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नोटबंदी: दाह संस्‍कार के लिए किसान के पास नहीं बचे पैसे, शव लेकर पहुंचे बैंक

 Girish Tiwari |  2016-11-22 06:04:32.0

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तहलका न्‍यूज ब्‍यूरो
अमरोहा:
नोटबंदी के बाद आम से लेकर खास हर कोई परेशान है। 500 और 1000 नोट के बंद होने के बाद स्थितियां बिगड़ गई हैं। नोटबंदी से यूपी के कई कस्‍बों और गांवों में अब भी हालात सामान्‍य नहीं हुए हैं। कैश की कमी ने ग्रामीण जनजीवन को हिलकार रख दिया है। हालात यहां तक पहुंच चुके हैं कि लोगों के पास अ‍ंतिम संस्‍कार तक के पैसे नहीं है।


अमरोहा के जाेया कस्‍बे के हरासपूरा गांव में एक किसान परिवार की महिला लखबीरी की मौत हो गई। उसके परिवार के पास पुराने नोट थे, पर वे सब बंद हो चुके हैं। परिवार के पास दाह संस्‍कार तक के पैस नहीं बचे थे। परिवारीजन सोमवार को महिला का शव लेकर ट्रैक्‍टर से हाईवे किनारे स्थित एसडीएफसी बैंक पहुंंच गए। अफसरों से कहा कि हमारे पास बिल्‍कुल पैसे नहीं है। जो पुराने नोट हैं वो चल नहींं रहे। अब तक पैसा नहीं मिलेगा, हम नहीं जाएंगे।


बैंक वालों ने एटीएम से पैसे निकालने को कहा। तब उनके घर का एक सदस्‍य एटीएम की लाइन में लगा। लोगों से अनुरोध भी किया, लेकिन उसे आगेे नहीं जाने दिया। अाखिरकार तीन घंटे की मशक्‍कत के बाद वे दो हजार रुपए निकाल सके। देर रात ब्रजघाट में लखमीरी का अंतिम सस्‍ंकार किया।


भतीजे महतार ने बताया कि लखबीरी बुखार से पीडि़त थी। कुछ दिन पहले उन्‍हें अमरोहा के प्राइवेट अस्‍पताल में भर्ती कराया था। इसी बीच नोटबंदी का फैसला आ गया। घर वाले नए नोट के लिए कभी बैंक तो कभी एटीएम के चक्‍कर लगाते काफी दिक्‍कतों के बाद जो नए मिलते, उससे इलाज कराते। पर पैसा इलाज के लिए पर्याप्‍त नहीं हुआ और रविवार रात उनकी मौत हो गई।

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