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पति निकला HIV पॉजिटिव, बेटों साथ मिल फेंका सड़क पर, डॉक्टर बने देवदूत

 Anurag Tiwari |  2016-09-02 05:19:44.0

HIV, AIDS, Patient, Hallet Hospital, Stigma, Desertedतहलका न्यूज ब्यूरो

कानपुर. एचआईवी संक्रमित लोगों का परिवार और समाज किस तरह तिरस्कार करता है, इसकी बानगी कानपुर में देखने को मिली. यहाँ एचआईवी संक्रमित पति पत्नी अपने बेटों के साथ मिलकर सड़क पर फेंक चलती बनी. अब अस्पताल में पीड़ित के लिए बिलकुल अनजान डॉक्टर और वार्डबॉय फ़रिश्ता बने हुए हैं.

पत्नी उसे इलाज के बहाने अस्पताल ला रही थी, उसी दौरान उसने पति को बेहोशी की हालत में जंगल में फेंका और चलती बनी. जब आसपास के लगों ने इस व्यक्ति को जंगल में अकेला पड़ा पाया तो पुलिस को सूचना दी. पुलिस ने इस युवक को हैलट अस्पताल में भर्ती कराया. अस्पताल में इलाज के बाद जब उसे होश आया तो उसने अपने साथ हुई ज्यादती की कहानी बयां की.


पीड़ित ने बताया कि वह फतेहपुर के पटेल नगर का रहने वाला है और और बीते सालों से कानपुर के कल्याणपुर इलाके में रहकर प्राइवेट नौकरी करता है. उसकी पत्नी तीन बेटों के साथ फतेहपुर में ही रहती है. करीब दो हफ्ते जब उसकी तबियत खराब हुई तो देख-रेख के लिहाज से फतेहपुर अपने घर चला गया.

जब फतेहपुर में स्थानीय डाक्टरों ने इलाज शुरू किया तो उसी दौरान इस बात का पटा चला कि वह एचआईवी से संक्रमित है. इसके बाद उसकी पत्नी ने उसे इलाज के लिए कानपुर चलने के लिए कहा और बच्चों के साथ पीड़ित को कानपुर ले आई. पीड़ित के मुताबिक रास्ते में वह बीमारी के कारण बेहोश हो गया तो उसकी पत्नी उसे किदवई नगर पेट्रोल पंप के पास सुनसान जगह पर फेंक कर चलती बनी.

पत्नी और बच्चों के तिरस्कार से इतना दुखी है कि वह डॉक्टरों से अपनी मौत की भीख मांग रहा है. पीड़ित का कहना है कि जब उसके अपने बच्चे और पत्नी ने साथ छोड़ दिया तो समाज में भी उसे तिरस्कार ही मिलेगा और ऐसी जिल्लत भरी जिंदगी जीने से बेहतर है उसका मर जाना है. डाक्टरों ने पीड़ित के घर के पते अस्पताल के के एक कर्मचारी को भेजा भी लेकिन उसकी पत्नी अस्पताल आकर उसकी तीमारदारी करने को तैयार नहीं हुई.

पीड़ित के पाँव में चोट की सड़न देखकर जब जूनियर डॉक्टर्स ने उसका टेस्ट कराया तो उसके एचआईवी पॉजिटिव होने का पटा चला. जूनियर डॉक्टरों ने उसके पैर के ऑपरेशन के लिए स्पेशल किट अपने पैसों से मंगाई और तब उसका किया. डाक्टर के मुताबिक़ कि मरीज को सही इलाज दिया जा रहा है, लेकिन परिवार के सदस्य न होने के चलते उसे समय से दवाइयां खिलाने और उसको नित्यक्रिया कराने में परेशानी का सामना करना पड़  रहा है. पीड़ित के दोनों हाथ काम न करने के चलते वार्डबॉय उसे दोनों समय का खाना खिला रहे हैं. डॉक्टरों का मानना है कि अगर उसे सही से खाना  और दवाइयां न मिलीं तो मरीज का बचना मुश्किल है.

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