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वैश्विक लैंगिक विषमता सूची में भारत की शानदार तरक्की

 Vikas Tiwari |  2016-10-26 17:26:45.0


global gender inequality index

नई दिल्ली. विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की ओर से बुधवार को जारी वैश्विक लैंगिक विषमता सूचकांक में भारत ने एक वर्ष के भीतर 21 स्थानों की शानदार तरक्की की है। भारत एक वर्ष पहले इस सूची में 108वें स्थान पर था, जबकि ताजा सूची में 87वें पायदान पर पहुंच गया।

दक्षिण एशियाई देशों में भारत इस मामले में दूसरे स्थान पर है, जबकि बांग्लादेश पहले स्थान पर है।

डब्ल्यूईएफ की ताजा वार्षिक रिपोर्ट में हालांकि कहा गया है कि 'स्वास्थ्य और जीवन प्रत्याशा' के मामले में भारत अभी भी काफी पीछे है। इस मामले में भारत वैश्विक सूची में नीचे से तीसरे या कुल 142वें पायदान पर है।


महिलाओं की अर्थव्यवस्था में भागीदारी के मामले में भारत 136वें और महिला शिक्षा के मामले में 113वें पायदान पर है।

डब्ल्यूईएफ की रिपोर्ट में कहा गया है, "भारत ने इस वर्ष समान वेतन और शिक्षा हासिल करने के सभी उप-सूचकांकों में लैंगिक अंतर को पाटने में तेज प्रगति की है। भारत ने इस दौरान प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर शिक्षा हासिल करने में लैंगिक अंतर को पूरी तरह खत्म कर दिया है।"

हालांकि भारत में अभी महिलाओं की अनुमानित कुल आय के मामले में गिरावट आई है और स्वास्थ्य एवं जीवन प्रत्याशा में विद्यमान लैंगिंक विषमता में भारत पिछले एक दशक में सबसे कम प्रगति करने वाला देश है।

इस मामले में दक्षिण एशियाई क्षेत्र सब-सहारा अफ्रीकी क्षेत्र से भी पीछे है, हालांकि मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका से बेहतर स्थिति में है।

दक्षिण एशियाई देशों में पाकिस्तान में लैंगिक विषमता सर्वाधिक है, जबकि इस मामले में भूटान नीचे से दूसरे स्थान पर है।

रिपोर्ट के अनुसार, "दक्षिण एशिया में लैंगिक विषमता का औसत अनुपात 33 फीसदी है और इस मामले में वह इस वर्ष वैश्विक लैंगिक विषमता सूचकांक में सबसे कम तरक्की करने वाला दूसरा क्षेत्र है। मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका इस मामले में सबसे पीछे हैं।"

बांग्लादेश और भारतक दक्षिण एशियाई क्षेत्रों में सबसे आगे हैं। बांग्लादेश में यह अनुपात जहां 70 फीसदी रहा, वहीं भारत 68 फीसदी के साथ क्षेत्र में दूसरे स्थान पर है।

रिपोर्ट में कहा गया है, "दक्षिण एशिया में ऐसा कोई देश नहीं है जिसने शिक्षा हासिल करने में लैंगिक विषमता को पूरी तरह समाप्त कर दिया हो तथा श्रीलंका एकमात्र ऐसा देश रहा जिसने स्वास्थ्य एवं जीवन प्रत्याशा के मामले में लैंगिक विषमता को पूरी तरह खत्म करने में सफल रहा है।"

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