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मात्र भागवत् सुनकर भी पाई जा सकती है गोविन्द की कृपा

 Sabahat Vijeta |  2016-11-14 14:22:04.0

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श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ राजाजीपुरम का समापन

लखनऊ. अंतिम दिन भागवत् कथा सुनने का महात्म्य इतना है कि भागवतप्रेमी भक्त अगर श्रद्धा से उसे आखिरी दिन सुन लें तो उसे पूरे सप्ताह कथा सुनने के बराबर पुण्य अर्जित हो जाता है। व्यास पीठ से यह संदेश वृन्दावन के श्रीपुरुषोत्तम रामानुजाचार्यजी महाराज ने आज श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ के अंतिम दिन ई-ब्लॉक सत्संग पार्क राजाजीपुरम में कथा का समापन करते हुए यहां बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं को दिया।


पिछले लगभग सात दशक में आज रात चन्द्रमा पृथ्वी के सबसे करीब था तो यहां सत्संग पार्क में दीपों की जगमग के बीच देव दीपावली मनाते भागवत् प्रेमियों को यूं लग रहा था कि जैसे स्वयं गोविन्द चन्द्रमा के रूप में उन्हें आशीर्वाद देने उनके बहुत निकट चले आए हों। श्रीपुरुषोत्तम महाराज ने हरि अंनंत हरि कथा अनन्ता...की उक्ति सामने रखते हुए कहा कि गोविन्द की यह भागवत कथा बगैर गोविन्द के, बगैर राधारानी की अनुकम्पा के न तो कही जा सकती है और न ही सुनी। जो वक्ता है वो मात्र बांस की बांसुरी है, उसके फूंक तो स्वयं आकर बांकेबिहारी ही भरते हैं।


रुक्मिणी विवाह से आगे गोविन्द के प्रथम पुत्र प्रद्युम्न की कथा कहते हुए व्यासजी ने प्रद्युम्न को साक्षात कामदेव का रूप बताते हुए उन्होंने कहा कि हमें इस मानव तन पर तनिक भी घमण्ड नहीं करना चाहिए, ये तन भी उन्हीं गोविंद का है और उन्हीं की कृपा से संचालित होता है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत भी कामदेव अर्थात महादेव की समाधि की भाषा में लिखा गया है वो भी इस तरह कि अगर इसके श्रद्धापूर्वक चिंतन मनन मात्र से ही समाधि लग जाएगी।


शिशुपाल वध की चर्चा करते हुए रामानुजाचार्यजी महाराज ने कहा कि गोविंद पर भरोसा करो तो पूरा करो वो ही तुम्हारी नइया पार लगा सकता है....और सिर्फ प्रभु पर ही नहीं, अपने आराध्य पर ही नहीं, जिस किसी पर भरोसा करो तो पूरा करो, तभी काज सफल होंगे। इसी तरह गोविन्द से प्रेम करो या किसी और से करो, पूरे सच्चे मन से करो तभी प्रेम को पाओगे, सच्ची भक्ति को पाओगे और गोविन्द को पाओगे। कथा समापन से पहले मुख्य यजमान के रूप में पूर्व सांसद कुसुम राय व राजेश राय ने बांकेबिहारी, व्यास पीठ और श्रीमद्भागवत की आरती उतारी। इससे पहले यहां पूर्णाहुति देकर हवन किया गया।

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