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इस्लाम आतंकियों का धर्म: बुरे फंसे DIG, मानवाधिकार आयोग ने थमाया नोटिस

 Sabahat Vijeta |  2016-04-07 12:54:35.0

तहलका न्यूज़ ब्यूरो


dig-human rightsलखनऊ, 7 अप्रैल. केन्द्रीय रिज़र्व पुलिस बल में परीक्षा और मेडिकल हो जाने के बावजूद नियुक्ति पत्र न मिलने पर गाजीपुर के शम्स तबरेज़ द्वारा सूचना के अधिकार से माँगी गई जानकारी के जवाब में केन्द्रीय रिज़र्व पुलिस बल के पुलिस उप महानिरीक्षक डी.के.त्रिपाठी की तरफ से मिले जवाब में इस्लाम को आतंकियों का धर्म बनाए जाने के मामले की न तो हकीकत सामने आ पा रही है और न ही डीआईजी की मुश्किलें ही कम होती नजर आ रही हैं. अदालत के बाद अब डीआईजी की जवाबदेही राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के प्रति भी हो गई है. आयोग ने केन्द्रीय गृह मंत्रालय के सचिव से 4 सप्ताह में इस सम्बन्ध में जवाब देने को कहा है.


शम्स तबरेज़ ने केन्द्रीय रिज़र्व पुलिस बल के डीआईजी डी.के.त्रिपाठी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश की थी. शम्स तो एफआईआर दर्ज नहीं करा पाए लेकिन डीआईजी डी.के. त्रिपाठी ने शम्स के खिलाफ उनके पत्र के साथ छेड़खानी का मुक़दमा दर्ज करा दिया था. यह मामला अदालत तक पहुंचा तो डीआईजी की तरफ से उसी तारीख में उसी नंबर से जारी किया गया दूसरा पत्र पेश करते हुए बताया गया कि उनके पत्र में दो पैरों के बीच एक और पैरा जोड़ दिया गया है. यही जोड़ा गया पैरा ही विवादित है.


शम्स तबरेज़ ने बताया कि जब उन्होंने अदालत से पत्र की फारेंसिक जांच की मांग की ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पत्र के साथ छेड़छाड़ हुई है या नहीं तो डीआईजी की तरफ से अदालत से कहा गया कि इस पत्र पर उनके हस्ताक्षर ही फर्जी हैं. अदालत ने पत्र के असली-नकली साबित होने तक शम्स की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी.


dig-human rights-2शम्स ने इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का दरवाज़ा खटखटाया तो आयोग के क़ानून विभाग ने गृह मंत्रालय के सचिव को नोटिस जारी किया है. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस नोटिस में कहा है कि शम्स तबरेज़ को मिले पत्र में मुस्लिम समुदाय को आतंकियों का धर्म बताया गया है जो कि आपत्तिजनक है. इससे शम्स तबरेज़ की भावनाओं को ठेस लगना लाजमी है क्योंकि उसके परिवार के कई सदस्य देश की सुरक्षा के उद्देश्य से रक्षा सेवाओं से जुड़े हुए हैं. खुद उसने भी सीआरपीएफ के ज़रिये सिपाही बनना चाहा था.


राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने ऐसी भाषा को मानवाधिकार का उल्लंघन तो माना ही है साथ ही इसे संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 के खिलाफ भी माना है. आयोग ने इस मुद्दे पर 4 सप्ताह के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है. आयोग इस नोटिस का जवाब मिलने के बाद अपनी कार्यवाही तय करेगा.

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