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गवर्नर ने एक साल में सीएम को लिखीं 398 चिट्ठियां

 Sabahat Vijeta |  2016-07-21 13:28:27.0

gov-2 yrsतहलका न्यूज़ ब्यूरो


लखनऊ. उत्तर प्रदेश के गवर्नर राम नाइक ने अपने कार्यकाल के दो साल पूरे होने पर राज्य के सामने अपनी जवाबदेही को सुनिश्चित किया. बीते दो सालों में मील के जो पत्थर उन्होंने पार किये उनका चर्चा तो उन्होंने किया ही साथ ही जिन मोर्चों पर उन्हें दर्द मिला उसका ज़िक्र करने से वह चूके नहीं. अपनी तारीफ़ उन्हें भी अच्छी लगती है कहकर उन्होंने यह बताने की कोशिश की कि वह भी इंसान हैं और उनकी भी भावनाएं हैं तो साथ ही जो संविधान सम्मत नहीं है उसे किसी भी सूरत में मंज़ूर नहीं करूंगा यह कहकर उन्होंने खुद को श्रेष्ठ प्रशासक के रूप में स्थापित किया.


राम नाइक ने 22 जुलाई 2014 को राज्यपाल के रूप में शपथ ली थी. कल उन्हें प्रधानमंत्री के साथ गोरखपुर में रहना है. इसीलिये उन्होंने एक दिन पहले ही राजभवन में पत्रकारों के सामने अपनी जवाबदेही सुनिश्चित करना ज़रूरी समझा. श्री नाइक ने बताया कि उन्हें उत्तर प्रदेश को संविधान सम्मत ढंग से संचालित करने की ज़िम्मेदारी दी गई है और दो साल से वह यही काम करते आ रहे हैं. यूपी में लोकायुक्त की नियुक्ति का मुद्दा उन्होंने उठाया. राज्य सरकार इस मुद्दे पर लापरवाही बरत रही थी. सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे का संज्ञान लिया और संजय मिश्र को यहाँ का लोकायुक्त बनाया.


एक सवाल के जवाब में गवर्नर ने कहा कि संविधान सम्मत ढंग से काम करने से कुछ लोगों को तात्कालिक नाराज़गी हो सकती है लेकिन यही वह रास्ता है जो फायदे का रास्ता है. संजय सेठ का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यूपी सरकार बार-बार उनका नाम एमएलसी के लिए भेजती रही और मैं बार-बार फ़ाइल लौटाता रहा. लोगों को नाराज़गी हुई होगी लेकिन संजय सेठ को तो फायदा ही हुआ. न सिर्फ वह राज्यसभा में गए बल्कि पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष भी बन गये.


आज़म खां का नाम आया तो गवर्नर ने कहा कि उन्हें व्यक्तिगत स्तर पर उनसे कोई दिक्क़त नहीं है लेकिन जिस तरह से सदन की गरिमा का ध्यान न रखते हुए अपने भाषण में गवर्नर के बारे में टिप्पड़ी की वह ठीक बात नहीं है. मैंने विधानसभा अध्यक्ष से विधानसभा कार्यवाही मंगाकर उसे पढ़ा और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से शिकायत भी की.


जब गवर्नर से यह पूछा गया कि आज़म खां को आपसे खतरा लगता है तो उन्होंने कहा कि मैं उन्हें आश्वस्त करता हूँ कि यूपी में उन्हें कोई खतरा नहीं है. वह यूपी से बाहर भी उन्हें बताकर जाएँ तो गृहमंत्री से कहकर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करा दूंगा.


गवर्नर ने कहा कि बीते दो सालों में यूपी के विकास के लिए रात-दिन काम किया. गवर्नर हाउस के दरवाज़े आम आदमी के लिए खोल दिये. बीते एक साल में राजभवन में 6682 लोगों से मुलाक़ात की. यूपी के मुद्दों पर राष्ट्रपति को 23 पत्र लिखे. प्रधानमंत्री को 55, उपराष्ट्रपति और अन्य केन्द्रीय मंत्रियों को 93 और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को 398 पत्र लिखे. लखनऊ में बतौर गवर्नर एक साल में 2004 कार्यक्रमों में शिरकत की.


अपने दो साल के कार्यकाल को पुस्तक के रूप में प्रकाशित कराकर आज उन्होंने उसका विमोचन भी किया. उन्होंने कहा कि यूपी की शिक्षा व्यवस्था के सुधार के लिए विश्वविद्यालयों में सुधार कर रहे हैं. मेट्रो की रेलिंग खतरनाक हो सकती थी उसे बदलवाया. लखनऊ में जगह-जगह बने खतरनाक स्पीड प्रकार तुडवाये


उन्होंने बताया कि मुम्बई के अखबार साकाल में प्रकाशित उनके लेखों पर उनकी किताब चरेवैती-चरेवैती का जल्दी ही हिन्दी, अंग्रेज़ी, गुजराती और उर्दू में अनुवाद कराकर उसका विमोचन कराया जाएगा.


राज्यपाल ने कहा कि संविधान के दायरे में रहते हुए मैंने अपने दायित्व का निर्वहन किया. उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष 4 विधेयक विचाराधीन थे तथा 24 विधेयक विधान मण्डल से पारित होकर उनकी अनुमति हेतु प्रेषित किये गये थे. 20 विधेयकों पर उन्होंने अपनी अनुमति प्रदान की है तथा 5 विधेयकों को राष्ट्रपति के पास भेज दिया. 2 विधेयकों को राज्य विधान मण्डल के पुनर्विचार हेतु वापस भेजा गया है तथा राजभवन में 1 विधेयक ‘उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग (संशोधन) विधेयक, 2015‘ विचाराधीन है. इस विधेयक में अध्यक्ष को कैबिनेट मंत्री का दर्जा देने का प्रस्ताव सरकार ने किया है.

इसके साथ ही अध्यादेश, राष्ट्रगान के संबंध में राज्यपाल के विरूद्ध याचिकाओं के खारिज होने, भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट, सिद्धदोष बंदियों की रिहाई, विधान मण्डल के संयुक्त अधिवेशन सत्र, विधान भवन में संसदीय कार्यमंत्री द्वारा राज्यपाल पर की गयी टिप्पणी एवं अन्य महत्वपूर्ण नियुक्तियों के संबंध में कार्यवृत्त में बताया गया है.


श्री नाईक इससे पूर्व भी जवाबदेही, पारदर्शिता और अपनी कार्यप्रणाली में परिमार्जन करने के उद्देश्य से जब 1978 में पहली बार विधायक बने तबसे लगातार 37 वर्ष से अपना वार्षिक कार्यवृत्त प्रस्तुत करते रहे हैं. श्री नाईक जब सांसद थे तब ‘लोक सभा में राम नाईक‘ तथा सांसद न रहने पर ‘लोक सेवा में राम नाईक‘ शीर्षक से अपना वार्षिक कार्यवृत्त जनता के समक्ष पेश किया करते थे और जनता से आवश्यक सुझाव भी आमंत्रित करते थे.

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