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BHU कैंपस के बाद शहर की सडकों पर दौड़ेंगे Hydrogen से चलने वाले ऑटो रिक्शा

 Anurag Tiwari |  2016-12-16 13:13:21.0

[caption id="attachment_141551" align="aligncenter" width="1024"]Varanasi, वाराणसी, बीएचयू, BHU, Hydrogel Fuel, Auto Rickshaw, Hydrite साल 2012 में दिल्ली में आयोजित ऑटो-एक्सपो में प्रदर्षित हाइड्रोजन चालित ऑटो-रिक्शा[/caption]

तहलका न्यूज ब्यूरो

वाराणसी. महादेव की नगरी देश का पहला शहर होगा जहां जल्द हाइड्रोजन से चलने वाले ऑटो रिक्शा सडक पर दौड़ते नजर आएंगे. इससे न केवल कीमती पेट्रोलियम पदार्थों के प्रयोग में कमी आएगी बल्कि प्रदूषण पर भी लगाम लगेगी. ख़ास बात यह है कि इस टेक्नोलॉजी को बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी ने डेवलप किया है.


इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए हाइड्रोजन से चलने वाले 50 ऑटो-रिक्शा चेन्नई स्थित टीवीएस ग्रुप देगा, जो जल्द ही वाराणासी पहुंच जाएंगे. इन ऑटो रिक्शा में नई टेक्नोलॉजी वाले फ्यूल टैंक्स लगे होंगे जो हाइड्रोजन फ्यूल को हाइड्राइड के रूप में स्टोर करेंगे. हाइड्रोजन सामान्य ताप पर तुरंत गैस के रूप में कन्वर्ट हो जाती है है इसलिए इसे हाइड्राइड की रूप में फ्यूल टैंक्स में स्टोर किया जाएगा. ऑटो-रिक्शा जब स्टार्ट होंगे तो यही हाइड्राइड हाइड्रोजन में कन्वर्ट होकर ईंधन का काम करेगा.

यह भी: यूपी की पहली प्लास्टिक सड़क बनेगी काशी में, प्रोजेक्ट पर काम हुआ शुरू


बीएचयू के सेंटर फॉर हाइड्रोजन एनर्जी के हेड ओएन श्रीवास्तव के मुताबिक़ बीएचयू स्थित यह सेंटर इस तकनीक पर पिछले एक दशक से काम कर रहा था. इस सेंटर ने मिनिस्ट्री ऑफ़ न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी और डिपार्टमेंट ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी द्वारा चलाए जा रहे विभिन प्रोजेक्ट्स में इस टेक्नोलॉजी का प्रदर्शन कर चुके हैं.

इस प्रोजेक्ट के तहत बने 5 ऑटो रिक्शा बीएचयू कैंपस में पहले से ही चलाए जा रहे हैं. एक बार हाइड्राइड फ्यूल से टैंक भरे जाने के बाद एक ऑटो 70-80 किलोमीटर चलता है. ओएन श्रीवास्तव के अन्सुआर हाइड्रोजन गैस फॉर्म में होता है इसलिए उसे स्टोर करना कठिन है. सेंटर फॉर हाइड्रोजन एनर्जी अब ऐसी तकनीक पर काम कर रहा है ताकि नानो टेक्नोलॉजी के प्रयोग से हाइड्रोजन को और प्रभावी तरीके से स्टोर किया जा सके.

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