैं। समाज में पढ़ने की प्रवृत्ति घट रही है। खबरों की प्रमाणिकता जरूरी है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता में चुनौतियों को स्वीकारते हुए नई सम्भावनाएं तलाशने की जरूरत है।


के.सी. अग्निहोत्री, कुलपति केन्द्रीय विश्वविद्यालय, हिमांचल प्रदेश ने कहा कि समाचार के स्रोत की प्रमाणिकता महत्वपूर्ण है। विदेशी चश्मों से हटकर अपनी नजर से देखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मीडिया राष्ट्रहित को ध्यान में रखकर अपना काम करें।


ईटीवी उत्तर प्रदेश-उत्तराखण्ड के वरिष्ठ सम्पादक बृजेश मिश्रा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज में परिवर्तन के साथ-साथ पत्रकारिता में भी परिवर्तन आया है। तकनीक ने पत्रकारिता में भी बदलाव पैदा किया है। पत्रकारिता को उपयोगी बनाने के लिये दर्शकों और पाठकों को अपने साथ जोड़ने की जरूरत है। तत्काल खबर पहुंचाना अपने आप में एक चुनौती है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का धर्म समाज के बदलाव से जुड़ा है।


इस अवसर पर राज्यपाल ने हिन्दुस्थान समाचार समिति की पत्रिका पत्रकारिता धर्म विशेषांक का विमोचन भी किया। कार्यक्रम में आनन्द जोशी सचिव हिन्दुस्थान समाचार समिति ने स्वागत उद्बोधन दिया तथा राकेश मंजुल ने सभी का आभार व्यक्त किया।

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