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मैं और तेरा चला जाए तो माया समाप्त हो जाये : मोरारी बापू

 Sabahat Vijeta |  2016-12-02 13:26:22.0

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लखनऊ. जय जय श्री रामचंद्र, अवध के दुलारे। अवध के दुलारे प्यारे, जय रघुबर लाल की।' जैसे भजनों के साथ संत मोरारी बापू की रामकथा के छठवें दिन भगवान राम जन्मे। जिसका उल्लास श्रद्धालुओं ने पूरे भक्तिभावना के साथ मनाया। अपने निराले अंदाज में उन्होंने जीवन जीने के रहस्यों बहुत ही खूबसूरती और आसान उदाहरणों से बयां किया।


सीतापुर रोड स्थित सेवा अस्पताल में श्री रामकथा में मोरारी बापू ने माया की चर्चा करते हुए कहा कि मैं और मेरा, तू और तेरा इसी को माया कहते हैं। हमारे जीवन में मैं और तेरा चला जाए तो माया समाप्त। उन्होंने एक कहानी की जिक्र करते हुए बताया कि 'कोई महात्मा जनक के यहां ठहरे। नदी के किनारे जनक और महात्मा टहल रहे थे और माया पर चर्चा चल रही थी। इतने में महल में आग लग गयी, राजा टहलता रहा, साधु भागा लौट कर आया तो जनक ने पूछा महल मेरा जला आप क्यूं भागे। बोले महल तेरा जला लंगोटी मेरी सूख रही थी। जनक बोले यही माया है तू और तेरा, मैं और मेरा।' भक्तों ने भी इस कहानी का खूब लुत्फ उठाया। जीवन में वैराग्य कैसे आए इसकी व्याख्या करते हुए

उन्होंने कहा कि धर्म से आएगा वैराग्य, धर्म सत्य है और जो सत्य का पालन करता है उसे वैराग्य आएगा ही। दुनिया बिगड़ी संग दोष से संत मोरारी बापू ने युवाओं से अपील की कि भले ही संत का संघ न करो लेकिन कुसंग का साथ नहीं होना चाहिये। उन्होंने कहा दुनिया बिगड़ी भी संग दोष से है इसको संत संग से ही सुधारा जा सकता है।


राजयोगी भरतृहरि वैराग्य शतक के रचैयिता श्मशान में बैठे थे। कुछ लोग अपने परिजन का दाह संस्कार करके गए भरतृहरि भूखे थे वहीं श्मशान में कुछ चावल आदि एकत्र करके मिट्टी के बर्तन में उसी चिता अग्नि पर खिचड़ी पकायी शिवजी उधर से निकले तो पार्वती ने कहा क्या बैरागी है इतना बड़ा सम्राट और यह वैराग्य। शिवजी ने कहा जल्दी मत कर आ परीक्षा लें। ब्राह्मणवेश बना कर उनसे भिक्षा माँगने को पहुँच गए।भरतृहरि ने वह खिचड़ी ब्राह्मण को दे दी। भरतृहरि जल पीकर भूख शांत करने लगे तो शिव जी ने वह भी माँग लिया।


पार्वती ने इशारे से कहा अब तो मान लीजिए ऐसा वैरागी इस संसार में कोई नहीं। शिवजी ने फिर कहा जल्दी मत कर। शिवजी ने भरतृहरि से कहा पूरा मत दो, कुछ रख लो तो भरतृहरि के मुख से निकल गया कि मैंने पूरा मालवा का राज्यत्याग कर दिया आप उतना इतना रखना की बात करते हैं। शिवजी ने पार्वती को कहा देखो अभी इसे याद है कि इसने सम्राट पद का त्याग किया इसलिए अभी तक यह परम बैरागी नहीं है। तीन प्रकार की जिसमें अज्ञानता वह जीव है, जो माया को नहीं जानता, जो ईश्वर को नहीं जानता, जो स्वयं को नहीं जानता। जीव, जगत और जगदीश इसको जीवनपर्यंत जो न जान पाया वह जीव है। बंधमोक्षपर सर्वपर - वह परमात्मा है, निर्ममों - निर्हंकारः – भगवद्गीता।

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