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रिज़र्व बैंक की सहमति बनी, अब भारत में खुल सकते हैं इस्लामिक बैंक

 Sabahat Vijeta |  2016-11-20 13:00:40.0

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नई दिल्ली. भारत में ब्याज मुक्त बैंकिंग शुरू करने के लिये भारतीय रिज़र्व बैंक ने पारम्परिक बैंकों में 'इस्लामिक विंडो' खोलने का प्रस्ताव रखा है. बैंकों में इस्लामिक विंडो खोले जाने की मांग पिछले कई साल से चलती आ रही है. दरअसल इस्लाम में ब्याज को हराम माना जाता है.


पिछले कई साल से भारत में इस्लामिक बैंक खोले जाने की मांग हो रही है. यह मांग रिज़र्व बैंक से भी हो रही है और केन्द्र सरकार से भी. इस्लामिक बैंक खोले जाने के दो मकसद हैं पहला तो यह कि इससे बहुत से ऐसे लोगों को बैंकों में रोज़गार हासिल हो जाएगा जो अब तक फाइनेंशल सिस्टम से दूर हैं दूसरे इस बैंक में जमा होने वाले धन से मिलने वाले ब्याज से गरीब तबके के लोगों को ज़रुरत पड़ने पर ब्याज मुक्त ऋण भी दिया जा सकेगा.


शरई कानून के मुताबिक ब्याज मुक्त बैंकिंग पर रिज़र्व बैंक की इस पहल से एक नई पहल होने की संभावना बढ़ी है. वित्त मंत्रालय को लिखे पत्र में रिज़र्व वैंक ने कहा है कि भारत में क्रमबद्ध तरीके से इस्लामिक बैंकिंग शुरू की जा सकती है.

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