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INSPIRING: पत्नी के प्रेम में हुआ ऐसा दीवाना कि खोद दिया 25 फीट गह्ररा कुआं

 Anurag Tiwari |  2016-05-24 05:39:16.0

MP Kuana-1सागर. इतिहास गवाह है कि पत्नी प्रेम और उसके चलते उलाहने के चलते संत तुलसीदास और कालिदास ने कालजयी ग्रंथों की रचना की है. ऐसा ही एक और उदाहरण अब कलियुग में देखने को को मिला है. इससे पहले झारखण्ड के दशरथ मांझी ने पहाड़ का सीना चीरकर सड़क बना दिया था ताकि शहर आने जाने की दूरी कम हो सके. बुंदेलखंड के किसान ने भी मांझी की तरह ही जूनून में ठान लिया और पत्नी को मिलने वाले तानों से परेशान होने के बजे पोइतिवे एप्रोच के साथ सूखी धरती को चीरकर पानी का इंतजाम कर दिया.


पत्नी का पर्यावरण प्रेम देख कुआं खोद दिया

एमपी के सागर जिले में पत्नी का पर्यावरण प्रेम देख किसान चैन सिंह लोधी ने 25 फुट गहरा कुआं खोद दिया। लोगों ने जब उसकी पत्नी को पौधे सींचने के लिए हैंडपंप या कुएं से पानी नहीं भरने दिया, तब उसने कुआं खोदने की ठान ली। दो माह कठिन परिश्रम कर उसने पत्नी की खातिर कुआं खो दिया। इस सूखे के समय में कुएं से निकले पानी से वह अपनी पत्नी के साथ मिलकर पेड़ों की सिंचाई कर रहा है। पानी के मामले में यह दंपति अब आत्मनिर्भर हो गया है।
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पेड़ों की सिंचाई को लेकर मिला उलाहना

यह दम्पति सागर जिले की हंसुआ गांव का रहने वाला है । चैन सिंह और उसकी पत्नी बिरमा ने अपने घर के आसपास कई पेड़ लगा रखे हैं। इन पेड़ों को वे नियमित रूप से सींचते आ रहे हैं। एक दिन बिरमा हैंडपंप पर पानी भरने गई तो वहां मौजूद कुछ महिलाओं ने उससे कहा कि 'लोगों को तो पीने पानी नहीं मिल रहा और तुम पेड़ों में डालकर पानी बर्बाद कर रही हो?'

दो महीने लगे 25 फीट गहरा कुआं खोदने में

चैन सिंह बताते हैं कि पत्नी ने महिलाओं द्वारा कही बात उसे बताई, तभी उसने ठान लिया था कि अब वह अपनी मेहनत से कुआं खोदेंगे। चैन सिंह के मुताबिक, उसने लगभग दो माह के श्रम से 15 फुट चौड़ा और 25 फुट गहरा कुआं खोद दिया है। इसके लिए उसने नीचे उतरने के लिए रस्सी में लकड़ियां फंसाकर सीढ़ी बनाई और सब्बल व अन्य औजारों के बल पर उसने यह कुआं खोदा है।



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कई बार हुए घायल

मेहनती किसान बताता है कि कुएं के अंदर से मलबा बाहर लाने की कोशिश में वह घायल भी हुआ, मगर उसने हिम्मत नहीं हारी। अब कुएं से पानी निकल आया है तो उसे इस बात का संतोष है कि उसकी मेहनत सफल रही और अब कुएं के पानी से अपने पेड़ों की सिंचाई कर पा रहा है। चैन सिंह के पिता अमान सिंह का कहना है कि कुआं खोदते समय उनके बेटे को कई दफा चोट लगी, इस पर उन्होंने चैन सिंह को समझाया भी कि वह यह सब छोड़ दे, क्योंकि पानी निकलने वाला नहीं है। उसके बाद भी चैन सिंह ने हिम्मत नहीं हारी और आज उसकी मेहनत रंग लाई तथा कुएं से पानी निकल आया है।

घरवाली भी खुश

चैनसिंह की पत्नी बिरमा भी इस बात से खुश है कि उसके पति ने उसकी पेड़ों की सिंचाई की इच्छा पूर्ति के लिए गांव वालों ने पानी नहीं भरने दिया तो कुआं ही खोद दिया। अब वह कुएं के पानी से अपने घर के पेड़ों की सिंचाई कर रही है।सागर जिला बुंदेलखंड क्षेत्र में आता है और यहां भी पानी को लेकर मारामारी है। जलस्रोत सूख गए हैं, कई-कई किलोमीटर का रास्ता तय करके पानी लाना पड़ रहा है। ऐसे में जब चैन सिंह की पत्नी ने पौधों की सिंचाई की तो उसका विरोध हुआ।

सरकारी मशीनरी को दिखाया आइना
गांव के काशीराम का कहना है कि चैन सिंह ने बगैर प्रशासनिक मदद के यह काम कर दिखाया है और वह इस कुएं को गहरा किए जा रहा है। जब उसने काम शुरू किया था, तब ऐसा लगता नहीं था कि कुएं में पानी आएगा, उसकी मेहनत रंग लाई और कुएं में पानी आ गया। सूखाग्रस्त बुंदेलखंड में चैन सिंह उस सरकारी मशीनरी को आईना दिखाया है, जो पानी की अनुपलब्धता का लगातार बहाना करती आ रही है। कहते भी हैं, नेक इरादे वालों की भगवान भी मदद करता है। चैन सिंह के साथ भी ऐसा ही हुआ है। (आईएएनएस)

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