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मुजफ्फरनगर दंगा: IPS एसोसिएशन ने खारिज की विष्णु सहाय कमेटी की रिपोर्ट

 Tahlka News |  2016-03-21 04:35:47.0

riots


तहलका न्यूज ब्यूरो
लखनऊ, 21 मार्च. यूपी आईपीएस एसोसिएशन ने मुजफ्फरनगर दंगों पर बनाई गई जस्टिस विष्णु सहाय कमेटी की रिपोर्ट को खारिज कर दिया है। एसोसिएशन ने कहा कि जांच रिपोर्ट में आईपीएस अफसर सुभाष दुबेे और एलआईयू के इंस्पेक्टर प्रबल प्रताप सिंह को गलत तरीके से दोषी ठहराया गया है। सुभाष दुबे केवल 12 दिन के लिये ही मुजफ्फरनगर जिले के एसपी थे। जबकि दंगा चार जिलों में फैला था।


वहीं सूत्रों का कहना है कि एसोसिएशन रिटायर्ड जस्टिस विष्णु सहाय की रिपोर्ट को जल्द ही कोर्ट में चैलेंज करने पर भी फैसला लेगा। साथ ही आईपीएस एसोसिएशन आज इस जांच रिपोर्ट के खिलाफ सीएम अखिलेश यादव से मिलेंगे।


बता दें कि शनिवार को इस संबंध में पुलिस मेस में आईपीएस एसोसिएशन के अध्यक्ष रंजन द्विवेदी की अध्यक्षता में एसोसिएशन की मीटिंग हुई। एसोसिएशन के सचिव और आईजी एडमिन प्रकाश डी ने बताया कि मुजफ्फरनगर दंगों पर गठित जस्टिस सहाय की रिपोर्ट का अध्ययन करने पर सामने आया है‍ कि जांच रिपोर्ट में सुभाष दुबे का बयान तक शामिल नहीं किया गया है। जबकि उनसे 27 पेज का बयान लिया गया था। उन्होंने कहा कि इतने बड़े दंगे के लिये केवल दो अफसरों को ही पॉइंट आउट करना उचित नहीं है।


मीटिंग में रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद एडीजी जेल डीएस चौहान ने मुजफ्फरनगर दंगे पर हाल ही में विधानसभा में टेबिल की गयी विष्णु सहाय रिपोर्ट पर प्रजेंटेशन दिया। उन्होंने कहा कि दंगे के दौरान सुभाष दूबे सिर्फ आठ दिन मुजफ्फरनगर में रहे। उन्होंने दंगा रोकने का पूरा प्रयास किया। ऐसे में उन्हें दंगे का दोषी कैसे ठहराया जा सकता है।

मीटिंग में इंस्पेक्टर प्रबल प्रताप सिंह का भी बचाव किया गया जिसे आयोग ने सुभाष दुबे के साथ दोषी ठहराया है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने सीएम से मुलाकात करने का फैसला किया है जिनसे मिलकर रिपोर्ट के बारे में बताया जाएगा और रिपोर्ट के आधार पर कोई एक्शन ना लेने की रिक्वेस्ट की जाएगी।

एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष प्रकाश डी ने बताया कि मीटिंग में सुभाष दूबे नहीं पहुंच सके। फिलहाल वह छुट्टी पर हैं। उन्होंने कहा कि एसोसिएशन ने आयोग की रिपोर्ट को अध्ययन के बाद पूरी तरह से खारिज कर दिया है। जल्द ही सीएम के सामने पूरी बात एसोसिएशन रखेगा।

बताते चलें कि मुजफ्फरनगर के कवाल में तीन लोगों की हत्या के बाद 27 अगस्त 2013 को मंजिल सैनी को हटाकर सुभाष दुबे को मुजफ्फनगर को एसएसपी बनाया गया था। उन्होंने 28 अगस्त की शाम जॉइन कर लिया। 12 दिन बाद 9 सितंबर को उन्हें हटाकर डीजीपी मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया। छह दिन बाद 15 सितंबर को उन्हें निंलंबित कर दिया गया। दंगा चार जिलों मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर, व बागपत में हुआ था। इसलिये सिर्फ एक को ही दोषी ठहराया जाना ठीक नहीं है। यही नही आयोग ने अपनी रिपोर्ट में व तत्कालीन प्रमुख सचिव गृह आरएम श्रीवास्तव ने अपने बयान में सुभाष दुबे के दोष का उल्लेख नहीं किया।


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