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इंदिरा गांधी पेयजल योजना: पाइपलाइन में 25 साल से नहीं टपकी पानी की बूंद

 Vikas Tiwari |  2016-10-09 08:03:23.0

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बांदा: सूखे और अकाल के लिए हमेशा बुरी खबरों में रहने वाले बुंदेलखंड के बांदा जिले में तिन्दवारी ब्लाक के कबीर नगर मोहल्ले में पिछले 25 सालों से बिछी पानी की पाइपलाइन में आज तक पानी की एक बूंद भी नहीं टपकी है। इस मोहल्ले के अधिकांश निवासी दलित हैं। स्थानीय निवासी चन्द्र प्रकाश वर्मा कहते हैं, "इंदिरा गांधी पेयजल योजना जब शुरू हुई थी तो उस समय पाइपलाइन तो बिछ गई, पर उसमें पानी आज तक नहीं आया।


इसके पीछे का कारण हमें नहीं पता। हमने 2012, 2014 और 2016 में आवेदन दिया था, जिस पर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है। कई लोगों से कह चुके हैं, सभी कहते हैं कि ऊपर बात करो।" कबीर नगर निवासी लल्लू कहते हैं, "पाइपलाइन में 25 सालों से पानी नहीं आया। यहां के लोगों में गुस्सा है।"


एक अन्य स्थानीय निवासी, किरण गुस्से में कहती हैं, "कभी पानी नहीं आया। हमें पानी लेने के लिए दूर जाना पड़ता है और कभी सरकारी नल खराब हो जाए तो दो-दो महीने तक पानी नहीं मिलता है।"


गृहिणी शकुंतला वर्मा कहती हैं, "जब हम पानी नहीं आने का कारण पूछते हैं तो जल विभाग वाले पानी नहीं चढ़ने की बात कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं, जबकि हमारे आस-पास के इलाकों में पानी आता है।"


वह आगे बताती हैं, "कुछ लोगों के अपने नल लगे हैं, जिनमें से लोग पानी भरकर लाते हैं। पर वे लोग भी कुछ को गाली देते हैं तो कुछ को भरने देते हैं। ये नल मालिक के साथ लोगों के व्यवहार पर निर्भर करता है। हमने कई जगहों पर आवेदन दिया और बड़े अधिकारियों ने हमें रसीद भी दी, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ। यहां कुछ अमीर लोगों ने तो खुद के नल लगा लिए हैं, पर गरीब तबके के लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरसते हैं।"


60 साल की सुदामा कहती हैं, "सरकारी नलों से पानी लाती हूं, पर इनमें भी पानी मुश्किल से ही आता है। जब इन पाइपों में पानी देने की बात करते हैं तो पैसे की बात आ जाती है। हम इतने अमीर तो नहीं हैं कि पैसे दे सकें, इसलिए चुपचाप बैठ जाते हैं।"


लेकिन मोहल्ले की वार्ड पार्षद को पानी की इस समस्या की जानकारी नहीं है। पार्षद रानो कहती हैं, "हमें कोई जानकारी नहीं हैं। हमारे पास हैण्डपम्प का प्रस्ताव आया था, जो लगा दिए गए हैं।"


जल विभाग के वरिष्ठ लिपिक धनंजय श्रीवास्तव ने कहा, "वह पतली पाइप लाइन है, जिसके कारण पानी नहीं पहुंच पा रहा है। पानी पहुंचाने के लिए वहां एक ट्यूबवेल लगाना पड़ेगा।"


साधारण से दिखने वाले कबीरनगर में दलित जाति के चमार और कोरी समुदाय के लोग रहते हैं। ज्यादातर लोग यहां मजदूरी करते हैं और मोहल्ले के सभी लोग रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले पानी के लिए सरकारी हैण्डपम्प पर निर्भर हैं। कई हैण्डपम्प की हालत खराब है। कबीर नगर सरकारी कामकाज में देरी का एक उदाहरण बन चुका है।

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