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मोदी सरकार से सहकारी बैंकों का अस्तित्व खतरे में

 Sabahat Vijeta |  2016-11-15 13:26:59.0

शिवपाल


लखनऊ. केन्द्र सरकार ने उत्तर प्रदेश के सहकारी बैंकों पर पुराने 500 व 1000 के नोटों को बदलने व निकालने की अनुमति ना देकर जहां सहकारी बैंकों का अस्तित्व ही खतरे में डाल दिया है वहीं इससे किसानों को भंयकर कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्र के किसानों का अधिकांशत: गांव देहात के बैंकों में ही खाता होता है। गांवों से दूर शहरों में जाकर बड़े बैंकों में पैसा जमा कराना किसानों के लिए बड़ा जोखिम भरा काम होता है। सहकारी बैंकों का गठन ही किसानों व ग्रामीण जनता की सुविधा के लिए किया गया था लेकिन केन्द्र की मोदी सरकार ने इनके अस्तित्व पर ही प्रश्न चिन्ह लगा दिया है।


इस समय वैसे भी रबी की फसल बुआई का समय है। किसान को फसल लगाने के लिए बीज व खाद आदि के लिए पैसों की जरुरत है लेकिन केन्द्र सरकार के धन निकासी पर रोक लगाने से किसान के सामने यह संकट खड़ा हो गया है कि वह आखिर वह फसल की बुआई बिना बीज व खाद कैसे करेगा।


मोदी जी ने हरियाणा में जहां उनकी पार्टी की सरकार है वहां के सहकारी बैंकों को तो पुराने नोटों को जमा करने व नये नोट निकालने की अनुमति दी है लेकिन उत्तर प्रदेश जैसे विशाल जनसंख्या वाले खासतौर पर किसानों वाले प्रदेश में सहकारी बैंकों को पुराने नोटों को बदलने की अनुमति न देकर किसानों पर कुठाराघात किया है। मोदी सरकार प्रदेश की जनता के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। उत्तर प्रदेश का किसान भारतीय जनता पार्टी की केन्द्र सरकार को कभी माफ नहीं करेगा।


भारतीय जनता पार्टी की केन्द्र सरकार के इस फैसले से साजिश की बू आ रही है क्योंकि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव निकट हैं। क्या मोदी जी उत्तर प्रदेश के किसानों को चोर समझते हैं, मोदी जी को उत्तर प्रदेश के किसानों पर भरोसा नहीं है। किसान मेहनत मजदूरी कर जहां अपने परिवार को पालता है वहीं देश भर के लोगों का पेट भरने का भी काम करता है लेकिन भारतीय जनता पार्टी और मोदी जी को शायद यह पता नहीं है। उत्तर प्रदेश का किसान भारतीय जनता पार्टी को इस बार चुनाव में सबक सिखा देगा।

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