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बाढ़ प्रभावित इलाकों में दूसरे इलाकों के डाक्टर करेंगे इलाज

 Sabahat Vijeta |  2016-07-20 13:56:15.0


  • shivpal-floudशिवपाल सिंह यादव ने की बाढ़ नियंत्रण बचाव एवं राहत कार्यों की समीक्षा 

  • बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अधिकारी रुक कर बचाव एवं राहत कार्यों को संचालित करें

  • संवेदनशील एवं अतिसंवेदनशील बन्धों का नियमित निरीक्षण किया जाये

  • जिलाधिकारी तत्काल सिंचाई विभाग की जमीनों पर से अतिक्रमण हटवायें : शिवपाल सिंह यादव


लखनऊ. उत्तर प्रदेश के सिंचाई मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने अधिकारियों को निर्देेश देते हुए कहा कि बाढ़ प्रभावित जिलों में बाढ़ नियंत्रण, बचाव व राहत कार्य प्रभावी ढंग से चलाकर जनजीवन को सुरक्षित करना हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी, मुख्य अभियन्ता, सिंचाई के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का भ्रमण कर स्थिति का जायजा लें और मौके पर रुक कर राहत और बचाव कार्य संचालित करायें। श्री यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि बाढ़ प्रभावित जनपदों में सीएससी, पीएससी पर अन्य स्थानों से चिकित्सक तैनात करें। उसी तरह पशु चिकित्सालयों में गला घोंटो व खुरपा बीमारियों के बचाव की कारगर उपाय सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि व्यापक टीकाकरण एवं दवा की उपलब्धता आवश्यकतानुसार बनाये रखें।




सिंचाई मंत्री शिवपाल सिंह यादव आज योजना भवन लखनऊ में बाढ़ प्रभावित जनपदों के जिलाधिकारियों, सिंचाई विभाग के अभियन्ता तथा राजस्व विभाग के अधिकारियों के बाढ़ तैयारी की समीक्षा कर रहे थे। श्री यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि विद्युत विभाग के कोल स्थाई बनवाये जायें तथा ऐसी व्यवस्था की जाये कोई भी तार टूट कर न लटके जिससे की बाढ़ के दौरान करन्ट फैलने की सम्भावना न रहे। उन्होेंने अधिकारियों को निर्देश दिये कि संवेदनशील व अतिसंवेदनशील बांधो का नियमित रूप से निरीक्षण कराया जाये तथा बाढ़ चौकियों की भी लगातार निगरानी की जाये। श्री यादव ने कहा कि इटावा और मैनपुरी में सेंगर, सिरसा आदि नदियों को गहरा करके बाढ़ की समस्या से छुटकारा मिला है। इसी तरह अन्य नदियों की सिल्ट निकालकर उन्हें गहरा करने की आवश्यकता है। ड्रेन व नहरों के सक्रैप साफ कराकर अतिरिक्त पानी का करेें डायवर्जन। बाढ़ और सूखा नियंत्रण की कार्ययोजना मार्च-अप्रैल में बनाकर समय से क्रियान्वयन कराकर इन समस्याओं से बचा जा सकता है। नदियों की सफाई कराकर उन्हें गहरी बनाना बाढ़ और सूखा समस्या का स्थाई समाधान है । वर्षा के समय अतिरिक्त पानी संचित करने से जहाॅं एक तरफ बाढ़ की विभीशिका से बचाव होगा वहीं संचित पानी जरूरत के समय सिंचाई के काम आयेगा। सिंचाई मंत्री ने निर्देश दिये कि नहरों व सिंचाई विभाग की जमीन पर हो रहें अतिक्रमण को भी जिलाधिकारी विभागीय अधिकारियों के सहयोग से अतिक्रमण मुक्त कराने का चलायें अभियान। उन्होंने कहा कि उ.प्र. सरकार ने अपने दम पर पिछले चार सालों में बाढ़ राहत और बचाव का कार्य किया है। केन्द्र सरकार ने प्रदेश सरकार का 122 करोड़ रूपये बकाया नही दिया।



मुख्य सचिव दीपक सिंघल ने कहा कि बाढ़ प्रभावित जनपदों के जिला अधिकारी के मार्गदर्शन में हरदम अलर्ट रहें। उन्होंने कहा कि बाढ़ नियंत्रण राहत एवं बचात कार्य में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के विरूद्व कठोरतम कार्यवाही की जायेगी। श्री सिंघल ने कहा कि किसी भी कीमत पर जनहानि/पशुहानि नहीं होनी चाहिए। उन्होने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस लाइन के अलावा अन्य सुरक्षित स्थानों पर हेलीपेड तैयार करायें जाये जिससे की हवाई आपरेशन के दौरान उनका प्रयोग किया जा सके। बस्ती, बाराबंकी के जिलाधिकारियों से सबक लेकर अन्य अधिकारी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का करें सघन निरीक्षण करें तथा बाढ़ चौकियों पर काॅल सेण्टर भी स्थापित किये जायें। श्री सिंघल ने कहा कि मीडिया से निरन्तर सम्पर्क हेतु जिलाधिकारी नोडल अफसर की तैनाती करें जो सूचना विभाग के सहयोग से प्रिंट एवं इलेक्ट्राॅनिक, डिजीटल और सोशल मीडिया से नियमित सम्पर्क करते रहें।


समीक्षा के दौरान डीजीपी, प्रमुख सचिव गृह, प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य, प्रमुख सचिव, पशुपालन, सचिव राजस्व/ राहत आयुक्त अनिल कुमार तृतीय आदि ने अपने विचार व्यक्त किये। जिलाधिकारी बाराबंकी, बस्ती, गोण्डा, बहराईच, बिजनौर, रामपुर, बलरामपुर आदि ने अपने अनुभव शेयर किये । प्रमुख सचिव, सिंचाई ने समीक्षा बैठक का संचालन किया ।

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